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Punjab: पराली प्रबंधन के लिए 500 करोड़ खर्च करेगी मान सरकार, खरीफ सीजन के लिए कृषि विभाग का एक्शन प्लान तैयार

Mon, 21 Apr 2025 08:14 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 21 Apr 2025 08:14 AM IST
सार

किसानों को सब्सिडी पर फसली अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें उपलब्ध कराने के साथ पराली जलाने से रोकने के लिए अन्य योजनाएं लागू की जाएंगी। पिछले साल भी पराली प्रबंधन के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था।
 

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Punjab government will spend 500 crores for stubble management
खेत में जलती पराली - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पंजाब सरकार आगामी खरीफ सीजन में पराली के प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए कृषि विभाग ने एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। किसानों को सब्सिडी पर फसली अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें उपलब्ध कराने के साथ पराली जलाने से रोकने के लिए अन्य योजनाएं लागू की जाएंगी। पिछले साल भी पराली प्रबंधन के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था।

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कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि सरकार द्वारा सीआरएम मशीनों की खरीद पर व्यक्तिगत किसानों को 50% सब्सिडी और किसान समूहों, सहकारी सभाओं और ग्राम पंचायतों को 80% सब्सिडी दी जा रही है। विभाग ने सीआरएम मशीनों की खरीद पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए राज्य के किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। ये आवेदन 22 अप्रैल से 12 मई 2025 तक
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ऑनलाइन पोर्टल agrimachinerypb.com पर जमा कराए जा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को सीआरएम मशीनों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें पराली प्रबंधन मशीनरी के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करते हुए सभी के लिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को सुनिश्चित करना है।
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कृषि विभाग के प्रबंधकीय सचिव डॉ. बसंत गर्ग ने बताया कि पंजाब ने फसली अवशेष प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पिछले साल राज्य सरकार द्वारा व्यक्तिगत किसानों, सहकारी सभाओं और पंचायतों को सब्सिडी पर 17,600 सीआरएम मशीनें उपलब्ध कराने के अलावा किसानों की सुविधा के लिए 1,331 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) भी स्थापित किए थे। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले सीजन के दौरान पराली जलाने के मामलों में वर्ष 2023 की तुलना में 70% की कमी दर्ज की गई, जो वर्ष 2023 में रिपोर्ट हुए 36,663 मामलों से घटकर पिछले साल केवल 10,909 रह गए थे।

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