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रोचक है रिटायर्ड IPS की कहानी: अमेरिका में हुए किस्से ने बदली सोच और बन गए झाड़ू योद्धा, पीएम मोदी भी मुरीद
Mon, 21 Sep 2026 08:11 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 21 Sep 2026 08:11 PM IST
सार
रिटायर आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने बताया उनका स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है।
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चंडीगढ़ में सड़क पर सफाई करते रिटायर आईपीएस अधिकारी
- फोटो : वीडियो ग्रैब
विस्तार
पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और पंजाब पुलिस से सेवानिवृत डीआईजी व समाजसेवी इंद्रजीत सिंह सिद्धू, जिन्हें चंडीगढ़ का झाड़ू योद्धा कहा जाता है। सोमवार सुबह चंडीगढ़ की सड़कों पर सफाई करते नजर आए।
35 साल तक पंजाब पुलिस में दी सेवाएं
सोमवार की सुबह सेक्टर-49 में आईपीएस सोसाइटी के पास उनको सड़क पर कूड़ा उठाते हुए देखा गया जिसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 88 वर्षीय सिद्धू का जन्म 6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले में एक सैन्य परिवार में हुआ था। वह साल 1961 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे। 35 साल तक पंजाब पुलिस में सेवा देने के बाद वह साल 1996 में डीआईजी पद से रिटायर हुए।
इसी साल मिला पद्म श्री पुरस्कार
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और 'झाड़ू योद्धा' के रूप में प्रसिद्ध इंद्रजीत सिंह सिद्धू को वर्ष 2026 का पद्म श्री पुरस्कार मिला है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके सफाई अभियान की प्रशंसा कर चुके हैं।
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35 साल तक पंजाब पुलिस में दी सेवाएं
सोमवार की सुबह सेक्टर-49 में आईपीएस सोसाइटी के पास उनको सड़क पर कूड़ा उठाते हुए देखा गया जिसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 88 वर्षीय सिद्धू का जन्म 6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले में एक सैन्य परिवार में हुआ था। वह साल 1961 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे। 35 साल तक पंजाब पुलिस में सेवा देने के बाद वह साल 1996 में डीआईजी पद से रिटायर हुए।
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इसी साल मिला पद्म श्री पुरस्कार
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और 'झाड़ू योद्धा' के रूप में प्रसिद्ध इंद्रजीत सिंह सिद्धू को वर्ष 2026 का पद्म श्री पुरस्कार मिला है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके सफाई अभियान की प्रशंसा कर चुके हैं।
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अब सुबह सैर करने नहीं सफाई करने के लिए निकलता हूं: इंदरजीत सिंह सिद्धू
इंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने चंडीगढ़ की स्वच्छता की सराहना की थी। उन्होंने लोगों से पॉलीथिन का उपयोग कम करने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और अपने आसपास का क्षेत्र साफ रखने की अपील की। उनका कहना है कि अब वह सुबह सैर करने नहीं बल्कि सड़क पर पड़ा कूड़ा उठाने निकलते हैं।
कैसे बने झाड़ू योद्धा
रिटायर आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू के झाड़ू योद्धा बनने की कहानी भी बहुत रोचक है। एक किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा मैं एक बार अपने बेटे के पास अमेरिका गया था और कार की खिड़की से कूड़ा बाहर फेंकने लगा जिस पर उनके बेटे ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा आप मेरा चालान करवाओगे जिसके बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने स्वच्छता को अपने जीवन का मिशन बना लिया।
इंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने चंडीगढ़ की स्वच्छता की सराहना की थी। उन्होंने लोगों से पॉलीथिन का उपयोग कम करने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और अपने आसपास का क्षेत्र साफ रखने की अपील की। उनका कहना है कि अब वह सुबह सैर करने नहीं बल्कि सड़क पर पड़ा कूड़ा उठाने निकलते हैं।
कैसे बने झाड़ू योद्धा
रिटायर आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू के झाड़ू योद्धा बनने की कहानी भी बहुत रोचक है। एक किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा मैं एक बार अपने बेटे के पास अमेरिका गया था और कार की खिड़की से कूड़ा बाहर फेंकने लगा जिस पर उनके बेटे ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा आप मेरा चालान करवाओगे जिसके बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने स्वच्छता को अपने जीवन का मिशन बना लिया।