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पंजाब कैबिनेट में सबसे मजबूत मालवा: संजीव अरोड़ा को मिलाकर दस मंत्री हुए, धालीवाल की छुट्टी से माझा पड़ा कमजोर

Fri, 04 Jul 2025 09:20 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 04 Jul 2025 09:20 AM IST
सार

लुधियाना पश्चिम विधानसभा हलके से उपचुनाव जीतने वाले आप विधायक संजीव अरोड़ा पंजाब सरकार में मंत्री बन गए हैं। उन्हें उद्योग, वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन व एनआरआई मामलों का मंत्री बनाया गया है।

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Sanjeev Arora minister oath Malwa strongest in Punjab cabinet Majha
मालवा से संजीव अरोड़ा बने मंत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लुधियाना पश्चिम सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे संजीव अरोड़ा के मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही पंजाब मंत्रिमंडल में मालवा अब और मजबूत हो गया है। जबकि माझा से एक मंत्री कम हो गया है। 
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अजनाला से विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल की मंत्री पद से छुट्टी के बाद ही अब माझा में सिर्फ तीन मंत्री रह गए हैं, जिनमें लालचंद कटारूचक्क, हरभजन सिंह ईटीओ और लालजीत सिंह भुल्लर शामिल हैं। पहले यहां से चार मंत्री होते थे। माझा पंजाब की बॉर्डर बेल्ट है, जिसके चलते इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन अब मंत्रिमंडल में मालवा से प्रतिनिधित्व और बढ़ गया है। 
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मालवा से सीएम, वित्तमंत्री समेत दस मंत्री 

मालवा में पहले ही सबसे अधिक 9 मंत्री थे, लेकिन अब यहां से मंत्रियों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। सीएम भगवंत मान के साथ ही वित्त मंत्री हरपाल चीमा और सुशासन सुधार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा भी इसी बेल्ट से हैं। मालवा की कृषि बेल्ट के रूप में पहचान है। यहां से लुधियाना औद्योगिक हब भी है। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए अरोड़ा खुद एक उद्योगपति है। हाल ही में उद्योगपतियों के पक्ष में लिए सरकार के फैसलों व नई नीतियों का चुनाव में आप को काफी फायदा हुआ है। यही कारण है कि आगे विधानसभा चुनाव में भी इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहता है। 

उप चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और सीएम भगवंत मान ने उद्योपतियों के साथ बैठक की थी। साथ ही चुनाव से पहले पिछले एक साल से पंजाब व हरियाणा बॉर्डर पर चल रहे किसानों के मोर्चे को भी हटा दिया था, क्योंकि इस कारण आयात व निर्यात में परिवहन खर्च बढ़ने के कारण उद्योगपतियों का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। इस मंत्रिमंडल के विस्तार से दोआबा को कोई फर्क नहीं पड़ा है। दोआबा में पहले की तरह ही अभी भी तीन ही मंत्री हैं। दोआबा की भी औद्योगिक हब और एनआरआई बेल्ट के रूप में पहचान है।  
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