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फरीदकोट के दो सीनियर शिअद नेताओं का इस्तीफा
Updated Tue, 04 Sep 2018 10:46 PM IST
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फरीदकोट के दो सीनियर शिअद नेताओं का इस्तीफा
बेअदबी मामले में पार्टी का सामने आने पर उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। बेअदबी मामले में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में अकाली दल बादल के नेताओं का नाम सामने आने के बाद पार्टी में बगावत के स्वर उठने लगे है। फरीदकोट में मंगलवार को टकसाली नेता व पूर्व एसजीपीसी सदस्य मक्खन सिंह नंगल और मार्केट कमेटी जैतो के पूर्व चेयरमैन रणजीत सिंह औलख ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट को सही करार देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
नंगल ने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी मामले की घटना वाले दिन 12 अक्टूबर 2015 को एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़. वहां तो आए थे लेकिन वह कोटकपूरा से शिअद विधायक मनतार सिंह बराड़ के कहने पर घटनास्थल पर नहीं गए और बरगाड़ी में एक सदस्य के घर पर ही बैठे रहे। उस दिन समय पर एसजीपीसी व अकाली दल नेताओं ने अपनी जिम्मेवारी निभाई होती तो बहिबल गोलीकांड व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाओं को रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मनतार सिंह बराड़ की डेरा सिरसा के महिंदरपाल बिट्टू के साथ खास दोस्ती थी और इसी कारण अकाली सरकार के समय उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
नंगल ने कहा कि रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद हमने नैतिकता के आधार पर अकाली दल से रिश्ता तोड़ने का फैसला किया है। रणजीत सिंह औलख ने कहा कि मनतार सिंह बराड़ ने डेरा प्रेमियों के वोटों के लालच में बेअदबी मामले में उन पर कार्यवाही नहीं होने दी, बल्कि डेरा प्रेमियों को पार्टी में ओहदे देकर नवाजा गया। गुरु के दोषी साबित हो चुके नेताओं के सरपरस्ती वाली पार्टी में उनका दम घुट रहा है, जिसके चलते उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।
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बेअदबी मामले में पार्टी का सामने आने पर उठाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। बेअदबी मामले में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में अकाली दल बादल के नेताओं का नाम सामने आने के बाद पार्टी में बगावत के स्वर उठने लगे है। फरीदकोट में मंगलवार को टकसाली नेता व पूर्व एसजीपीसी सदस्य मक्खन सिंह नंगल और मार्केट कमेटी जैतो के पूर्व चेयरमैन रणजीत सिंह औलख ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट को सही करार देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
नंगल ने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी मामले की घटना वाले दिन 12 अक्टूबर 2015 को एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़. वहां तो आए थे लेकिन वह कोटकपूरा से शिअद विधायक मनतार सिंह बराड़ के कहने पर घटनास्थल पर नहीं गए और बरगाड़ी में एक सदस्य के घर पर ही बैठे रहे। उस दिन समय पर एसजीपीसी व अकाली दल नेताओं ने अपनी जिम्मेवारी निभाई होती तो बहिबल गोलीकांड व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाओं को रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मनतार सिंह बराड़ की डेरा सिरसा के महिंदरपाल बिट्टू के साथ खास दोस्ती थी और इसी कारण अकाली सरकार के समय उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
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नंगल ने कहा कि रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद हमने नैतिकता के आधार पर अकाली दल से रिश्ता तोड़ने का फैसला किया है। रणजीत सिंह औलख ने कहा कि मनतार सिंह बराड़ ने डेरा प्रेमियों के वोटों के लालच में बेअदबी मामले में उन पर कार्यवाही नहीं होने दी, बल्कि डेरा प्रेमियों को पार्टी में ओहदे देकर नवाजा गया। गुरु के दोषी साबित हो चुके नेताओं के सरपरस्ती वाली पार्टी में उनका दम घुट रहा है, जिसके चलते उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।
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