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दुष्कर्म दोषी डेरा प्रमुख की सजा बढ़ाने से इन्कार: कोर्ट ने खारिज की उम्रकैद की अपील, पीड़िता को मिलेगा मुआवजा

Tue, 11 Aug 2026 10:49 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 11 Aug 2026 10:49 PM IST
सार

साल 2000 के मामले में हाईकोर्ट ने पीड़िता की अपील को खारिज किया है। कोर्ट ने पीड़िता को छह लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। 

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Refusal to increase sentence of  misdeed convict Dera chief
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2000 में डेरा परिसर में युवती से दुष्कर्म के दोषी धनवंत सिंह की अपील खारिज करते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी है। पीड़िता की ओर से सजा बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग भी कोर्ट ने खारिज कर दी। हालांकि लंबे न्यायिक संघर्ष और यौन हमले से हुए आघात को देखते हुए पीड़िता को छह लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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मामला गांव पाली झिक्की स्थित नूर विश्व रोहानी चैरिटेबल ट्रस्ट के डेरे से जुड़ा है। कोर्ट के अनुसार धनवंत सिंह डेरे का धार्मिक प्रचारक, चेयरमैन और ट्रस्टी था। पीड़िता का परिवार उसका अनुयायी था। 25 नवंबर 2000 को वह परिवार की सलाह पर डेरे गई थी। अभियोजन के अनुसार रात करीब ढाई बजे आरोपी ने उसे कमरे में बुलाकर दुष्कर्म किया। पीड़िता ने करीब एक महीने बाद 31 दिसंबर को पिता को घटना बताई। परिवार ने पहले डेरे के ट्रस्टियों और फिर श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष मामला उठाया। जांच के बाद 29 अगस्त 2002 को प्राथमिकी दर्ज हुई।
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ट्रायल कोर्ट ने 29 जनवरी 2005 को धनवंत सिंह को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने प्राथमिकी में देरी और प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने की दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म सामान्यतः चारदीवारी के भीतर होता है इसलिए प्रत्यक्षदर्शी होना जरूरी नहीं। सजा बढ़ाने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए सजा की कठोरता से अधिक उसका निश्चित होना महत्वपूर्ण है।
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