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यह कैसी सरकार, जहां विधायक की पार्षद पत्नी को तीन-तीन बार शिकायत करनी पड़े
Updated Wed, 27 Jun 2018 10:33 PM IST
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न विधायकी चली न पार्षद का रुतबा, कैसे होंगे काम
जालंधर नगर निगम में विधायक की पत्नी व पार्षद उमा बेरी की शिकायतों के बाद भी नहीं जाग रहे अफसर
स्ट्रीट लाइटें ठीक कराने के लिए तीन-तीन बार की शिकायत, भाजपा व शिअद पार्षदों का कटाक्ष, मेयर राजा नाकाम
सुरिंदर पाल
जालंधर। जालंधर नगर निगम हाउस में लाचार व बेबस विधायक की पत्नी व पार्षद उमा बेरी द्वारा लगातार शिकायत करना कि उनकी अधिकारी सुनते ही नहीं है, उनके इलाके की स्ट्रीट लाइट के 29 प्वाइंट खराब हैं औरठीक करने के लिए वह तीन बार लिखित शिकायत दे चुकी हैं। मामले को भाजपा व शिअद ने मुद्दा बना लिया है। भाजपा व शिअद पार्षदों का कटाक्ष है कि जालंधर में डिप्टी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, मेयर से लेकर विधायक सांसद, मंत्रीगण व सूबे में कांग्रेस की सरकार है और एक विधायक की पत्नी की लाचारी व बेबसी इस तस्वीर को साफ करती है कि सूबे में क्या हालात चल रहे हैं। मेयर जगदीश राज राजा बिल्कुल फेल साबित हो रहे हैं, जिनकी अधिकारी सुनते तक नहीं है। इसी तरह से कांग्रेसी विधायक सुशील रिंकू की पत्नी व दूसरी बार पार्षद बनी डॉ. सुनीता रिंकू को 15 मिनट तक मेयर की कुर्सी के पास खड़े होकर वरियाणा डंप का विरोध करना पड़ा लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
भाजपा व शिअद के नगर निगम में भाजपा पार्षद दल के उपनेता सुशील शर्मा का कहना है कि मेयर जगदीश राजा से कुर्सी संभाली नहीं जा रही है, उनका कंट्रोल नगर निगम में नहीं है। निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है और अगर विधायक की पत्नी उमा बेरी की स्ट्रीट लाइट की शिकायतों पर कई माह गौर नहीं होता तो आम नागरिकों व विरोधी दल के पार्षदों का क्या हाल होगा। सारा सिस्टम ध्वस्त हो चुका है और कांग्रेसी पार्षद अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। भाजपा पार्षद शैली खन्ना का कहना है कि जालंधर नगर निगम में अव्यवस्था का आलम है। कांग्रेस के सीनियर पार्षद काफी परेशान है तो आम जनता कहां जाएगी। अब तो कांग्रेस के पास कोई बहाना नहीं है क्योंकि निगम में उनके पास बहुमत है और निकाय मंत्री भी उनकी पार्टी के हैं। अकाली दल के पार्षद परमजीत सिंह रेरू का कहना है कि कांग्रेस को हाथ खड़े कर देने चाहिए, अकाली दल व भाजपा ने पिछले दस साल नगर निगम को बखूबी से चलाया है। कांग्रेस के मेयर कुर्सी पर बैठे थे और हाउस में कांग्रेसी ही अपनी भड़ास निकाल रहे थे। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस को निगम चलाना ही नहीं आ रहा है।
कांग्रेस ने लोगों के साथ धोखा किया
जिला भाजपा प्रधान रमेश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस ने लोगों के साथ धोखा किया है। झूठे वादे कर जनता को अपने झांसे में ले लिया। जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया और 80 में से 66 सीटें कांग्रेस को दी है लेकिन हालात बद से बदतर हो चुके हैं। हाउस में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों की पत्नियां उमा बेरी व सुनीता रिंकू की लाचारी व बेबसी दिख रही है। वरियाणा डंप के मामले में विधायक सुशील रिंकू की पत्नी पार्षद डॉ. सुनीता रिंकू खड़ी होकर बोलती रही कि इस मुद्दे पर बहस करवाई जाए लेकिन डॉ. सुनीता को भी पता नहीं चला कि कब प्रस्ताव मेयर ने पास कर दिया। वह 15 मिनट एजेंडे की कापी लेकर मेयर की कुर्सी के पास खड़ी रही। वहीं पार्षद उमा बेरी जो विधायक राजिंदर बेरी की पत्नी हैं, को अपने वार्ड की स्ट्रीट लाइट के लिए तीन बार शिकायत करनी पड़े और फिर भी ठीक न हो, इससे बड़ी क्या बात हो सकती है। कांग्रेस को खुद ही निगम की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए क्योंकि निगम चलाना उनके बस की बात नहीं है।
