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किसानों ने मुफ्त में बांटे चार सौ क्विंटल आलू
ब्यूरो, अमर उजाला/जालंध्ार
Updated Fri, 07 Aug 2015 10:10 PM IST
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आलू की फसल में घाटा पड़ने पर किसानों ने शुक्रवार को नामदेव चौक पर मुफ्त
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में बांटकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों की ओर से करीब 400 क्विंटल
आलू मुफ्त में बांटा गया। इसे देखकर आम लोगों की भीड़ जमा हो गई। मुफ्त के
आलू लेने के लिए लोग खाली लिफाफे और थैलियां लेकर पहुंच गए। किसानों ने
लोगों को लिफाफे भर-भर कर आलू बांटे।
किसानों के अनुसार बीते साल आलू की फसल 1.5 मिलियन टन थी, जबकि इस साल 2.1 मिलियन टन पैदावार हुई है। ओवर प्रोडक्शन होने के बाद भी सरकार की ओर से आलू की फसल को खरीदा नहीं जा रहा है। किसानों को मजबूरन आलू को कोल्ड स्टोर में रखा गया है। अब कोल्ड स्टोर में भी आलू की फसल रखने की जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि बीते साल आलू की फसल को पाकिस्तान भेजा गया था। आलू से भरे करीब 3500 ट्रक पाकिस्तान को भेजे गए थे, लेकिन इस बार सरकार ने कुछ नहीं किया है। किसानों ने मांग की है कि मंडियों में बिक रहे सस्ते आलू के रेट बढ़ाएं जाएं। रिटेल की ओर से महंगे बेचे जा रहे आलू के दाम कम किए जाए। साथ ही आलू की फसल से घाटा खाने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाए।
प्रधान रघबीर सिंह ने कहा कि चार ट्रालियों में आलू की बोरियां भर कर लाई गई। इसे राहगीरों में बांट दिया गया। किसानों को आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। मंडियों में आलू की फसल को खरीदा नहीं जा रहा है। किसान आलू की एक ट्राली बेचने जाता है तो करीब तीन दिन लगने के बाद ट्राली खाली होती है।
हेलमेट में डाल कर लेकर गया आलू
मुफ्त में बिक रहे आलू को देख एक व्यक्ति आया। उसके पास कोई लिफाफा या थैली नहीं थी। उस व्यक्ति ने खुद के सिर पर पहने हुए हेलमेट को उतारा और उसमें आलू डलवा लिए।
किसान को 8 रुपये प्रति किलो पड़ता है आलू
जसविंदर सिंह संघा ने कहा कि आलू की फसल लगाने में काफी खर्च हो जाता है। फसल की सारी प्रोडक्शन निकालकर प्रति किलो करीब 8 रुपये खर्चा आता है। करीब एक एकड़ पर लगाई गई आलू की फसल पर इस साल 50,000 रुपये घाटा उठाना पड़ा है। इतने रुपये लगाने के बाद भी मंडियों में आलू की फसल को 2 रुपये प्रति किलो खरीदा जाता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और किसानों को आने वाली मुश्किलों को दूर करना चाहिए।
दिल्ली में बिक रहा 40 रुपये किलो आलू : संघा
पोटैटो ग्रोवर एसोसिएशन (जेपीजीए) के महासचिव जसविंदर सिंह संघा ने कहा कि मंडियों में महज 2 रुपये बिकने वाला आलू दिल्ली की सब्जी मंडियों में 40 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह कुछ दिन पहले दिल्ली गए थे। किसानों को आलू की फसल से घाटा हो रहा है। वहीं रिटेलर आम लोगों को धोखे में रखकर आलू की फसल से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
किसानों के अनुसार बीते साल आलू की फसल 1.5 मिलियन टन थी, जबकि इस साल 2.1 मिलियन टन पैदावार हुई है। ओवर प्रोडक्शन होने के बाद भी सरकार की ओर से आलू की फसल को खरीदा नहीं जा रहा है। किसानों को मजबूरन आलू को कोल्ड स्टोर में रखा गया है। अब कोल्ड स्टोर में भी आलू की फसल रखने की जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि बीते साल आलू की फसल को पाकिस्तान भेजा गया था। आलू से भरे करीब 3500 ट्रक पाकिस्तान को भेजे गए थे, लेकिन इस बार सरकार ने कुछ नहीं किया है। किसानों ने मांग की है कि मंडियों में बिक रहे सस्ते आलू के रेट बढ़ाएं जाएं। रिटेल की ओर से महंगे बेचे जा रहे आलू के दाम कम किए जाए। साथ ही आलू की फसल से घाटा खाने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाए।
प्रधान रघबीर सिंह ने कहा कि चार ट्रालियों में आलू की बोरियां भर कर लाई गई। इसे राहगीरों में बांट दिया गया। किसानों को आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। मंडियों में आलू की फसल को खरीदा नहीं जा रहा है। किसान आलू की एक ट्राली बेचने जाता है तो करीब तीन दिन लगने के बाद ट्राली खाली होती है।
हेलमेट में डाल कर लेकर गया आलू
मुफ्त में बिक रहे आलू को देख एक व्यक्ति आया। उसके पास कोई लिफाफा या थैली नहीं थी। उस व्यक्ति ने खुद के सिर पर पहने हुए हेलमेट को उतारा और उसमें आलू डलवा लिए।
किसान को 8 रुपये प्रति किलो पड़ता है आलू
जसविंदर सिंह संघा ने कहा कि आलू की फसल लगाने में काफी खर्च हो जाता है। फसल की सारी प्रोडक्शन निकालकर प्रति किलो करीब 8 रुपये खर्चा आता है। करीब एक एकड़ पर लगाई गई आलू की फसल पर इस साल 50,000 रुपये घाटा उठाना पड़ा है। इतने रुपये लगाने के बाद भी मंडियों में आलू की फसल को 2 रुपये प्रति किलो खरीदा जाता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और किसानों को आने वाली मुश्किलों को दूर करना चाहिए।
दिल्ली में बिक रहा 40 रुपये किलो आलू : संघा
पोटैटो ग्रोवर एसोसिएशन (जेपीजीए) के महासचिव जसविंदर सिंह संघा ने कहा कि मंडियों में महज 2 रुपये बिकने वाला आलू दिल्ली की सब्जी मंडियों में 40 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह कुछ दिन पहले दिल्ली गए थे। किसानों को आलू की फसल से घाटा हो रहा है। वहीं रिटेलर आम लोगों को धोखे में रखकर आलू की फसल से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।