पिता ने पबजी खेलने से रोका तो बेटे ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में लिखा- मैं बहुत बुरा हूं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जालंधर के बस्ती शेख के बड़ा बाजार में केमिस्ट की दुकान चलाने वाले आरएसएस कार्यकर्ता चंद्रशेखर के बेटे मंथन शर्मा उर्फ मानिक ने इसलिए अपने पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से छाती पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली, क्योंकि पिता पबजी गेम खेलने से रोकते थे। मानिक डीएवी कॉलेज का छात्र था। पढ़ाई में कमजोर मंथन मोबाइल पर पबजी गेम खेलने का शौकीन था। छाती में गोली मारने से पहले मंथन शर्मा ने सुसाइड नोट में एक लाइन लिखी कि मैं बहुत बुरा हूं।
बस्ती शेख के रहने वाले चंद्रशेखर ने बताया कि उनका बेटा हर वक्त मोबाइल में ही लगा रहता था। इस वजह से पढ़ाई में भी उसके नंबर कम आए थे। वह बीकॉम अंतिम वर्ष में था। वह अकसर मोबाइल में पबजी गेम खेलता था। इस वजह से उन्होंने उसका मोबाइल तोड़ दिया था। बाद में वह उनका ही मोबाइल लेकर उसमें खेलने लगा था।
वह पबजी गेम का आदी हो चुका था और पढ़ने लिखने से दूर होता जा रहा था। चंद्रशेखर ने कहा कि गुरुवार को उन्होंने बेटे को पढ़ाई के लिए डांटा लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा ऐसा कदम उठा लेगा। थाना पांच के एसएचओ रविंदर ने बताया कि जांच में सामने आया है कि मानिक पढ़ाई में थोड़ा कमजोर था। बीकॉम में पढ़ता था और उसके परिजन उसे पढ़ने को कहते थे।
मानिक सारा दिन अपने मोबाइल पर लगा रहता था, जिसके चलते उसके पिता ने उसका मोबाइल छीन लिया। इसी बात से आहत होकर मानिक ने गुरुवार करीब दोपहर 12 बजे पिता की लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मार ली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया। पुलिस ने पिता के बयान दर्जकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौके से जो सुसाइड नोट मिला है, उसको कब्जे में ले लिया है।
बच्चों के साथ समय बिताएं अभिभावक, मोबाइल एडिक्शन खतरनाक: डॉ. जसबीर कौर
मनोवैज्ञानिक व डीएवी यूनिवर्सिटी की वीसी डॉ. जसबीर कौर ऋषि का कहना है कि अभिभावकों को अधिक से अधिक समय अपने बच्चों के साथ बिताना चाहिए। मोबाइल से जितना हो सके बच्चे तभी दूर जाएंगे जब आप उनके साथ समय व्यतीत करेंगे। बच्चे खुद को नजरअंदाज महसूस करते हैं तो मोबाइल व गेम्स को अपना साथी समझने लगते हैं और बाद में इसके आदी हो जाते हैं।
पबजी और अन्य खतरनाक गेम्स के आदी बच्चों को प्यार से काउंसिलिंग कर निकाला जाए। इससे पहले भी जालंधर में एक युवक ने 50 हजार रुपये पिता के खाते से इसलिए निकलवा लिए थे क्योंकि उसको पबजी खेलने के लिए नया मोबाइल लेना था। एक अन्य घटना में युवक ने पबजी के कारण सुसाइड कर ली थी।