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भाजपा का मिशन-2027: दिवाली के बाद बठिंडा आएंगे मोदी, रैली से होगा चुनावी शंखनाद; गठबंधन पर हो सकता है एलान
Wed, 04 Nov 2026 08:50 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 04 Nov 2026 08:50 AM IST
सार
पंजाब चुनाव की सरगर्मियों के बीच दीपावली के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बठिंडा दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान मोदी सीमावर्ती पंजाब को बड़ी सौगात दे सकते हैं। वहीं अकाली दल बादल के साथ गठबंधन का भी एलान होने की संभावना जताई जा रही है।
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पंजाब चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में भाजपा अपनी सियासी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली के बाद बठिंडा आ सकते हैं। उनके यहां बड़ी रैली को संबोधित करने की संभावना है। पंजाब भाजपा ने प्रधानमंत्री के दौरे और रैली के लिए केंद्रीय नेतृत्व से समय मांगा है। 15 से 20 नवंबर के बीच रैली की तारीख तय होने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस रैली के जरिये भाजपा पंजाब में चुनावी अभियान का आगाज कर सकती है। साथ ही सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए किसी बड़ी विकास परियोजना या अन्य सौगात की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, संभावित घोषणा के स्वरूप को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
राजनीतिक रूप से इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चाओं के बीच बठिंडा में प्रधानमंत्री की रैली को अहम माना जा रहा है। बठिंडा मालवा क्षेत्र का प्रमुख राजनीतिक केंद्र है और बादल परिवार का भी इस क्षेत्र में मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में यहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी से भाजपा अपने चुनावी अभियान को धार देने के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भी सियासी संदेश में बदल सकती है।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस रैली के जरिये भाजपा पंजाब में चुनावी अभियान का आगाज कर सकती है। साथ ही सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए किसी बड़ी विकास परियोजना या अन्य सौगात की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, संभावित घोषणा के स्वरूप को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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राजनीतिक रूप से इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चाओं के बीच बठिंडा में प्रधानमंत्री की रैली को अहम माना जा रहा है। बठिंडा मालवा क्षेत्र का प्रमुख राजनीतिक केंद्र है और बादल परिवार का भी इस क्षेत्र में मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में यहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी से भाजपा अपने चुनावी अभियान को धार देने के साथ गठबंधन की संभावनाओं को भी सियासी संदेश में बदल सकती है।
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पुनर सुरजीत को साथ लेने की तैयारी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा और शिअद (पुनर सुरजीत) के बीच भी गठबंधन लगभग तय हो गया है। पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाला यह अकाली धड़ा अगस्त 2025 में सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिअद से अलग हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन की घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन नई दिल्ली में कर सकते हैं। पिछले दिनों पुनर सुरजीत ने गठबंधन की शर्तों से संबंधित पंजाब और पंजाबियों के मुद्दों से जुड़ा ब्लूप्रिंट भाजपा को सौंपा था।
बादल गुट से गठबंधन पर नफा-नुकसान का आकलन
भाजपा और शिअद (पुनर सुरजीत) के बीच संभावित तालमेल की चर्चाओं के साथ ही सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल से दोबारा गठबंधन की अटकलें भी तेज हैं। दोनों दलों के बीच 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बाद गठबंधन टूट गया था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के फिर करीब आने के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा नेतृत्व सीटों के बंटवारे और चुनावी नफा-नुकसान का आकलन कर रहा है। चर्चा है कि भाजपा पहले के मुकाबले अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा और शिअद (पुनर सुरजीत) के बीच भी गठबंधन लगभग तय हो गया है। पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाला यह अकाली धड़ा अगस्त 2025 में सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिअद से अलग हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन की घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन नई दिल्ली में कर सकते हैं। पिछले दिनों पुनर सुरजीत ने गठबंधन की शर्तों से संबंधित पंजाब और पंजाबियों के मुद्दों से जुड़ा ब्लूप्रिंट भाजपा को सौंपा था।
बादल गुट से गठबंधन पर नफा-नुकसान का आकलन
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