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350वां शहीदी दिवस:11 किमी. तक फूलों पर होकर गुजरेगा शीश भेंट नगर कीर्तन, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन के लिए बस सेवा
Tue, 04 Nov 2025 02:52 AM IST
अंकेश ठाकुर
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Tue, 04 Nov 2025 02:52 AM IST
सार
पंजाब सरकार श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में एक महीने तक चलने वाले समारोहों का आयोजन कर रही है। इन आयोजनों की शुरुआत 25 अक्तूबर को दिल्ली के गुरुद्वारा सीस गंज साहिब से हुई है।
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गुरुद्वारा श्री कीरतपुर साहिब, जहां से शुरू होगा शीश भेंट नगर कीर्तन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के दौरान पहली बार ऐसा होगा जब कोई नगर कीर्तन 11 किलोमीटर तक फूलों पर होकर गुजरेगा। शीश भेंट नाम का यह ऐतिहासिक नगर कीर्तन 24 नवंबर को सुबह 7 बजे श्री कीरतपुर साहिब से शुरू होकर श्री आनंदपुर साहिब तक पहुंचेगा।
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गहरी आस्था से लबरेज रहने वाले इस नगर कीर्तन के दरअसल बड़े आध्यात्मिक मायने हैं। दिल्ली में गुरु साहिब का सिर कलम करने के बाद उनका शीश भाई जैता जी लेकर पंजाब स्थित श्री कीरतपुर साहिब के लिए रवाना हुए थे, क्योंकि गुरु साहिब जी के बेटे 10वीं पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी समेत पूरा परिवार वहीं रहा रहा था। वे सिर को रूमाले में लपेट एक टोकरी में रखकर मुगलों से छिपाते हुए दिल्ली से पंजाब की ओर बढ़ रहे थे।
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करनाल, तरावड़ी, अंबाला, बनूड़, नाभा, रोपड़ होते हुए भाई जैता जी गुरु साहिब का शीश लेकर श्री कीरतपुर साहिब पहुंचे और वहां उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी को शीश भेंट किया था। इसीलिए इस नगर कीर्तन का नाम शीश भेंट रखा गया है। शीश लेने के बाद यहीं गुरु गोबिंद सिंह जी ने भाई जैता जी को गले लगाकर रंगरेटे गुरु के बेटे कहा था।
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इसके बाद गुरु जी का परिवार और भक्तों ने शीश लेकर श्री आंनदपुर साहिब तक मार्च किया था। दूसरी ओर भाई लक्खी शाह जी ने अपने बेटों और भक्तों के साथ गुरु जी का शेष धड़ का संस्कार मुगलों की नजर से बचकर दिल्ली स्थित अपने घर में कर दिया था। उसके बाद वे भी गुरु जी के पार्थिव शरीर का कुछ हिस्सा लेकर दिल्ली से श्री आनंदपुर साहिब पहुंच गए जहां उन्होंने पार्थिव शरीर के कुछ हिस्से को गुरु गोबिंद सिंह जी को सौंप दिया। पार्थिव शरीर को यहीं सतलुज नदी के जल में विसर्जित कर दिया गया था।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस व सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार दीपक बाली बताते हैं कि इसी स्मृति को समर्पित यह नगर कीर्तन निकाला जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर के पूरे रास्ते में फूलों की सेज बनाई जाएगी। इसके लिए कई टन फूलों की व्यवस्था की गई है। चूंकि तीन दिन तक श्री आनंदपुर साहिब में चलने वाले आयोजन में भाग लेने के लिए करीब 1 करेाड़ संगत आ सकती है, इसलिए मोहाली एयरपोर्ट समेत सूबे में सभी रेलवे स्टेशनों और बस अड्डे से हर एक घंटे के भीतर संगतों के लिए निशुल्क बसें चलेंगी। इसके अलावा श्री आनंदपुर साहिब के चारों ओर 106 एकड़ भूमि में 20 पार्किंग समेत 500 ई-रिक्शा व 100 मिनी बसों की व्यवस्था संगतों के लिए की जाएगी।
गुरु जी को समर्पित अनिवार्य शैक्षिक मॉड्यूल
10 नवंबर से नर्सरी से बारहवीं कक्षा तक पंजाब के सभी स्कूलों में 15 दिनों का अनिवार्य शैक्षिक मॉड्यूल शुरू किया जाएगा। सुबह की सभा के दौरान 10-12 मिनट का पूर्व रिकॉर्ड किया गया पाठ बजाया जाएगा जिसमें श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, शहादत और खालसा पंथ की स्थापना का विवरण दिया जाएगा। सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक में सेमिनार और कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। सभी जिलों में 45 मिनट का लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत 4 नवंबर को पटियाला, जालंधर, फतेहगढ़ साहिब और पठानकोट से होगी।