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एनएपीए ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के लिए कर दी ये मांग, क्या केंद्र करेगा पूरा
Fri, 31 Jan 2025 04:42 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Fri, 31 Jan 2025 04:42 PM IST
सार
नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (एनएपीए) केंद्रीय गृह मंत्री अनिल विज को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सिंह को खास दर्जा दिया जाए।
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राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (एनएपीए) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा देने की अपील की। एनएपीए के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस संबंध में चिट्ठी लिखी है। लिखे पत्र में कहा कि भारत के इन महान क्रांतिकारियों को अब तक आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है, जो कि उनके बलिदान को सम्मान देने के लिए आवश्यक है।
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एनएपीए की तरफ से जारी एक बयान में चहल ने कहा इन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक उन्हें आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा नहीं दिया है। उनके अतुलनीय साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सबसे आधिकारिक रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद का आधिकारिक दर्जा देती है, तो यह न केवल उनके बलिदान का सम्मान होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देशभक्ति और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
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चहल ने अपने पत्र में लिखा कि इन क्रांतिकारियों की शहादत पीढ़ियों से भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। हालांकि यह अत्यंत चिंता का विषय है कि उन्हें अब तक आधिकारिक रूप से शहीद घोषित नहीं किया गया है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ इन स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता और 23 मार्च 1931 को दी गई उनकी सर्वोच्च कुर्बानी हमारे देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। सरकार द्वारा उनके बलिदान को आधिकारिक रूप से मान्यता देना उनके अदम्य साहस और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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उन्होंने कहा कि एनएपीए पंजाबी और भारतीय विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि स्वतंत्रता सेनानियों और सामुदायिक नेताओं के योगदान को उचित मान्यता मिले।