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सिविल अस्पताल में कैंसर पीड़ित मरीज की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Sat, 29 Oct 2016 09:39 PM IST
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dead body
- फोटो : demo
सिविल अस्पताल में दाखिल कैंसर पीड़ित मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतक की पहचान गुरमेल निवासी गांव रेरू के रुप में हुई है।
दकोहा निवासी शिवानी और मनजीत कौर निवासी ने बताया कि शनिवार सुबह 9.30 पर वह अपने पिता गुरमेल को सिविल अस्पताल चेक करवाने लाए थे, लेकिन पिता की जांच करने वाले डॉक्टर रमन अस्पताल नहीं पहुंचे थे।
काफी इंतजार करने के बाद डॉक्टर रमन जब 10.30 बजे के करीब आए तो उन्होंने जांच करने के बाद सीटी स्कैन करवाने को कहा। उन्होंने अस्पताल पर आरोप लगाए कि उनके पिता के सिटी स्कैन के लिए उनसे 1900 रुपये मांगे गए।
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उन्होंने कहा कि जब पूछा कि सिविल अस्पताल में तो कैंसर पीड़ित मरीज का फ्री इलाज होता है, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी। इतनी देर में उनके पिता की मौत हो गई। यदि समय रहते डॉक्टर उनके पिता को देख लेते तो शायद वह बच जाते।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर के देर से आने और कैंसर पीड़ित मरीज से पैसे मांगने संबंधी वह सेहत विभाग के आला अधिकारी को शिकायत करेंगी। इस बारे में जब डॉक्टर रमन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मरीज की जांच में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। मरीज के इलाज और फ्री टेस्ट के लिए उन्होंने पर्ची भी बना कर दी थी। उन पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं।
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दकोहा निवासी शिवानी और मनजीत कौर निवासी ने बताया कि शनिवार सुबह 9.30 पर वह अपने पिता गुरमेल को सिविल अस्पताल चेक करवाने लाए थे, लेकिन पिता की जांच करने वाले डॉक्टर रमन अस्पताल नहीं पहुंचे थे।
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काफी इंतजार करने के बाद डॉक्टर रमन जब 10.30 बजे के करीब आए तो उन्होंने जांच करने के बाद सीटी स्कैन करवाने को कहा। उन्होंने अस्पताल पर आरोप लगाए कि उनके पिता के सिटी स्कैन के लिए उनसे 1900 रुपये मांगे गए।
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उन्होंने कहा कि जब पूछा कि सिविल अस्पताल में तो कैंसर पीड़ित मरीज का फ्री इलाज होता है, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी। इतनी देर में उनके पिता की मौत हो गई। यदि समय रहते डॉक्टर उनके पिता को देख लेते तो शायद वह बच जाते।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर के देर से आने और कैंसर पीड़ित मरीज से पैसे मांगने संबंधी वह सेहत विभाग के आला अधिकारी को शिकायत करेंगी। इस बारे में जब डॉक्टर रमन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मरीज की जांच में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। मरीज के इलाज और फ्री टेस्ट के लिए उन्होंने पर्ची भी बना कर दी थी। उन पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं।