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Jalandhar News: डेरा बाबा जवाहर दास गांव सूसां का बहुचर्चित मामले में ग्रामीणों के पक्ष में फैसला
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-सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को 6 महीने में निपटारा करने का दिया था निर्देश
-दमदमी टकसाल द्वारा गठित ट्रस्ट ने ग्रामीणों का हस्तक्षेप रोकने की मांग की थी
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होशियारपुर। दोआबा के प्रसिद्ध डेरा बाबा जवाहर दास गांव सूसां के प्रबंधन को लेकर 7 साल से चल रहे बहुचर्चित मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन महक सभरवाल की अदालत ने आज दमदमी टकसाल ट्रस्ट के दावे को खारिज करते हुए ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया।
मामले में गांव के तीन निवासियों की ओर से पिछले साल दायर अपील पर इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को उक्त मामले का 6 महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करते हुए अदालत ने आज मामले में अपना फैसला सुनाया। ये निर्देश गांव सूसां के निवासी नरिंदर पाल, अरविंदर सिंह इंदा और साहिब सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील के मामले में दिए गए थे।
नरिंदर पाल ने बताया कि वर्ष 1987 में गांव में स्थित उक्त डेरे के संचालन को लेकर विवाद होने के बाद ग्रामीणों व पंचायत की ओर से संयुक्त रूप से एक कमेटी बनाई गई थीजो डेरे का प्रबंधन करती रही। वर्ष 2018 में पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर डेरे का प्रबंधन दमदमी टकसाल को सौंपने का निर्णय ले लिया। इसके बाद डेरे के संचालन के लिए टकसाल की ओर से एक ट्रस्ट बनाया गया। ट्रस्ट ने अदालत में अर्जी दायर कर ग्रामीणों को डेरे के प्रबंधन में हस्तक्षेप न करने देने की मांग की थी। मामले में अदालत ने मार्च 2024 में आदेश जारी कर मामले का अंतिम निपटारा होने तक डेरे पर रिसीवर नियुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ दमदमी टकसाल ने हाईकोर्ट में अपील की व 29 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने रिसीवर को हटा दिया। मई 2024 में उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 17 जनवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उक्त अपील का निपटारा करते हुए निचली अदालत को निर्देश जारी किए थे कि 2018 से चल रहे इस मामले का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए। एसपी मेजर सिंह ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 500 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके।
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17 एचएसपी 17
डेरा बाबा जवाहर दास सुसन के मुख्य द्वार के सामने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात।
17 एचएसपी 18
नरिंदर पाल और अरविंदर सिंह इंदा डेरा बाबा जवाहर दास सुसन मामले में गांव के पक्ष में आए फैसले की जानकारी देते हुए।
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-दमदमी टकसाल द्वारा गठित ट्रस्ट ने ग्रामीणों का हस्तक्षेप रोकने की मांग की थी
होशियारपुर। दोआबा के प्रसिद्ध डेरा बाबा जवाहर दास गांव सूसां के प्रबंधन को लेकर 7 साल से चल रहे बहुचर्चित मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन महक सभरवाल की अदालत ने आज दमदमी टकसाल ट्रस्ट के दावे को खारिज करते हुए ग्रामीणों के पक्ष में फैसला सुनाया।
मामले में गांव के तीन निवासियों की ओर से पिछले साल दायर अपील पर इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को उक्त मामले का 6 महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करते हुए अदालत ने आज मामले में अपना फैसला सुनाया। ये निर्देश गांव सूसां के निवासी नरिंदर पाल, अरविंदर सिंह इंदा और साहिब सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील के मामले में दिए गए थे।
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नरिंदर पाल ने बताया कि वर्ष 1987 में गांव में स्थित उक्त डेरे के संचालन को लेकर विवाद होने के बाद ग्रामीणों व पंचायत की ओर से संयुक्त रूप से एक कमेटी बनाई गई थीजो डेरे का प्रबंधन करती रही। वर्ष 2018 में पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर डेरे का प्रबंधन दमदमी टकसाल को सौंपने का निर्णय ले लिया। इसके बाद डेरे के संचालन के लिए टकसाल की ओर से एक ट्रस्ट बनाया गया। ट्रस्ट ने अदालत में अर्जी दायर कर ग्रामीणों को डेरे के प्रबंधन में हस्तक्षेप न करने देने की मांग की थी। मामले में अदालत ने मार्च 2024 में आदेश जारी कर मामले का अंतिम निपटारा होने तक डेरे पर रिसीवर नियुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ दमदमी टकसाल ने हाईकोर्ट में अपील की व 29 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने रिसीवर को हटा दिया। मई 2024 में उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 17 जनवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उक्त अपील का निपटारा करते हुए निचली अदालत को निर्देश जारी किए थे कि 2018 से चल रहे इस मामले का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए। एसपी मेजर सिंह ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 500 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके।
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17 एचएसपी 17
डेरा बाबा जवाहर दास सुसन के मुख्य द्वार के सामने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात।
17 एचएसपी 18
नरिंदर पाल और अरविंदर सिंह इंदा डेरा बाबा जवाहर दास सुसन मामले में गांव के पक्ष में आए फैसले की जानकारी देते हुए।