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पंजाब: कृषि अध्यादेशों का विरोध हुआ तेज, कई जगह सड़कों पर उतरे किसान, बादल में धरना जारी

Sat, 19 Sep 2020 08:06 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुक्तसर/बठिंडा/अमृतसर/पटियाला/ होशियारपुर (पंजाब)
अमर उजाला नेटवर्क, मुक्तसर/बठिंडा/अमृतसर/पटियाला/ होशियारपुर (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Sat, 19 Sep 2020 08:06 PM IST
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batch of teachers reached Badal village on motorcycle from Bathinda
गांव बादल में किसानों का धरना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पंजाब में कृषि अध्यादेशों का विरोध तेज होता जा रहा है। शनिवार को भी मुक्तसर के बादल गांव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निवास के सामने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां का धरना जारी रहा। उधर, अमृतसर और पटियाला में भी किसानों ने सड़कों पर उतरकर कृषि अध्यादेश का विरोध किया। 

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होशियारपुर के तलवाड़ा में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का पुतला फूंका और नारेबाजी करते हुए अध्यादेश वापस लेने की मांग की। बठिंडा से मोटर साइकिलों पर सवार होकर अध्यापक बादल गांव में धरनास्थल पर पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। 
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पटियाला के पुडा ग्राउंड में कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसानों ने कई दिनों से पक्का धरना लगा रखा है। इसके साथ ही किसानों का आंदोलन गांवों में भी फैल गया है। गांव रणबीरपुरा में किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। अमृतसर में सुबह किसान संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने गांव चब्बा में पीएम नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री तोमर के पुतले फूंके।
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उन्होंने अमृतसर-तरनतारन रोड जाम कर दिया। किसान नेता गुरबचन सिंह चब्बा ने कहा कि कृषि अध्यादेश किसान विरोधी हैं, पंजाब के किसानों की कमर तोड़ देंगे। इससे बड़ी कंपनियों को किसानों से लूट की कानूनी मान्यता मिलेगी। किसान गुरलाल सिंह ने कहा कि पहले मोदी सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी  लागू कर किसानों को कमजोर करने की कोशिश की, अब कृषि अध्यादेश लाकर किसानों को मजदूर बनाने पर आमादा है। किसानों ने साफ कह दिया है कि जब तक अध्यादेश वापस नहीं लिए जाते, संघर्ष जारी रहेगा।

बठिंडा से मोटरसाइकिल पर बादल गांव पहुंचा अध्यापकों का जत्था

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल निवास के सामने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में कृषि अध्यादेश के खिलाफ संघर्ष तेज होता जा रहा है। किसानों ने साफ कह दिया है कि जब तक अध्यादेश वापस नहीं लिए जाते तब तक संघर्ष जारी रहेगा। मोर्चे के पांचवें दिन कार्यकारिणी के महासचिव हरजिंदर कौर बिंदू और श्रृंगारा सिंह मान ने कहा कि कृषि अध्यादेश रद्द कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानी को बर्बाद करने पर तुली है। केंद्र सरकार हर चीज का निजीकरण कर रही है। मोर्चे में जहां किसान और महिलाएं बड़ी तादाद में शामिल हो रही हैं। वहीं नौजवान, खेत मजदूर, आरएमपी डॉक्टर, अध्यापक और ठेका मुलाजिमों सहित अलग-अलग वर्गों के लोग जत्थों के रूप में किसानों को समर्थन देने पहुंच रहे हैं।

शनिवार को डीटीएफ (डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट) के नेतृत्व में अध्यापकों के बड़ा जत्था बठिंडा से बादल तक मोटरसाइकिल मार्च निकालकर किसान के मोर्चे में शामिल होने पहुंचा। धरने को नौजवान किसान नेता राजविंदर सिंह, अजयपाल सिंह, अमरजीत सिंह, हरजिंदर सिंह, सतपाल सिंह, हरबंस सिंह, अध्यापक नेता दिगविजय पाल शर्मा, सुखविंदर सुखी, खेत मजदूर नेता काला सिंह आदि ने संबोधित किया। 

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