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Punjab-Haryana Water Dispute: हाईकोर्ट में सुनवाई, पंजाब की दलील- बीबीएमबी ने न्यायालय को किया गुमराह
Thu, 22 May 2025 09:53 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 22 May 2025 09:53 PM IST
सार
भाखड़ा-नंगल एग्रीमेंट-1966 के अनुसार सतलुज से पंजाब को 57.88 प्रतिशत, हरियाणा को 32.31 और राजस्थान को 9.81 प्रतिशत पानी मिलता है। वहीं रावी-ब्यास एग्रीमेंट-1982 के तहत राजस्थान को 49, पंजाब को 30 और हरियाणा को 21 प्रतिशत पानी मिलता है।
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नंगल डैम।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने के आदेश पर पुनर्विचार के लिए दाखिल पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब ने हाईकोर्ट को बताया कि अदालत को गुमराह करके यह आदेश प्राप्त किया गया था। 2 मई को केंद्रीय गृह सचिव की अगुवाई में हुई बैठक में हरियाणा को पानी देने का एजेंडा ही नहीं था।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वीरवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि बीबीएमबी की टेक्निकल कमेटी का हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने का निर्णय गलत था। बीबीएमबी ने अपने इस अवैध फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर लगवाने के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी। कोर्ट को बताया गया कि 2 मई को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में जो बैठक हुई थी उसका एजेंडा कानून व्यवस्था था। उस बैठक के मिनट्स ऑफ मीटिंग तक तैयार नहीं किए गए थे। जब 8 मई को अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने मिनट्स ऑफ मीटिंग मांगे तो अगले दिन 9 मई को मिनट्स सौंपे गए जो उसी दिन तैयार और साइन किए गए थे।
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साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि गृह सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक में हरियाणा को पानी देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उनको यह आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं था। पंजाब सरकार ने कहा कि बीबीएमबी, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार ने कोर्ट के समक्ष गलत तथ्य पेश किए और अपने हक में हाईकोर्ट से आदेश हासिल कर लिया।
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पंजाब सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि हमने कभी कोई गलत तथ्य पेश नहीं किया। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जरनल सत्यपाल जैन ने कहा कि पंजाब सरकार को लगता है कि उनके अलावा बाकी सब झूठ बोलते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब किसी राज्य को मंजूरी से ज्यादा पानी मिल रहा है।
यह है मामला
हरियाणा सरकार ने पानी की किल्लत के चलते बीबीएमबी से अतिरिक्त पानी देने की मांग की थी। टेक्निकल कमेटी ने इसे मंजूर करते हुए हरियाणा को 8 दिन तक 8500 क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया था। इसका विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने बांध पर अतिरिक्त पुलिस तैनात कर दी थी। बीबीएमबी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने पुलिस की तैनाती को उचित माना था, लेकिन बांध के काम में दखल न देने को कहा था। साथ ही पानी जारी करने के बीबीएमबी के आदेश का पालन करने का पंजाब को निर्देश दिया था। पानी जारी करने के इसी आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर अब हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है।