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पंजाब में करवट ले रही राजनीति: भाजपा-अकाली गठजोड़ की अटकलें तेज, राज्यपाल के पैदल मार्च से मिले संकेत
Wed, 11 Feb 2026 10:06 AM IST
निवेदिता वर्मा
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 11 Feb 2026 10:06 AM IST
सार
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया चार दिन के पंजाब दौरे पर हैं। वे आमजन खासकर युवाओं के साथ बॉर्डर से सटे जिलों में नशा विरोधी जागरूकता मार्च निकाल रहे हैं।
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राज्यपाल के साथ मार्च में सुखबीर बादल और अश्विनी शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फिरोजपुर में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के साथ नशा विरोधी पैदल मार्च में सुखबीर बादल और अश्वनी शर्मा की मौजूदगी ने भाजपा-अकाली गठजोड़ की अटकलों को तेज कर दिया है।
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हालांकि यह एक जागरूकता मार्च था मगर राज्यपाल के साथ शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर और भाजपा के कार्यकारी प्रभारी अश्वनी शर्मा का होना, इस बात का इशारा कर रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति करवट ले रही है।
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इस पैदल मार्च में डेरा ब्यास मुखी गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मौजूदगी से भी सियासी गलियारों में हलचल है। राज्यपाल कटारिया चार दिन के पंजाब दौरे पर हैं। वे आमजन खासकर युवाओं के साथ बॉर्डर से सटे जिलों में नशा विरोधी जागरूकता मार्च निकाल रहे हैं। दौरे के दूसरे दिन फिरोजपुर में राज्यपाल का जागरूकता मार्च पंजाब के मौजूदा सियासी समीकरणों के मद्देनजर ज्यादा चर्चा में रहा।
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सूबे में शिअद फरवरी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी तरह भाजपा से गठजोड़ करना चाहता है, क्योंकि यह गठजोड़ पहले भी पंजाब में सरकार बना चुका है। इस बात पर पंजाब भाजपा के नेता भी दो धड़ों में बंटे हुए हैं। आला नेताओं का एक धड़ा गठबंधन चाहता है मगर दूसरा नहीं।
भाजपा हाईकमान भी पंजाब में विरोधी दलों की तैयारियों और उनके मुकाबले भाजपा संगठन की धरातल पर स्थिति व भावी संभावनाओं की समीक्षा और आकलन कर रही है। भाजपा-अकाली गठजोड़ के नफा और नुकसान इन दोनों पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अंतिम फैसले में भले समय लग सकता है मगर राज्यपाल के साथ शिअद और भाजपा नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि दोनों दलों के बीच सियासी कड़वाहट जैसी स्थिति नहीं है। क्या डेरा ब्यास मुखी भी इस गठजोड़ में कोई भूमिका निभा सकते हैं इस बात की भी सियासी गलियारों में खासी चर्चा है, क्योंकि उनकी नजदीकियां शिअद और भाजपा दोनों दलों के नेताओं से है।