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Punjab: विदेश में नौकरी का सपना बना मौत का सफर... रूस-यूक्रेन की जंग में फंसा मनदीप, एक साल बाद घर पहुंची लाश
Sun, 04 Jan 2026 11:22 AM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (गोराया)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (गोराया)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 04 Jan 2026 11:22 AM IST
सार
पंजाब के जालंधर का युवक मनदीप सिंह तीन साल पहले रूस गया था। वहां रूस और यूक्रेन की जंग में उसे धकेल दिया गया। एक साल पहले परिवार से उसकी बात होना बंद हो गई थी। लाख कोशिशों के बाद एक साल बाद मनदीप सिंह का शव घर पहुंचा है।
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मनदीप की फाइल फोटो और विलाप करते परिजन।
- फोटो : संवाद
विस्तार
जालंधर के गोराया कस्बे के मोहल्ला गुरु रविदास नगर से तीन साल पहले विदेश कमाने गया मनदीप कुमार आखिरकार ऐसे जाल में फंस गया, जिससे निकलने का उसे कभी मौका ही नहीं मिला। बेहतर नौकरी और उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर एजेंटों ने पहले उसे विदेश भेजा और फिर कथित तौर पर जबरन रूस की सेना में भर्ती करवा दिया। हैरानी की बात यह है कि मनदीप शारीरिक रूप से सक्षम नहीं था, उसकी टांग में गंभीर समस्या थी, बावजूद इसके उसे युद्ध क्षेत्र में झोंक दिया।
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मनदीप की रूस-यूक्रेन जंग में मौत हो गई। परिवार ने अपने तौर पर रूस जाकर शव को तलाश किया। इस प्रक्रिया में 1 साल से ज्यादा का समय निकल गया। मनदीप की डेडबॉडी रविवार देर रात रूस से घर लाई गई।
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परिवार के अनुसार मनदीप करीब तीन साल पहले एजेंटों के झांसे में आकर रूस गया था। शुरुआत में उसने घर पर फोन कर बताया कि हालात ठीक नहीं हैं और उसे जबरन सेना में शामिल कर लिया गया है। इसके बाद 1 मार्च 2024 से उसका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। कई महीनों तक परिजन बेटे की एक झलक, एक कॉल या किसी संदेश की उम्मीद में दर-दर भटकते रहे, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई।
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मनदीप के परिजनों का आरोप है कि एजेंटों ने नौकरी का लालच देकर उसे फंसाया और फिर उसे ऐसे हालात में धकेल दिया, जहां से वापसी लगभग नामुमकिन थी। परिवार का कहना है कि मनदीप ने कभी सेना में जाने की इच्छा नहीं जताई थी, न ही वह शारीरिक रूप से इसके योग्य था। इसके बावजूद उसे रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भेज दिया गया।
जैसे ही दिल्ली से मनदीप का शव गोराया उसके घर पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। हर किसी का रो-रोकर बुरा हाल था। मां के आंसू नहीं थम पा रहे थे। जैसे ही बेटे की डेडबॉडी वाला ताबूत घर के आंगन में पहुंचा तो पिता फफक-फफक कर रो पड़े। लोगों ने उनको दिलासा दिलाया और पानी पिलाकर ढांढ़स बंधाया। बेटे की मौत का परिवार को गहरा सदमा लगा है।