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चिट फण्ड कंपनी 45 लोगों के लाखों रुपए लेकर फरार
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टांडा (रामपुर)। क्षेत्र में बीते पांच वर्षों से कार्य कर रही चिटफंड कंपनी क्षेत्र के 45 लोगों का लाखों रुपये लेकर फरार हो गई। पूछताछ करने पता कंपनी मालिकों ने कंपनी को घटा होना बता कर पैसे देने से इंकार कर दिया। इसके बाद स्थानीय एजेंट द्वारा कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है ।
भगतपुर (मुरादाबाद) थाना क्षेत्र के ग्राम मल्हूपुरा निवासी अब्दुल सलाम पुत्र अब्दुल वहीद ने रिपोर्ट दर्ज कराई है की राइट वे म्यूच्यूअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड के डायरेक्टर और मेंबर इशरत अली, शकील अहमद, मोहम्मद गुफरान, हामिद हुसैन, ताहिर, मोहम्मद आक़िल, हरकेश सिंह, अली अहमद आदि आरोपी आक़िल के निवास पर उससे 2014 में मिले और उसको प्रेरित किया की वो इनकी कंपनी में ेक्षेत्रीय जनता का पैसा निवेश कराए जिसका उनको नियमानुसार कमीशन मिलेगा। इस पर वो उनके झांसे में आ गया और 14 जनवरी 2014 से उनकी कंपनी में एजेंट बन गया। क्षेत्र में उसकी छवि अच्छी होने के कारण विभिन्न जगहों के 45 लोगों ने उसकी बात पर भरोसा कर कंपनी में अपने अनुसार पैसे निवेश कर दिए। जो कुल 16 लाख 54 हजार 281 बनती है। मार्च 2018 को कंपनी के दफ्तर क्रमवार बंद होने लगे। इस पर उसके उक्त व्यक्तियों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया की कंपनी को घाटा हो गया है और वो किसी भी निवेशक का पैसा वापस नहीं करेंगे। 10 नवम्बर 2018 को मोहम्मद आक़िल के निवास पर पंचायत हुई। जिसमे सभी 45 निवेशक उसके साथ गए जहाँ पर कंपनी वालों ने निवेश की गई राशि को वापस करने से इंकार कर दिया तथा उसको कानूनी कार्यवाही करने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित एजेंट की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आठ लोगों के विरुद्ध सम्बंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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भगतपुर (मुरादाबाद) थाना क्षेत्र के ग्राम मल्हूपुरा निवासी अब्दुल सलाम पुत्र अब्दुल वहीद ने रिपोर्ट दर्ज कराई है की राइट वे म्यूच्यूअल बेनिफिट इंडिया निधि लिमिटेड के डायरेक्टर और मेंबर इशरत अली, शकील अहमद, मोहम्मद गुफरान, हामिद हुसैन, ताहिर, मोहम्मद आक़िल, हरकेश सिंह, अली अहमद आदि आरोपी आक़िल के निवास पर उससे 2014 में मिले और उसको प्रेरित किया की वो इनकी कंपनी में ेक्षेत्रीय जनता का पैसा निवेश कराए जिसका उनको नियमानुसार कमीशन मिलेगा। इस पर वो उनके झांसे में आ गया और 14 जनवरी 2014 से उनकी कंपनी में एजेंट बन गया। क्षेत्र में उसकी छवि अच्छी होने के कारण विभिन्न जगहों के 45 लोगों ने उसकी बात पर भरोसा कर कंपनी में अपने अनुसार पैसे निवेश कर दिए। जो कुल 16 लाख 54 हजार 281 बनती है। मार्च 2018 को कंपनी के दफ्तर क्रमवार बंद होने लगे। इस पर उसके उक्त व्यक्तियों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया की कंपनी को घाटा हो गया है और वो किसी भी निवेशक का पैसा वापस नहीं करेंगे। 10 नवम्बर 2018 को मोहम्मद आक़िल के निवास पर पंचायत हुई। जिसमे सभी 45 निवेशक उसके साथ गए जहाँ पर कंपनी वालों ने निवेश की गई राशि को वापस करने से इंकार कर दिया तथा उसको कानूनी कार्यवाही करने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित एजेंट की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आठ लोगों के विरुद्ध सम्बंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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