पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा का अलग रंग: सिख मिशनरी नेताओं और एसजीपीसी पर भाजपा की नजर
भाजपा की कोर टीम ने मंथन किया है कि पंजाब में पार्टी तब तक अकेले सत्ता में नहीं आ सकती जब तक उनका कब्जा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर नहीं हो जाता।
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आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा का स्वरूप पंजाब में बदला हुआ दिखेगा। पार्टी के कार्यालयों में जो बोले सो निहाल की गूंज सुनाई देनी शुरू हो गई है। जमीनी स्तर का कार्यकर्ता हो या फिर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जो बोले सो निहाल के उद्घोष करते दिखाई दे रहे हैं। कारण साफ है कि पार्टी का टारगेट पंजाब में सिख मिशनरी नेता हैं, जिनके सहारे वह दमदमी टकसाल व शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में अपनी पैठ बना सके।
पंजाब के बाहर से हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में भारतीय जनता पार्टी अपनी पैठ बना चुकी है। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल भी इन दिनों भाजपा नेताओं के करीब हैं। अगस्त में दादूवाल की मुलाकात राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विजय सांपला से हुई और काफी चर्चा का विषय बनी। हरियाणा में सिरसा के गांव दादू के ग्रामीणों ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बलजीत सिंह दादूवाल का सामाजिक बहिष्कार इसलिए किया, क्योंकि आरोप था कि दादूवाल भाजपा नेताओं को गांव में बुलाकर गांव का भाईचारा खराब कर रहे हैं। हरियाणा के साथ-साथ भाजपा ने सिख मिशनरी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा को पार्टी में शामिल किया और बाद में सिरसा ने कमेटी प्रधान का पदभार फिर से संभाल लिया।
भाजपा की कोर टीम ने मंथन किया है कि पंजाब में पार्टी तब तक अकेले सत्ता में नहीं आ सकती जब तक उनका कब्जा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर नहीं हो जाता। पार्टी की तरफ से एसजीपीसी के पूर्व प्रधान गुरचरण सिंह टोहड़ा के नाती करणवीर टोहड़ा को पार्टी में शामिल कर लिया गया है। वहीं जालंधर में सिख मिशनरी प्रो. सरचांद सिंह भी बुधवार को भाजपा का हिस्सा बन गए।
प्रो. सरचांद सिंह टकसाली सिख हैं। उन्होंने बुधवार को भाजपा में शामिल होकर साफ कर दिया है कि भाजपा का पंजाब में एजेंडा हिंदुत्व नहीं है। प्रो. सरचांद सिंह दमदमी टकसाल के मुख्य प्रवक्ता थे और सिख मुद्दों के विचारक हैं। दमदमी टकसाल भिंडरांवाला के तमाम फैसलों में प्रो. सरचांद की अहम भूमिका होती थी। जत्थेदार बाबा अजीत सिंह, बाबा निरवैर सिंह, जत्थेदार जरनैल सिंह, बाबा कुंदन सिंह व प्रो. सरचांद सिंह टकसाल के प्रमुख नेता माने जाते हैं। संत ढंडरियां वाला का मामला हो या नानक शाह फकीर का मसला, प्रो. सरचांद की भूमिका प्रमुख रही है। ऐसे नेताओं को भाजपा पार्टी में शामिल कर साफ संदेश दे रही है कि उनका एजेंडा पंजाब में साफ है। पंजाब में सिख मिशनरी संस्थाओं के भीतर पैठ बनाना उनकी प्राथमिकता है।
एसजीपीसी के संपर्क में पार्टी नेता
पार्टी का एक गुट शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के साथ भी संपर्क साध रहा है। पार्टी के इस गुट का तर्क है कि अगर हरियाणा व दिल्ली के बाद पंजाब की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर भगवा वर्चस्व बनता है तो वह दिन दूर नहीं जब पंजाब में भाजपा की सत्ता का रास्ता साफ होगा। साथ ही सिख-हिंदू भाईचारे की एक मिसाल गठित होगी। पार्टी में जब बुधवार को प्रो सरचांद सिंह को भाजपा में शामिल किया गया तो केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जो बोले सो निहाल का जयकारा लगाया, जिसके बाद तमाम पार्टी वर्करों ने भी इसका जवाब दिया। पंजाब में सत्ता का रास्ता पंथक वोट से होकर निकलता है। पंजाब में 30 सीटें ऐसी हैं, जहां पर सीधे तौर पर पंथक वोट बैंक ही इस बात का फैसला करता है कि उनका विधायक कौन होगा। वहीं हर विधानसभा क्षेत्र में पंथक वोट भी अहम भूमिका अदा करता है।