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जालंधर नगर निगम में विधायक की पत्नी व पार्षद उमा बेरी की शिकायतों के बाद भी नहीं जाग रहे अफसर
स्ट्रीट लाइटें ठीक कराने के लिए तीन-तीन बार की शिकायत, भाजपा व शिअद पार्षदों का कटाक्ष, मेयर राजा नाकाम
सुरिंदर पाल
जालंधर। जालंधर नगर निगम हाउस में लाचार व बेबस विधायक की पत्नी व पार्षद उमा बेरी द्वारा लगातार शिकायत करना कि उनकी अधिकारी सुनते ही नहीं है, उनके इलाके की स्ट्रीट लाइट के 29 प्वाइंट खराब हैं औरठीक करने के लिए वह तीन बार लिखित शिकायत दे चुकी हैं। मामले को भाजपा व शिअद ने मुद्दा बना लिया है। भाजपा व शिअद पार्षदों का कटाक्ष है कि जालंधर में डिप्टी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, मेयर से लेकर विधायक सांसद, मंत्रीगण व सूबे में कांग्रेस की सरकार है और एक विधायक की पत्नी की लाचारी व बेबसी इस तस्वीर को साफ करती है कि सूबे में क्या हालात चल रहे हैं। मेयर जगदीश राज राजा बिल्कुल फेल साबित हो रहे हैं, जिनकी अधिकारी सुनते तक नहीं है। इसी तरह से कांग्रेसी विधायक सुशील रिंकू की पत्नी व दूसरी बार पार्षद बनी डॉ. सुनीता रिंकू को 15 मिनट तक मेयर की कुर्सी के पास खड़े होकर वरियाणा डंप का विरोध करना पड़ा लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
भाजपा व शिअद के नगर निगम में भाजपा पार्षद दल के उपनेता सुशील शर्मा का कहना है कि मेयर जगदीश राजा से कुर्सी संभाली नहीं जा रही है, उनका कंट्रोल नगर निगम में नहीं है। निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है और अगर विधायक की पत्नी उमा बेरी की स्ट्रीट लाइट की शिकायतों पर कई माह गौर नहीं होता तो आम नागरिकों व विरोधी दल के पार्षदों का क्या हाल होगा। सारा सिस्टम ध्वस्त हो चुका है और कांग्रेसी पार्षद अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। भाजपा पार्षद शैली खन्ना का कहना है कि जालंधर नगर निगम में अव्यवस्था का आलम है। कांग्रेस के सीनियर पार्षद काफी परेशान है तो आम जनता कहां जाएगी। अब तो कांग्रेस के पास कोई बहाना नहीं है क्योंकि निगम में उनके पास बहुमत है और निकाय मंत्री भी उनकी पार्टी के हैं। अकाली दल के पार्षद परमजीत सिंह रेरू का कहना है कि कांग्रेस को हाथ खड़े कर देने चाहिए, अकाली दल व भाजपा ने पिछले दस साल नगर निगम को बखूबी से चलाया है। कांग्रेस के मेयर कुर्सी पर बैठे थे और हाउस में कांग्रेसी ही अपनी भड़ास निकाल रहे थे। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस को निगम चलाना ही नहीं आ रहा है।
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कांग्रेस ने लोगों के साथ धोखा किया
जिला भाजपा प्रधान रमेश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस ने लोगों के साथ धोखा किया है। झूठे वादे कर जनता को अपने झांसे में ले लिया। जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया और 80 में से 66 सीटें कांग्रेस को दी है लेकिन हालात बद से बदतर हो चुके हैं। हाउस में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों की पत्नियां उमा बेरी व सुनीता रिंकू की लाचारी व बेबसी दिख रही है। वरियाणा डंप के मामले में विधायक सुशील रिंकू की पत्नी पार्षद डॉ. सुनीता रिंकू खड़ी होकर बोलती रही कि इस मुद्दे पर बहस करवाई जाए लेकिन डॉ. सुनीता को भी पता नहीं चला कि कब प्रस्ताव मेयर ने पास कर दिया। वह 15 मिनट एजेंडे की कापी लेकर मेयर की कुर्सी के पास खड़ी रही। वहीं पार्षद उमा बेरी जो विधायक राजिंदर बेरी की पत्नी हैं, को अपने वार्ड की स्ट्रीट लाइट के लिए तीन बार शिकायत करनी पड़े और फिर भी ठीक न हो, इससे बड़ी क्या बात हो सकती है। कांग्रेस को खुद ही निगम की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए क्योंकि निगम चलाना उनके बस की बात नहीं है।
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