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फिरोजपुर तूड़ी बाजार स्थित शहीद भगत सिंह व उनके क्रांतिकारी साथियों के गुप्त ठिकाने को बनाया जाए यादगार

Thu, 22 Mar 2018 10:24 PM IST
Updated Thu, 22 Mar 2018 10:24 PM IST
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फिरोजपुर तूड़ी बाजार स्थित शहीद भगत सिंह व उनके क्रांतिकारी साथियों के गुप्त ठिकाने को बनाया जाए यादगार
23 मार्च शहीदी दिवस पर विशेष
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गुप्त ठिकाने में भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव समेत आते थे आठ क्रांतिकारी
फिरोजपुर तूड़ी बाजार स्थित शहीद भगत सिंह व उसके क्रांतिकारी साथियों के गुप्त ठिकाने को बनाया जाए यादगार
गुप्त ठिकाने में चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव समेत आते थे आठ क्रांतिकारी
अनिल कुमार
फिरोजपुर।
अंग्रेजों से भारत को आजाद करवाने के लिए क्रांतिकारियों ने रणनीति बनाने के लिए फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार (मोहल्ला शहागंज) में गुप्त ठिकाना बनाया था, जिसे अब यहां की समाजसेवी संस्थाएं व लोग शहीदों के इस ठिकाने को नेशनल हेरिटेज बनाने की मांग उठा रहे हैं। इस ठिकाने में क्रांतिकारी सुखदेव व डॉ. निगम ने शहीद भगत सिंह के केश व दाढ़ी काटी थी। क्रांतिकारी सांडरस की हत्या करने से पहले गुप्त ठिकाने पर एयर पिस्टल से निशानेबाजी करते थे, बम बनाने के लिए सामान एकत्र करने के अलावा अन्य गतिविधियां करते थे।
शहर के तूड़ी बाजार में क्रांतिकारी पार्टी का गुप्त ठिकाना यहां दस अगस्त 1928 से लेकर चार फरवरी 1929 तक रहा। यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया था। यहां भगत सिंह के अलावा चंद्र शेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डॉ. गया प्रसाद, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था।
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गुप्त ठिकाना बनाने के तीन कारण
1. क्रांतिकारी जो पंजाब से विभिन्न ठिकानों जैसे दिल्ली, कानपुर, लखनऊ व आगरा इत्यादि जाने-आने के लिए फिरोजपुर में बनाए गुप्त ठिकाने पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे।
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2. बंब बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डॉ. निगम को यहां निगम फारमेसी तथा ड्रग्सिट की दुकान खुलवाई थी।
3. डाक्टरी पेशा चलने पर पार्टी की आर्थिक सहायता की जाए।

गुप्त ठिकाने वाली इमारत मौजूदा समय में ट्रस्ट के पास
इस समय गुप्त ठिकाने वाली इमारत श्री कृष्णा मंदिर ट्रस्ट के अधीन है। ट्रस्ट ही इमारत का किराया वसूलती है। लोगों की मांग है कि इसे नेशनल हेरिटेज बनाया जाए, ताकि उन शहीदों की यादें जिंदा रहें और नई पीढ़ी उनके पद चिन्हों पर चले।

क्रांतिकारी गुप्त ठिकाने में एयर पिस्टल से करते थे निशानेबाजी
अंग्रेजों पर गोली से स्टीक निशाना दागने के लिए क्रांतिकारी फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार में बने गुप्त ठिकाने पर एयर पिस्टल से निशानेबाजी करते थे। क्रांतिकारियों ने लाहौर में 17 दिसंबर 1928 को सहायक सुपरिंटेंडेंट आफ पुलिस सांडरस व हेड कांस्टेबल चानन सिंह की हत्या कर दी थी, जिसमें भगत सिंह, राजगुरु व चंद्र शेखर आजाद समेत कई क्रांतिकारी शामिल थे। इस मामले की जांच-पड़ताल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट (रावल पिंडी पाकिस्तान) लाला वजीर चंद सिक्का ने की थी। क्रांतिकारी जय गोपाल के पकड़े जाने पर मजिस्ट्रेट उसे ठिकाने की निशानदेही व उनकी सरगर्मियों की जांच के लिए फिरोजपुर के तूड़ी बाजार में बने गुप्त ठिकाने पर लाया था और ये बातें जय गोपाल ने मजिस्ट्रेट को बताईं थी। यह भी बताया जाता है कि सांडरस की हत्या करने के बाद फिरोजपुर के गुप्त ठिकाने पर एयर पिस्टल से बने निशान चाकू से खरोंच दिए गए थे। ये तथ्य ऐतिहासिक दस्तावेजों में अंकित हैं।

1971 में पाकिस्तानी फौज उखाड़कर ले गई थी शहीदों के बुत
1971 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तानी फौज ने हुसैनीवाला बार्डर पर काफी गांवों पर कब्जा कर लिया था, कब्जे में शहीदों की समाधि भी शामिल थी। जब कब्जा छोड़ने का फैसला हुआ तो पाक फौज अपने साथ शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के बुत उखाड़ कर साथ ले गई थी। इसके अलावा फौज पेड़, मकानों की ईंटें व सामान भी ले गई थी।
गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए खटकडक़लां में पंजाब स्टूडेंट यूनियन करेगी रोष प्रदर्शन
फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार में बने क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए पंजाब स्टूडेंट यूनियन कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को काले झंडे दिखाने के अलावा उनके पुतले भी फूंकेंगे। पिछले साल भी फिरोजपुर में उक्त यूनियन गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए रोष मार्च कर चुकी है। नवजोत सिंह सिद्धू अपने वादे से मुकर गए हैं।

अकाली सरकार यादगार बनाने का कर गई है रास्त साफ
अकाली सरकार गुप्त ठिकाने को शहीदों की यादगार बनाने का रास्ता साफ कर गई है। पुरात्तव विभाग ने दो बार नोटिफिकेशन जारी किया है, किसी ने भी यादगार बनाने के लिए इतराज जाहिर नहीं किया। अब सिर्फ पुरात्तव विभाग को उक्त गुप्त ठिकाने की इमारत अपने कब्जे में लेकर यादगार बनानी है और लोगों के लिए खोलना है, लेकिन इस कार्य को कांग्रेस सरकार नहीं कर रही है।
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फोटो संख्या-22एफजेडआरपी01
कैप्शन--फिरोजपुर के हुसैनीवाला बार्डर स्थित शहीदी स्मारक पर लगे शहीदों के बुत्त।
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