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पंजाब चुनाव से पहले आप का बड़ा फेरबदल: मान-चीमा राष्ट्रीय समिति में शामिल, पंजाब में नेतृत्व संतुलन का संकेत
Sat, 12 Sep 2026 08:54 AM IST
Nivedita
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Sat, 12 Sep 2026 08:54 AM IST
सार
पंजाब के सीएम भगवंत मान और वित्तमंत्री हरपाल चीमा को आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।
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पंजाब चुनाव से पहले आप में बड़ा फेरबदल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।
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मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मन को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है। यह फेरबदल आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता बनाए रखने और टिकट वितरण से जुड़े असंतोष को संभालने की चुनौती के बीच हुआ है।
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मान और चीमा का राजनीतिक मामलों की समिति में शामिल होना केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि अब राज्य से जुड़े बड़े राजनीतिक फैसलों में पंजाब के इन दो प्रमुख नेताओं की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखेगी। भगवंत मान पहले से ही पंजाब में पार्टी का प्रमुख चुनावी चेहरा हैं।
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समिति में उनकी मौजूदगी उन्हें पार्टी के शीर्ष निर्णय लेने वाले मंच के करीब लाती है। हरपाल सिंह चीमा को साथ लेकर पार्टी ने पंजाब के भीतर नेतृत्व के दूसरे महत्वपूर्ण केंद्र को भी राष्ट्रीय ढांचे में स्थान दिया है। इससे पंजाब की राजनीति से जुड़े फैसलों में मुख्यमंत्री के चेहरे पर निर्भरता कम होगी। यह एक व्यापक नेतृत्व संतुलन का संकेत देता है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखने के साथ-साथ टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या और संभावित बगावत को संभालना है।
टिकट वितरण पर असर
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आने वाले दिनों में टिकट वितरण पर दिख सकता है। विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर टिकट को लेकर खींचतान बढ़ना स्वाभाविक है। मान और चीमा की मौजूदगी दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व और पंजाब इकाई के बीच समन्वय बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि टिकट चयन में पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को महत्व मिलता है, तो असंतोष नियंत्रित करना आसान होगा। इसके विपरीत, यदि पुराने दावेदारों की अनदेखी होती है, तो यह पार्टी के भीतर नाराजगी और बगावत को जन्म दे सकता है।
राजबीर घुम्मन की भूमिका
राजबीर घुम्मन को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जाना भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। पंजाब से सीमित नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व मिला है। घुम्मन को जगह देना राज्य के अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश है। आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती है कि नए चेहरों और पुराने ढांचे के बीच संतुलन बनाए। इससे चुनाव के समय टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच असंतोष कम होगा।
राजनीतिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण होगी भूमिका
इस फेरबदल का एक बड़ा राजनीतिक संदेश यह भी है कि पार्टी पंजाब संगठन और दिल्ली नेतृत्व के बीच दूरी कम करना चाहती है। भगवंत मान पंजाब में सत्ता का चेहरा हैं, जबकि राष्ट्रीय संगठन केंद्रीय नेतृत्व के प्रभाव में है। राजनीतिक मामलों की समिति में पंजाब के दोनों वरिष्ठ नेताओं को शामिल कर पार्टी ने राज्य नेतृत्व की हिस्सेदारी बढ़ाने का संकेत दिया है। हालांकि, इसका वास्तविक असर तभी सामने आएगा जब विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय होंगे। मान और चीमा की बढ़ी हुई भूमिका राजनीतिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण हो सकती है।
टिकट वितरण पर असर
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आने वाले दिनों में टिकट वितरण पर दिख सकता है। विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर टिकट को लेकर खींचतान बढ़ना स्वाभाविक है। मान और चीमा की मौजूदगी दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व और पंजाब इकाई के बीच समन्वय बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि टिकट चयन में पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को महत्व मिलता है, तो असंतोष नियंत्रित करना आसान होगा। इसके विपरीत, यदि पुराने दावेदारों की अनदेखी होती है, तो यह पार्टी के भीतर नाराजगी और बगावत को जन्म दे सकता है।
राजबीर घुम्मन की भूमिका
राजबीर घुम्मन को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जाना भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। पंजाब से सीमित नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व मिला है। घुम्मन को जगह देना राज्य के अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश है। आम आदमी पार्टी के सामने चुनौती है कि नए चेहरों और पुराने ढांचे के बीच संतुलन बनाए। इससे चुनाव के समय टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच असंतोष कम होगा।
राजनीतिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण होगी भूमिका
इस फेरबदल का एक बड़ा राजनीतिक संदेश यह भी है कि पार्टी पंजाब संगठन और दिल्ली नेतृत्व के बीच दूरी कम करना चाहती है। भगवंत मान पंजाब में सत्ता का चेहरा हैं, जबकि राष्ट्रीय संगठन केंद्रीय नेतृत्व के प्रभाव में है। राजनीतिक मामलों की समिति में पंजाब के दोनों वरिष्ठ नेताओं को शामिल कर पार्टी ने राज्य नेतृत्व की हिस्सेदारी बढ़ाने का संकेत दिया है। हालांकि, इसका वास्तविक असर तभी सामने आएगा जब विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय होंगे। मान और चीमा की बढ़ी हुई भूमिका राजनीतिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण हो सकती है।