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तस्करों की नई तकनीक: पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों के सिग्नल का इस्तेमाल कर मंगवा रहे नशा-असलहा, इसलिए बदले नियम

Fri, 20 Dec 2024 10:31 AM IST
निवेदिता वर्मा अनिल कुमार, संवाद, भारत-पाकिस्तान सीमा से
अनिल कुमार, संवाद, भारत-पाकिस्तान सीमा से Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 20 Dec 2024 10:31 AM IST
सार

पाकिस्तान के साथ लगती पंजाब की सीमा से हथियार और नशे की तस्करी बदस्तूर जारी है। कभी पाइप के जरिए तो कभी नदी से तस्करी होती रहती है। अब ड्रोन से नशा और हथियार सीमा पार से मंगवाए जा रहे हैं।

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Drug smuggling in punjab border security force Pakistan smugglers update
पंजाब से लगती पाक सीमा पर तैनात महिला प्रहरी। - फोटो : संवाद

विस्तार

भारत-पाकिस्तान के तस्करों ने सरहद पर तस्करी के पुराने तरीके छोड़ नई तकनीक को अपना लिया है। अब वाट्सएप व पाकिस्तानी सिमकार्ड से दोनों देशों के तस्कर संपर्क साधते हैं, क्योंकि पाक मोबाइल कंपनियों का सिग्नल सीमावर्ती भारतीय गांवों तक पहुंचता है। भारतीय तस्कर पाकिस्तानी तस्करों को लोकेशन भेज ड्रोन के माध्यम हेरोइन और असलहा की खेप मंगवा रहे हैं। बता दें कि ड्रोन की कीमत भी भारतीय तस्करों को चुकानी पड़ती है।

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अब युवतियां भी तस्करी में उतरी

तस्करी के धंधे को छोड़ चुके एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को नये तस्करों की जानकारी तक नहीं है। तस्करी में युवा जुड़ा है और बहुत सी युवतियां भी इस धंधे को बढ़ावा दे रही हैं। पहले भी महिलाएं खेती के बहाने फेंसिंग पार खेतों में जाती थी और हेरोइन की खेप लेकर आती थी, ऐसे मामले देख बीएसएफ में महिलाओं की भर्ती की गई। 

ड्रोन की कीमत भी चुकाते हैं तस्कर

इस तस्कर ने बताया कि मौजूदा समय में भारतीय तस्करों तक पहुंचने वाली हेरोइन-असलहा की खेप में ड्रोन की कीमत पाकिस्तानी तस्कर जोड़ कर भेजते हैं। डिलीवरी आसमान से सही तरह से बताई लोकेशन पर गिरती है तो ठीक है। कई बार हेरोइन व असलहा की खेप फेंकते समय तकनीकी खराबी के कारण ड्रोन भी बताई हुई लोकेशन पर गिर जाता है। ऐसी स्थिति में भारतीय तस्कर खेप उठाकर ले जाते हैं और ड्रोन वहीं छोड़ जाते हैं। कई बार देखने को मिला है कि बीएसएफ के हाथ खेत में पड़ा ड्रोन ही लगता है, हेरोइन व असलहा की खेप नहीं। 
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बीएसएफ की गोली से बचने को बदले नियम

सरहद पर बीएसएफ की गोली का निशाना न बने, इसलिए दोनों देशों के तस्करों ने तस्करी करने के नियमों में बदलाव किया है। पहले सरहद पर फेंसिंग में प्लास्टिक की पाइप डाल कर भारत क्षेत्र में हेरोइन के पैकेट फेंकते बीएसएफ की गोली से तस्कर मर चुके हैं।

नये तस्करों का पाक तस्करों से संपर्क 

जब कोई तस्कर पकड़े जाने पर लंबे समय तक जेल चला जाता है तो वो अपने साथी को पाक तस्करों के नंबर देता है जो वाट्सएप के माध्यम से उनसे संपर्क कायम करते हैं। यही कारण है तस्करी का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और बात सामने आई है कि तस्करों और गैंगस्टरों ने आपस में हाथ मिला लिया है। पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम आने वाले विदेशी हथियार गैंगस्टरों तक पहुंच रहे हैं। हेरोइन का धंधा भी कई गैंगस्टर कर रहे हैं। 

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अमृतसर व दिल्ली से होती है पेमेंट

पाक तस्करों को धनराशि पहुंचने के सवाल पर इस तस्कर ने कहा कि ये बड़े तस्कर जानते हैं। उनसे तो यहीं के तस्कर नगदी वसूल लेते हैं। वैसे पाक तक नगदी पहुंचाने का काम अमृतसर व दिल्ली से होता है। धन कमाने की होड़ में तस्करी के धंधे में कई नए चेहरे उतर रहे हैं। ये नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसमें कई कानून के रखवाले व सफेद पोशाक पहने वाले भी शामिल हैं।

पाक तस्करों का समर्थन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी करती है। आईएसआई इन्हीं तस्करों की मदद से भारत में विस्फोटक सामग्री भिजवाती है। कई नए तस्कर हेरोइन तस्करी में अच्छा पैसा कमाने लगते हैं, तो आईएसआई अपने तस्करों के माध्यम इन्हीं तस्करों को विस्फोटक सामग्री पहुंचा कर भारत में बैठे अपने एजेंटों तक पहुंचाती है या फिर इन्हीं को पैसों का लालच देकर विस्फोट करवाती है। कुछ माह पूर्व जलालाबाद की सब्जी मंडी व फिरोजपुर की गोबर मंडी में विस्फोट हुए थे। जलालाबाद में हुए विस्फोट में बम रखने वाला मारा गया था। जांच में सरहदी गांव चांदी वाला का तस्कर व गांव धर्मूवाला का तस्कर पकड़ा गया था और इनके पास से टिफिन बम भी बरामद हुए थे।

पाक मोबाइल कंपनी का सिग्नल पहुंच रहा भारत

पंजाब से सटी भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे भारतीय गांवों में पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों का सिग्नल पहुंच रहा है। जब आप सरहदी गांवों में प्रवेश करेंगे तो मोबाइल पर पाक मोबाइल कंपनी जाज, टेलीनॉर, जोंग व क्यूमोबाइल के टावर दिखने शुरू हो जाते हैं। पाकिस्तानी सिमकार्ड भारतीय तस्करों के पास बहुत हैं। इसी सिमकार्ड से वाट्सएप के जरिए दोनों देशों के तस्कर संपर्क साधते हैं और लोकेशन भेज कर हेरोइन-असलहा की खेप मंगवाते हैं। पाक मोबाइल कंपनियों ने अपने सिग्नल की रेंज बहुत ज्यादा छोड़ी हुई है। 

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