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संघर्ष: बचपन में गई आंख की रोशनी, धैर्य से पास की सिविल परीक्षा; नेत्रहीन IAS का 24 घंटे में दूसरी बार तबादला

Thu, 26 Sep 2024 12:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 26 Sep 2024 12:44 PM IST
सार

नेत्रहीन आईएएस अधिकारी का 24 घंटे में दूसरी बार तबादला हुआ है। आईएएस अधिकारी अंकुरजीत अब पुडा के सीए बने हैं। अंकुरजीत की बचपन में आंख की रोशनी चली गई थी। अंकुरजीत ने धैर्य से सिविल परीक्षा पास की थी।

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Blind IAS officer transferred for second time in 24 hours, now Ankurjeet becomes CA of PUDA
Blind IAS officer - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जालंधर में सहायक कमिश्नर तैनात होने वाले नेत्रहीन आईएएस अंकुर का तबादला 24 घंटे के भीतर निगम से पुडा में कर दिया गया है। बुधवार सुबह उन्होंने नगर निगम में जॉइन किया ही था कि कुछ देर बार उनका तबादला बतौर सीए पुडा कर दिया गया।
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अंकुर देख नहीं सकते। वे जब स्कूल में थे, तब उनकी आंखों की रोशनी बचपन में धीरे-धीरे खोने लगी थी और आखिरकार एक वक्त ऐसा आया कि उन्हें दिखना बंद हो गया। 
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इन हालातों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया, वे परिस्थतियों से लड़ते रहे। इसका नतीजा है कि आज उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली। अंकुर ने साल 2017 में सिविल सेवा की परीक्षा में 414 रैंक हासिल की है।
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जिंदगी में हार न मानने वाले कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो पहले ही प्रयास में और बेहद कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं। इन्हीं होनहारों में से एक हैं अंकुरजीत सिंह, जिसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर एक मिसाल पेश की है। 

अंकुरजीत सिंह हरियाणा के यमुनानगर के गांव रसूलपुर के निवासी हैं। यहां के सरकारी स्कूल से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई अंकुरजीत ने जिला मुख्यालय के स्कूल से की। रोजाना स्कूल जाने के लिए अंकुरजीत करीब 40 किमी का सफर तय करते थे। अंकुरजीत बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेधावी थे।

मां बोलकर करवाती थीं पढ़ाई
अंकुरजीत की मम्मी का कहना है कि जब उन्हें अपने बच्चे की समस्या का पता चला तो जो भी वह स्कूल से पढ़कर आता था तो रात को उसे पढ़कर सुनाती थी। इस तरह से वे सुनकर पढ़ाई करता था।

अंकुर की दसवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से ही हुई है। जब गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे खेलते और मस्ती करते थे, तब अंकुरजीत मां की मदद से सारी किताबें पहले ही पढ़ लेते थे।

शिक्षिका ने किया प्रेरित
अंकुर ने बताया कि मेरी 12वीं की परीक्षा के दौरान कुछ लोग हमारे स्कूल आए और उन्होंने देश की इन परीक्षाओं के बारे में बताया। मेरी एक शिक्षिका ने मुझे आईआईटी में दाखिले के लिए मोटिवेट किया, जिसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया। हालांकि, उनकी कोशिश के बाद मैं मान गया कि मैं जेईई की तैयारी करूंगा।

अंकुरजीत जब 12वीं में पढ़ते थे तो उनकी टीचर ने भी कहा कि तुम आईआईटी का फॉर्म क्यों नहीं भर लेते। अंकुरजीत ने फॉर्म भरा और उनका एडमिशन आईआईटी रुड़की में हो गया था। अंकुरजीत के आईआईटी में कई दोस्त यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे, इसलिए उन्होंने भी तैयारी शुरू कर दी।

स्क्रीन रीडर की मदद से पढ़ने लगे किताबें
अंकुरजीत बताते हैं कि आईआईटी ने उन्हें टेक्नॉलॉजी के काफी करीब ला दिया था। जहां कहीं उन्हें पढ़ने-समझने में समस्या होती थी तो वह स्क्रीन रीडर की मदद से किताबें पढ़ने लगे। इसके अलावा भी अगर वे कहीं फंसते थे तो वे दोस्तों से मदद लेते थे।

अंकुरजीत की मेहनत रंग लाई और साल 2017 में उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता मिल गई। बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी अंकुर ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी लेकिन तब वे इस परीक्षा को क्रैक नहीं कर पाए थे, लेकिन उन्होंने दूसरे प्रयास में ही परीक्षा में 414वीं रैंक हासिल कर ली।
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