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Hindi News ›   Punjab ›   If Amritpal comes to Punjab, there will be danger for both the state and the country

Chandigarh: अमृतपाल पंजाब में आया तो राज्य और देश दोनों के लिए खतरा, HC पहुंची पंजाब सरकार; मिला ये जवाब

Thu, 16 Apr 2026 08:28 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 16 Apr 2026 08:28 PM IST
सार


अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि केवल प्रशासनिक या सुरक्षा कारणों के आधार पर किसी आरोपी को दूसरे राज्य की जेल में रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती इसके लिए ठोस कानूनी प्रावधान दिखाना अनिवार्य होगा।

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If Amritpal comes to Punjab, there will be danger for both the state and the country
सांसद अमृतपाल सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पंजाब आने पर राज्य व राष्ट्र दोनों को खतरा बताते हुए पंजाब सरकार ने उसे असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही रखने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है। पंजाब सरकार की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सवाल खड़े किए हैं और सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।
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अदालत ने कही ये बात
अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि केवल प्रशासनिक या सुरक्षा कारणों के आधार पर किसी आरोपी को दूसरे राज्य की जेल में रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती इसके लिए ठोस कानूनी प्रावधान दिखाना अनिवार्य होगा।
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सुनवाई के दौरान सबसे पहले अदालत ने राज्य सरकार से यह पूछा कि जब संबंधित एफआईआर में जांच पूरी हो चुकी थी और आरोपी पहले से हिरासत में था तो उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। पंजाब सरकार ने दलील दी कि अमृतपाल को पंजाब लाने से कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में संकेत हैं कि आरोपी अलगाववादी नैरेटिव को बढ़ावा दे रहा है जिससे राज्य व राष्ट्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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ऐसे में उसे असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही रखना आवश्यक है और मुकदमे की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जा सकती है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों पर संतोष नहीं जताया और पूछा कि एक से दूसरे राज्य में कैदी को रखने के लिए स्पष्ट प्रावधान क्या है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे फैसलों के कारणों को रिकॉर्ड पर लाना होगा और केवल प्रशासनिक सुविधा के आधार पर आदेश पारित नहीं किए जा सकते।


असम सरकार की ओर से दी गई सहमति का पत्र भी रिकॉर्ड पर पेश किया गया लेकिन अदालत ने इस पर भी स्पष्टता मांगी कि क्या सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
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