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पंजाब के इस गांव में चिट्टे का कहर: पूर्व सरपंच की बिक गई जमीन, मां बेटे के नशे के लिए बन गई नौकर
Sun, 20 Sep 2026 05:05 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज़ एजेंसी, बठिंडा
संवाद न्यूज़ एजेंसी, बठिंडा
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 20 Sep 2026 05:05 PM IST
सार
बठिंडा के तहत आने वाले गांव जयसिंहवाला में नशे ने कई घरों को जमीन पर ला दिया। किसी ने जमीन बेच दी तो कोई मां अपने बेटे की नशे की पूर्ति के लिए दूसरों के घर पर नौकर बनने को मजबूर है। डिटेल में पढ़ें खबर...
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जय सिंह वाला में नशे का कहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बठिंडा जिले के गांव जय सिंह वाला में नशे ने पूर्व सरपंच व उसके बेटों को इस कदर खत्म कर दिया कि उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी और अब मौजूदा समय में अलग-अलग डेरों में जाकर दिन काटते एवं रोटी खाते हैं।
बेटे को जिंदा रखने के लिए मां करती है नशे की पूर्ति
गांव की एक महिला सीबो कौर ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके दो बेटे थे, एक की सड़क हादसे में मौत हो गई। 24 साल का दूसरा बेटा चिट्टे एवं अन्य मेडिकल नशे की चपेट में आ गया। महिला ने बताया कि अब हालात यह है कि मैं अपने बेटे की नशे की पूर्ति के लिए लोगों के घरों में काम करने को मजबूर हूं।
महिला ने बताया कि अगर वह अगर एक दिन अपने बेटे के लिए नशे की पूर्ति नहीं कर पाती तो रातभर उसे डर लगा रहता है कि कहीं उसके बेटे की नशा न मिलने के कारण मौत न हो जाए। इसलिए अब वो अपने बेटे को जिंदा रखने के लिए खुद नशे की पूर्ति के लिए पैसे जुटाती है।
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गांव की एक अन्य महिला बलजीत कौर ने कहा उनका बेटा 20 साल का है। वह बीते करीब चार वर्षों से नशे की दलदल में ऐसा घुसा कि अब उसका बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है। महिला ने बताया कि दिन में उसका बेटा तीन इंजेक्शन लगाता है। अगर उसे नशा नहीं करने देते तो वह तड़पता है। महिला ने बताया एक मां से अपने बेटे का तड़पना नहीं देखा जाता। महिला ने बताया कि कुछ माह पहले ही उसकी शादी हुई है। अब उसे डर सता रहा है कि कहीं नशा उसके जवान बेटे को निगल न जाए।
कारपेंटर को भी नशे ने दी मौत
करीब तीन-चार दिन पहले गांव जय सिंह वाला की एक जगह से गुरादित्ता रिंमपल नामक युवक का शव मिला था, जिसकी बाजू पर इंजेक्शन लटक रहा था। मृतक युवक के चाचा सुखपाल सिंह ने बताया कि मेरा भतीजा बहुत अच्छा कारपेंटर था, लेकिन बुरी संगत में पड़ने के बाद वह नशे की दलदल में फंस गया। उन्होंने बताया कि गांव में चिट्टा और गोलियों को पीस कर पाउडर बनाकर तस्करों द्वारा शरेआम बेचा जा रहा है, लेकिन जब भी पुलिस आती है तो तस्कर गायब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अगर पुलिस प्रशासन नशा करने वालों को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल करवाए तो बहुत युवक बच सकते हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन नशा करने वालों पर ही केस दर्ज कर देती है और तस्कर बेखौफ होकर नशा बेचते हैं।
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बेटे को जिंदा रखने के लिए मां करती है नशे की पूर्ति
गांव की एक महिला सीबो कौर ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके दो बेटे थे, एक की सड़क हादसे में मौत हो गई। 24 साल का दूसरा बेटा चिट्टे एवं अन्य मेडिकल नशे की चपेट में आ गया। महिला ने बताया कि अब हालात यह है कि मैं अपने बेटे की नशे की पूर्ति के लिए लोगों के घरों में काम करने को मजबूर हूं।
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महिला ने बताया कि अगर वह अगर एक दिन अपने बेटे के लिए नशे की पूर्ति नहीं कर पाती तो रातभर उसे डर लगा रहता है कि कहीं उसके बेटे की नशा न मिलने के कारण मौत न हो जाए। इसलिए अब वो अपने बेटे को जिंदा रखने के लिए खुद नशे की पूर्ति के लिए पैसे जुटाती है।
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गांव की एक अन्य महिला बलजीत कौर ने कहा उनका बेटा 20 साल का है। वह बीते करीब चार वर्षों से नशे की दलदल में ऐसा घुसा कि अब उसका बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है। महिला ने बताया कि दिन में उसका बेटा तीन इंजेक्शन लगाता है। अगर उसे नशा नहीं करने देते तो वह तड़पता है। महिला ने बताया एक मां से अपने बेटे का तड़पना नहीं देखा जाता। महिला ने बताया कि कुछ माह पहले ही उसकी शादी हुई है। अब उसे डर सता रहा है कि कहीं नशा उसके जवान बेटे को निगल न जाए।
कारपेंटर को भी नशे ने दी मौत
