अब सूर्य की हर किरण का हिसाब: कितनी धूप, कितनी गर्मी और कितना असर! नए सेंसर खोलेंगे मौसम और पर्यावरण के राज
सूर्य से आने वाली ऊर्जा और धरती से वापस निकलने वाली ऊर्जा के बीच संतुलन का जलवायु पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक जुटाए गए रेडिएशन के आंकड़ों से मौसमी और सालाना बदलावों की तुलना की जा सकेगी। इससे बादलों, धूल-कणों और धरती की सतह में होने वाले बदलावों के प्रभाव का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।
विस्तार
गर्मी कितनी पड़ेगी, फसलों को कितनी धूप मिली और सूर्य की किरणों का हवा की गुणवत्ता पर क्या असर हुआ, अब इन सवालों के जवाब आंकड़ों के आधार पर तलाशना आसान होगा।
चंडीगढ़ सेक्टर-39 के मौसम केंद्र में हाईटेक रेडिएशन सिस्टम लगाया गया है। इसमें लगे विशेष सेंसर सूर्य से आने वाले विकिरण की मात्रा और तीव्रता मापेंगे। इससे दिनभर धरती तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड तैयार होगा। इन आंकड़ों से मौसम, तापमान, कृषि, पर्यावरण और वायु गुणवत्ता पर सूर्य के प्रभाव का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
अभी तक मौसम की निगरानी में तापमान, हवा की गति, नमी और बारिश जैसे मानकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। नए सिस्टम से सौर विकिरण के आंकड़े भी उपलब्ध होंगे। इससे मौसम के व्यवहार को समझने के लिए वैज्ञानिकों को एक और महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। मौसम केंद्र के निदेशक सुरेंद्र पाल के अनुसार सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा का मौसम और धरती के वातावरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है। नए सिस्टम से इस प्रभाव को आंकड़ों के रूप में समझना आसान होगा।
पुरानी व्यवस्था की जगह सेंसर से मिलेगी सटीक जानकारी
इससे पहले पटियाला में भी रेडिएशन मापने की व्यवस्था थी लेकिन पुरानी तकनीक के कारण अपेक्षित सटीक आंकड़े नहीं मिल पा रहे थे। सेंसर आधारित नई व्यवस्था से लगातार और अधिक सटीक आंकड़े जुटाए जा सकेंगे। रियल टाइम डाटा से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सुबह से शाम तक सूर्य की किरणों की तीव्रता में कितना बदलाव आया। इन आंकड़ों की तुलना तापमान, नमी और हवा की गति जैसे दूसरे मौसम संबंधी मानकों से भी की जा सकेगी।
फसल की बढ़वार, पानी की जरूरत का होगा आकलन
सूर्य की रोशनी फसलों के विकास और प्रकाश संश्लेषण के लिए जरूरी है। अलग-अलग फसलों को धूप की अलग मात्रा चाहिए। रेडिएशन के आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी अवधि में फसलों को कितनी सौर ऊर्जा मिली। कृषि विशेषज्ञ इन जानकारियों का उपयोग फसल की बढ़वार, पानी की जरूरत और सिंचाई की योजना के आकलन में कर सकेंगे। गेहूं, धान और सब्जियों जैसी फसलों के अध्ययन में भी यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।
सूर्य की किरणें धरती की सतह को गर्म करती हैं, जिससे हवा के तापमान और वायुमंडल की गतिविधियों पर असर पड़ता है। बादल, धुंध और वातावरण में मौजूद धूल-कण भी धरती तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। रेडिएशन के आंकड़ों को तापमान, नमी और हवा की गति के साथ जोड़कर देखने से मौसम के व्यवहार और सतह के गर्म होने की प्रक्रिया का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा।
प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता का आकलन
तेज धूप में नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों की मौजूदगी में होने वाली फोटोकेमिकल प्रतिक्रियाओं से ओजोन बन सकती है। ऐसे में सौर विकिरण के आंकड़ों को प्रदूषण के स्तर और मौसम संबंधी जानकारियों के साथ मिलाकर देखने से वायु गुणवत्ता में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी। इससे वैज्ञानिकों को धूप और प्रदूषण के बीच संबंधों का अध्ययन करने के लिए अतिरिक्त आंकड़े मिलेंगे।
सोलर पैनल की क्षमता का आकलन
सौर ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन सूर्य की रोशनी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। रेडिएशन के आंकड़ों से किसी स्थान पर दिन और अलग-अलग मौसमों में उपलब्ध सौर ऊर्जा का आकलन किया जा सकेगा। इससे सोलर पैनल लगाने की योजना, संभावित उत्पादन क्षमता और ऊर्जा प्रबंधन से जुड़े आकलन में मदद मिल सकती है।