फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Maternal mortality rate more than national rate in Punjab

मातृ मृत्यु दर में चाैंकाने वाला खुलासा: पंजाब में हर दस दिन में जा रही एक मां की जान, ये हैं मुख्य कारण

Tue, 01 Apr 2025 11:45 AM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 01 Apr 2025 11:45 AM IST
सार

पंजाब में 58.7 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इन महिलाओं में रेड ब्लड सेल की कमी है। इस कारण इन महिलाओं में प्रसव या प्रसव के तुरंत बाद अधिक जोखिम रहता है। डॉक्टरों के लिए भी एनीमिया पीड़ित महिलाओं में रक्तस्राव रोकना प्रमुख चुनौती होती है।

विज्ञापन
Maternal mortality rate more than national rate in Punjab
गर्भावस्था - फोटो : Freepik.com

विस्तार

पंजाब में मातृ मृत्यु दर ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हर दस दिन में गर्भावस्था के दौरान होले वाली परेशानियों के कारण एक महिला की मौत हो रही है। यह राष्ट्रीय दर से भी अधिक है। 

विज्ञापन


प्रसव या प्रसव के तुरंत बाद अत्यधिक रक्तस्राव, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और कम उम्र में गर्भधारण प्रदेश में इस दर के अधिक होने के प्रमुख कारण है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय दर के अनुसार देश में जहां हर 11 दिन बाद एक महिला की मौत हो रही है, वहीं पंजाब में यह दर दस दिन की है। पंजाब सरकार की तरफ से स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अब भी अस्पतालों में सुविधाओं की भारी कमी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल अधिक प्रभावित है, क्योंकि इनमें डॉक्टर व स्टाफ पूरा नहीं है। मातृ मृत्यु दर पहले से कम जरूर हुई है, लेकिन अब भी प्रदेश में यह अधिक है। पंजाब में गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण अब तक पिछले 27 सालों में 1252 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी हैं। वर्ष 2004-06 के दौरान जहां 192 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: चंडीगढ़ में आज से कई बदलावः पानी-सीवर के दाम बढ़े, फायर एनओसी लेना भी महंगा... जानें जेब पर कितना पड़ेगा बोझ

वर्ष 2018-20 के बीच 105 महिलाओं की मौत हुई है। इसी तरह 2017-19 के दौरान भी 114 महिलाओं की इस कारण जान चली गई थी। केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) 2005 में शुरू किया गया था। 2013 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2 उप-मिशन एनआरएचएम और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) को शुरू किया गया, जिसके तहत राज्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

एमीनिया पीड़ित महिलाओं की संख्या भी अधिक

पंजाब में 58.7 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इन महिलाओं में रेड ब्लड सेल की कमी है। इस कारण इन महिलाओं में प्रसव या प्रसव के तुरंत बाद अधिक जोखिम रहता है। डॉक्टरों के लिए भी एनीमिया पीड़ित महिलाओं में रक्तस्राव रोकना प्रमुख चुनौती होती है, जो मृत्यु दर के बढ़ने का प्रमुख कारण बनता है। 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को लेकर हाल ही में संसद में यह रिपोर्ट पेश की गई थी।

इस तरह लाई जा सकती है कमी

  • गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाना महत्वपूर्ण है।
  • गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण और स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक करना।
  • गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से बचने के लिए उचित बचाव का ध्यान रखना।
  • जटिलताओं को कम करने के लिए अस्पताल में ही प्रसव कराना।


पंजाब में ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी महिलाओं में जागरूकता की भरी कमी है। कुपोषण संबंधी शिकायत की तरफ महिलाएं ध्यान नहीं देती हैं। प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव मृत्यु का कारण बनती है। इन सब से बचने के लिए डॉक्टरों की सलाह के साथ खान-पान का ध्यान रखना और अस्पताल में ही प्रसव कराने से इससे बचा जा सकता है। -मनीषा मैनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed