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नई तबादला नीति से शिक्षा का स्तर गिरेगा : बुट्टर
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:20 PM IST
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नई ट्रांसफर नीति पर विचार-विमर्श
मास्टर कैडर यूनियन ने सूबा स्तरीय बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
मास्टर कैडर यूनियन पंजाब की सूबा स्तरीय बैठक सूबा प्रधान बलदेव सिंह बुट्टर, सूबा महासचिव वाशिंगटन सिंह समीरोवाल, सूबा संयुक्त सचिव हरप्रीत सिंह खुंडा, स्टेट प्रेस सचिव सन्दीप कुमार दुर्गापुर के नेतृत्व में हुई। इस दौरान नई ट्रांसफर नीति पर विचार-विमर्श किया गया।
सूबा प्रधान बलदेव सिंह बुट्टर ने नई तबादला नीति की निंदा की। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को परेशान करने वाली इस नीति से शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट आएगी। अध्यापक को विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और इलाका निवासियों को समझने के लिए लंबा समय लगता ह। आठ साल बाद जबरन तबादला शिक्षा और लोकविरोधी फैसला है। सूबा महासचिव वाशिंगटन सिंह समीरोवाल ने कहा कि यूनियन से कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी और शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार के साथ हुई मीटिंग के दौरान स्वीकार कर लिया गया था कि अध्यापकों की आठ साल बाद जबरन बदली नहीं होगी।
कैबिनेट की मीटिंग में मास्टर कैडर की इस मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। संयुक्त सचिव हरप्रीत सिंह खुंडा व स्टेट प्रेस सचिव संदीप कुमार दुर्गापुर ने कहा कि अध्यापन एक विशेष पेशा है और इस पेशे की खास जरूरतों को नीति बनाते समय नजरंदाज न किया जाए। केवल अध्यापक के निवेदन पर ही तबादला किया जाए। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते कहा कि नई तबादला नीति को तर्कसंगत न बनाया गया तो अध्यापकों को लामबंद करते हुए लोक लहर के साथ संघर्ष शुरू किया जाएगा।
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मास्टर कैडर यूनियन ने सूबा स्तरीय बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
मास्टर कैडर यूनियन पंजाब की सूबा स्तरीय बैठक सूबा प्रधान बलदेव सिंह बुट्टर, सूबा महासचिव वाशिंगटन सिंह समीरोवाल, सूबा संयुक्त सचिव हरप्रीत सिंह खुंडा, स्टेट प्रेस सचिव सन्दीप कुमार दुर्गापुर के नेतृत्व में हुई। इस दौरान नई ट्रांसफर नीति पर विचार-विमर्श किया गया।
सूबा प्रधान बलदेव सिंह बुट्टर ने नई तबादला नीति की निंदा की। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को परेशान करने वाली इस नीति से शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट आएगी। अध्यापक को विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और इलाका निवासियों को समझने के लिए लंबा समय लगता ह। आठ साल बाद जबरन तबादला शिक्षा और लोकविरोधी फैसला है। सूबा महासचिव वाशिंगटन सिंह समीरोवाल ने कहा कि यूनियन से कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी और शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार के साथ हुई मीटिंग के दौरान स्वीकार कर लिया गया था कि अध्यापकों की आठ साल बाद जबरन बदली नहीं होगी।
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कैबिनेट की मीटिंग में मास्टर कैडर की इस मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। संयुक्त सचिव हरप्रीत सिंह खुंडा व स्टेट प्रेस सचिव संदीप कुमार दुर्गापुर ने कहा कि अध्यापन एक विशेष पेशा है और इस पेशे की खास जरूरतों को नीति बनाते समय नजरंदाज न किया जाए। केवल अध्यापक के निवेदन पर ही तबादला किया जाए। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते कहा कि नई तबादला नीति को तर्कसंगत न बनाया गया तो अध्यापकों को लामबंद करते हुए लोक लहर के साथ संघर्ष शुरू किया जाएगा।
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