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अमरूद बाग घोटाला: 30 भगोड़ों को दबोचने के लिए विशेष टीम, गिरफ्तार नायब तहसीलदार ने किए कई खुलासे

Tue, 13 Aug 2024 12:04 PM IST
अंकेश ठाकुर विशाल पाठक, चंडीगढ़
विशाल पाठक, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 13 Aug 2024 12:04 PM IST
सार

137 करोड़ रुपये के अमरूद बाग घोटाले मामले में एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं। अभी भी मामले में 30 आरोपी ऐसे हैं जो भगोड़े हैं। इन्हें पकड़ने के लिए विजिलेंस ने विशेष टीम बनाई है।

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Guava Orchard scam Punjab vigilance make special team to arrest 30 fugitives
Punjab Police - फोटो : X @PunjabPoliceInd

विस्तार

137 करोड़ रुपये के अमरूद बाग घोटाले मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मामले में 30 भगोड़ो को दबोचने के लिए विशेष टीम गठित की है। यह टीम विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर वरिंदर कुमार के नेतृत्व में काम करेगी।
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विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीफ डायरेक्टर वरिंदर कुमार ने इन 30 भगोड़ो को दबोचने के लिए लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया है ताकि ये आरोपी देश छोड़कर भाग न सकें। लुक आउट सर्कुलर को लेकर देश के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी इनपुट साझा किए गए हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले में अब विजिलेंस ब्यूरो ने 99 आरोपियों की पहचान की है। इनमें वे 12 अधिकारी भी शामिल हैं जो गामाडा, हॉर्टिकल्चर, रेवेन्यू और लैंड एक्विजीशन विभाग से तालुक रखते हैं।
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विजिलेंस ने घोटाले में शामिल 21 लोगों की गिरफ्तारी की है, जोकि रेगुलर बेल पर बाहर हैं और 48 अग्रिम जमानत पर हैं। 30 आरोपी जो भगोड़े हैं, उनकी गिरफ्तारी को लेकर विजिलेंस ने अब कमर कस ली है। इनका डाटा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जालंधर के साथ भी साझा किया गया है।
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पांच अफसरों की भूमिका
विजिलेंस ब्यूरो ने बीते पांच अगस्त को भगोड़े नायब तहसीलदार जसकरण सिंह बराड़ को गिरफ्तार किया था। आरोपी ने विजिलेंस के रिमांड में पांच अफसरों के नाम कबूले हैं। ये पांचों अफसर गमाडा और हॉर्टिकल्चर विभाग के थे, जिनकी मिलीभगत से अमरूद बाग घोटाले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर किसानों को करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी किया गया। नायब तहसीलदार ने विजिलेंस को रिमांड के दौरान पूछताछ में बताया कि जब वर्ष 2016-17 में गमाडा ने 1651.59 एकड़ जमीन पर एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। तब भाखरपुर, रुरका, छत्त, साफिपुर, नारायणगढ़ में 707.78 एकड़, मत्तरां, मनोली और सियोन में 206.39 एकड़ व पातों, मनोली सियोन में 242.54 एकड़ और छज्जूमाजरा के आसपास की 493.88 एकड़ जमीन को एक्वायर कर यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इस दौरान जमीनों पर अमरूद के बागों के मुआवजे का पता चलते ही किसानों और अधिकारियों ने पिछली तारीखों में रिकॉर्ड तैयार करने शुरू किए जिनमें गमाडा और हॉर्टिकल्चर विभाग के पांच अफसरों की अहम भूमिका थी। यहां तक कि आरोपी नायब तहसीलदार बराड़ ने भी रिकॉर्ड में हेरफेर कर गैरकानूनी तरीके से कई लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए अफसरों से एक दिन में तीन-तीन बार फाइलें क्लीयर कराईं, इसको लेकर भी विजिलेंस को सबूत मिले हैं।


पटवारी बच्चितर सिंह ने रिकॉड बदले
आरोपी नायब तहसीलदार ने विजिलेंस को बताया कि आरोपी पटवारी बच्चितर सिंह ने ही 2016 से 2021 के बीच इन एक्वायर की जाने वाली जमीनों पर स्थित अमरूद के बाग के खसरा व गिरदावरी रजिस्टर के रिकॉर्ड में बदलाव किया, ताकि बड़े स्तर पर मुआवजे का लाभ उठाया जा सके। कुल 198 एकड़ जमीन पर अमरूद बाग के मुआवजे के नाम पर घोटाला हुआ है, इसमें से अकेले 180 एकड़ जमीन भाखरपुर में थी। यहां 106 लोगों को कुल 137 करोड़ 18 लाख 48 हजार 543 रुपये मुआवजा जारी किया गया था।
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