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पंजाब को कृषि कानून के खिलाफ बनाना चाहिए कानून-किसान

Sun, 18 Oct 2020 06:45 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 06:45 PM IST
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farmers protest in firozpur
फिरोजपुर में रेल पटरी पर किसान धरना देते हुए। - फोटो : FIROZPUR
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने कहा कि केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानून के खिलाफ पंजाब सरकार को एक कानून बनाना चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इसके अलावा 2005, 2013 व 2017 में किए गए अधिनियम में संशोधन को वापस लिया जाना चाहिए। पंजाब में कर्ज से परेशान किसान खुदकुशी कर रहे हैं, ये सब कुछ सरकारों की गलत नीतियों से हो रहा है। किसानों का रेल रोको आंदोलन रविवार को 25वें दिन में प्रवेश हो गया। फिरोजपुर बस्ती टैंका वाली के पास रेल पटरी पर किसानों के चल रहे धरने में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। इसके अलावा क्रांतिकारी किसान यूनियन ने छावनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-एक पर धरना देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू, सरवन सिंह, इंद्रजीत सिंह व रणबीर सिंह ने कहा कि 19 अक्तूबर को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानून के खिलाफ कानून बनाने का दावा किया है। अब ये देखना है कि कैप्टन अपने वादे में कितने खरा उतरते हैं। किसानों ने कहा कि सरकार 2005, 2013, 2017 में एपीएमसी में किए गए अधिनियम में संशोधन को वापस ले और राज्य को अधिक अधिकार दें। किसान नेता सरवन सिंह ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई है, पंजाब सरकार उन किसानों के परिजनों को मुआवजा नहीं दे रही है। देश में रोजाना पचास किसान कर्ज में दबे होने के कारण खुदकुशी कर रहे हैं। देश भुखमरी में 94 नंबर पर है। सरवन ने कहा कि किसानों को पड़ोसी देशों के साथ व्यापार करने के लिए ट्रेड खोलना चाहिए। ताकि किसान अपनी फसल बेच सके।
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