करीब तीन-चार दिन पहले गांव जय सिंह वाला की एक जगह से गुरादित्ता रिंमपल नामक युवक का शव मिला था, जिसकी बाजू पर इंजेक्शन लटक रहा था। मृतक युवक के चाचा सुखपाल सिंह ने बताया कि मेरा भतीजा बहुत अच्छा कारपेंटर था, लेकिन बुरी संगत में पड़ने के बाद वह नशे की दलदल में फंस गया। उन्होंने बताया कि गांव में चिट्टा और गोलियों को पीस कर पाउडर बनाकर तस्करों द्वारा शरेआम बेचा जा रहा है, लेकिन जब भी पुलिस आती है तो तस्कर गायब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अगर पुलिस प्रशासन नशा करने वालों को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल करवाए तो बहुत युवक बच सकते हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन नशा करने वालों पर ही केस दर्ज कर देती है और तस्कर बेखौफ होकर नशा बेचते हैं।
गांव की महिलाओं ने मुख्यमंत्री मान से की मांग
गांव जय सिंह वाला की महिलाओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि उनके बच्चों का नशा छुड़वाने के लिए उनका उपचार करवा कर उन्हें मुख्य धारा में लाया जाए। जो लोग आर्थिक पक्ष से कमजोर हैं, उनकी आर्थिक तौर पर सहायता भी की जाए।
गांव के लोग ही गांव के युवाओं के बन रहे दुश्मन
गांव जय सिंह वाला की महिलाओं ने कहा कि गांव में ही कुछ लोग मौजूद हैं जो गांव के युवाओं को नशा बेचकर नशे की दलदल में धकेल रहे हैं। अगर गांव का कोई भी व्यक्ति खुलकर नशा तस्करों के बारे में पुलिस को बताता है तो नशा तस्कर उसकी जान लेने तक पहुंच जाते हैं। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण युवकों का नहीं करवा पा रहे उपचार गांव की छह महिलाओं ने बताया कि वे सभी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। ऐसे में वे अपने उन बच्चों का उपचार नहीं करवा पा रही हैं जो नशे के आदि हो चुके हैं। अगर प्रशासन एवं सरकार उनकी सहायता करें तो उनके बच्चे नशा छोड़ देंगे।
थाना संगत के एसएचओ हरबंस सिंह ने बताया पुलिस गांव में लगातार सर्च अभियान चलाती है और नशा तस्करों को पकड़ा जा रहा है। इसके अलावा पुलिस प्रयास कर रही है कि नशा करने वाले युवकों को उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजा जाए।
गांव जय सिंह वाला के सरपंच बलजीत सिंह ने माना कि गांव में नशे की समस्या है, लेकिन इस समस्या से गांव के युवकों को निजात दिलाने के लिए वे बहुत प्रयास कर रहे हैं। अब वे गांव में उन युवकों की शिनाख्त कर रहे हैं जो नशे से पीड़ित हैं और नशा छोड़ने के लिए तैयार हैं। वे प्रशासन के साथ मिलकर ऐसे युवाओं का उपचार करवाएंगे। इसके अलावा गांव के जो लोग नशा बेच रहे हैं, उनको भी समझाया जा रहा है कि नशा न बेचा जाए। उन्होंने कहा कि वे नशा बेचने वालों को भी निवेदन कर चुके हैं कि वे तस्करी का काम छोड़कर अच्छा काम करें। इसके लिए गांव के लोग उनका साथ भी देंगे।
गांव जय सिंह वाला की महिलाओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि उनके बच्चों का नशा छुड़वाने के लिए उनका उपचार करवा कर उन्हें मुख्य धारा में लाया जाए। जो लोग आर्थिक पक्ष से कमजोर हैं, उनकी आर्थिक तौर पर सहायता भी की जाए।
गांव के लोग ही गांव के युवाओं के बन रहे दुश्मन
गांव जय सिंह वाला की महिलाओं ने कहा कि गांव में ही कुछ लोग मौजूद हैं जो गांव के युवाओं को नशा बेचकर नशे की दलदल में धकेल रहे हैं। अगर गांव का कोई भी व्यक्ति खुलकर नशा तस्करों के बारे में पुलिस को बताता है तो नशा तस्कर उसकी जान लेने तक पहुंच जाते हैं। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण युवकों का नहीं करवा पा रहे उपचार गांव की छह महिलाओं ने बताया कि वे सभी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। ऐसे में वे अपने उन बच्चों का उपचार नहीं करवा पा रही हैं जो नशे के आदि हो चुके हैं। अगर प्रशासन एवं सरकार उनकी सहायता करें तो उनके बच्चे नशा छोड़ देंगे।
थाना संगत के एसएचओ हरबंस सिंह ने बताया पुलिस गांव में लगातार सर्च अभियान चलाती है और नशा तस्करों को पकड़ा जा रहा है। इसके अलावा पुलिस प्रयास कर रही है कि नशा करने वाले युवकों को उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजा जाए।
गांव जय सिंह वाला के सरपंच बलजीत सिंह ने माना कि गांव में नशे की समस्या है, लेकिन इस समस्या से गांव के युवकों को निजात दिलाने के लिए वे बहुत प्रयास कर रहे हैं। अब वे गांव में उन युवकों की शिनाख्त कर रहे हैं जो नशे से पीड़ित हैं और नशा छोड़ने के लिए तैयार हैं। वे प्रशासन के साथ मिलकर ऐसे युवाओं का उपचार करवाएंगे। इसके अलावा गांव के जो लोग नशा बेच रहे हैं, उनको भी समझाया जा रहा है कि नशा न बेचा जाए। उन्होंने कहा कि वे नशा बेचने वालों को भी निवेदन कर चुके हैं कि वे तस्करी का काम छोड़कर अच्छा काम करें। इसके लिए गांव के लोग उनका साथ भी देंगे।