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Punjab: 46 से 60 साल के लोगों के लिए टीबी बनी घातक, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 13 Dec 2024 03:03 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 13 Dec 2024 03:03 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके चलते ही पंजाब के स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी के साथ ही टेस्टिंग भी बढ़ाई है।

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Tuberculosis is becoming deadly disease in Punjab
टीबी - फोटो : ani

विस्तार

पंजाब में ट्यूबरोक्लोसिस (टीबी) बीमारी घातक रूप धारण करती जा रही है। खासकर 46 से 60 व उससे ऊपर की आयु के मरीजों के लिए यह अधिक खतरनाक बन गई है। 60 साल से ऊपर आयु के मरीजों की मृत्यु दर 10 फीसदी से अधिक है। 
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15 से 30 साल के टीबी के मरीज अधिक आ रहे हैं, लेकिन उनकी रिकवरी काफी अच्छी है। पंजाब में टीबी की मृत्यु दर राष्ट्रीय दर से भी अधिक है। पूरे देश में जहां मृत्यु दर 4 प्रतिशत है, वहीं पंजाब में यह 4.5 प्रतिशत है। केंद्र सरकार की स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
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रिपोर्ट के अनुसार 2023 में 46 से 60 साल की आयु के मरीजों की मृत्यु दर 6.2 प्रतिशत थी, जो 2024 में भी कम नहीं हुई। इस साल जनवरी से अक्तूबर तक मृत्यु दर 5.9 बनी हुई है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय है। इसी तरह 60 साल से ऊपर आयु के मरीजों में स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। पिछले साल 60 साल से ऊपर आयु के मरीजों का मृत्यु दर 12.1 प्रतिशत थी, जो इस साल भी अक्तूबर तक 10.1 प्रतिशत बनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 46 से 60 व उससे अधिक आयु के टीबी के मरीजों के मृत्यु दर में कमी नहीं आई है।
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15 से 30 साल की आयु वर्ग में आ रहे अधिक मरीज  

रिपोर्ट के अनुसार टीबी के कुल मरीजों में 15-30 साल की आयु वर्ग में मरीज अधिक आ रहे हैं, लेकिन इन मरीजों की रिकवरी भी अच्छी है। इस आयु वर्ग में मरीज अन्य वर्गों के मुकाबले अधिक ठीक हो रहे हैं। इस उम्र वर्ग में मृत्यु दर पिछले साल 1.8 प्रतिशत थी, जबकि 2024 अक्तूबर तक यह मृत्यु दर 1.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। प्रदूषित एरिया में लोगों के टीबी की चपेट में आने का अधिक खतरा रहता है। इसी वजह से लुधियाना में अन्य जिलों के मुकाबले टीबी के अधिक मरीज आ रहे हैं।

हरियाणा व हिमाचल में भी यही स्थिति 

हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। हरियाणा में 46 से 60 साल की आयु के मरीजों की 2023 में मृत्यु दर 6.7 प्रतिशत थी, जो इस साल अक्तूबर में 5.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। अगर 60 साल से ऊपर के मरीजों की बात की जाए तो मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल यह 8.9 प्रतिशत थी, जो इस साल बढ़कर 9.3 फीसदी हो गई है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में स्थिति इससे भी अधिक खराब है। यहां पिछले साल 60 साल से ऊपर आयु के मरीजों का मृत्यु दर 14.6 फीसदी थी, जो इस साल भी 14.5 फीसदी दर्ज की गई है।

टीबी से रिकवरी के लिए आयु मायने नहीं रखती है। ट्रीटमेंट पूरा करके किसी भी आयु में व्यक्ति टीबी को हरा सकता है। मुख्य रूप से टीबी के लक्ष्णों का ध्यान रखने की जरूरत है। खांसी, रात में पसीना, लगातार बुखार आना और थकावट होना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। - राजेश भास्कर, राज्य टीबी अधिकारी, पंजाब
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