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पंजाब में बेअदबी कानून पर रार: सरकार और सिख नेतृत्व में बढ़ा टकराव, हाईकोर्ट में भी कानून को नई चुनौती

Sat, 09 May 2026 08:37 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 09 May 2026 08:37 AM IST
सार

कानून बनाते समय न तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से औपचारिक सलाह ली गई और न ही प्रमुख सिख संस्थाओं को विश्वास में लिया गया। सिख नेतृत्व का आरोप है कि सरकार ने जल्दबाजी में कानून पारित कर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की। यही विवाद का कारण है।

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Row over Sacrilege Law in Punjab Conflict Between Government and Sikh Leadership High Court
विधानसभा स्पीकर श्री अकाल तख्त पर पेश - फोटो : संवाद/फाइल

विस्तार

जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी संशोधित एक्ट 2026 को लेकर पंजाब सरकार और सिख धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव तेज हो गया है। वहीं कानून पर एक नई याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है।

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सरकार जहां इसे बेअदबी रोकने के लिए सबसे सख्त और ऐतिहासिक कानून बता रही है वहीं श्री अकाल तख्त साहिब और सिख जत्थेबंदियां इसे धार्मिक मामलों में सरकारी दखल करार दे रही हैं।
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अब पूरे मामले में अगले 15 दिन अहम माने जा रहे हैं। अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि विवादित धाराएं और मर्यादा विरोधी शब्द नहीं हटाए गए तो मामला बड़े टकराव का रूप ले सकता है। धार्मिक और राजनीतिक हलकों में इसे सरकार के खिलाफ खुली चुनौती माना जा रहा है।
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विवाद का सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि कानून बनाते समय न तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से औपचारिक सलाह ली गई और न ही प्रमुख सिख संस्थाओं को विश्वास में लिया गया। सिख नेतृत्व का आरोप है कि सरकार ने जल्दबाजी में कानून पारित कर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की।

सिख जत्थेबंदियों को कानून की उन धाराओं पर भी कड़ा एतराज है जिनके तहत गुरुद्वारा प्रबंधकों, ग्रंथियों और धार्मिक सेवकों को कानूनी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। इसे धार्मिक संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का रिकॉर्ड सार्वजनिक वेबसाइट पर डालने के प्रस्ताव ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। विरोधी पक्ष का कहना है कि इससे धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की निजता प्रभावित होगी।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यदि सरकार ने समय रहते संशोधन नहीं किया तो पंजाब में नया धार्मिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। अकाल तख्त की सख्त चेतावनी के बाद पंथक संगठनों के एक मंच पर आने की संभावना भी तेज हो गई है।

बेअदबी कानून पर फिर घिरी पंजाब सरकार

पंजाब सरकार के जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। इस कानून के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में नई जनहित याचिका दायर कर इसे संविधान की मूल भावना, धर्मनिरपेक्ष ढांचे और केंद्रीय कानूनों के विपरीत बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने विस्तृत बहस के बाद मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।

जालंधर निवासी करनप्रीत सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि पंजाब सरकार ने 14 जुलाई 2025 को विधानसभा में पवित्र धार्मिक ग्रंथों के संरक्षण से जुड़ा विधेयक पेश किया था। इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब, कुरान मजीद और श्रीमद्भागवद्गीता समेत विभिन्न धर्मों के पवित्र ग्रंथों को सुरक्षा देने का प्रस्ताव था।

याचिका के अनुसार बाद में सरकार ने केवल जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित संशोधन कानून पारित कर दिया। यह संशोधन 12 अप्रैल को विधानसभा से पास हुआ और 20 अप्रैल को इसकी अधिसूचना जारी हुई। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि किसी एक धर्म विशेष के ग्रंथ को अलग कानूनी संरक्षण देना संविधान के समानता और धर्मनिरपेक्षता सिद्धांत के खिलाफ है।

याचिका में यह भी कहा गया कि एक्ट में उम्रकैद तक की सजा और विशेष जांच प्रक्रिया जैसे प्रावधान शामिल हैं जबकि आपराधिक कानून समवर्ती सूची का विषय है। ऐसे में केंद्रीय कानून लागू होने के कारण राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी थी। वहीं इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका हाईकोर्ट पहले ही जुर्माने के साथ खारिज कर चुका है।
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