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पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू: बंद रहेगी एशिया की सबसे बड़ी खन्ना अनाज मंडी, हड़ताल पर रहेंगे आढ़ती
Tue, 31 Mar 2026 09:03 PM IST
Ankesh Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, खन्ना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, खन्ना (पंजाब)
Published by: Ankesh Kumar
Updated Tue, 31 Mar 2026 09:03 PM IST
सार
पंजाब में एक जनवरी से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो रही है, लेकिन पंजाब के सभी आढ़ती एसोसिएशन ने राज्यभर में हड़ताल का एलान कर दिया है। हड़ताल के चलते मंडियों में गेहूं की खरीद, सफाई और भराई का पूरा काम ठप रहेगा।
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खन्ना अनाज मंडी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना सहित पंजाब की सभी मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरू हो रही है। बावजूद इससे पहले पंजाब के सभी आढ़ती एसोसिएशन ने राज्यभर में हड़ताल का एलान कर दिया है। हड़ताल के चलते मंडियों में गेहूं की खरीद, सफाई और भराई का पूरा काम ठप रहेगा। यह घोषणा एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना की आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरबंस सिंह रोशा ने की है।
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हरबंस सिंह रोशा ने कहा कि कुछ साल पहले केंद्र द्वारा आढ़तियों की कमीशन दर ढाई फीसदी से घटाकर 46 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई थी, जिसके खिलाफ लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। हाल ही में एफसीआई द्वारा 4 रुपये 75 पैसे की बढ़ोतरी की गई, लेकिन इसे नाकाफी बताया गया है। उन्होंने कहा कि आढ़तियों की मुख्य मांग है कि हरियाणा की तर्ज पर पंजाब में भी कम से कम कमीशन 55 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। इसके अलावा, ईपीएफ नियमों से आढ़तियों को बाहर रखने और जारी नोटिस को वापस लेने की मांग भी उठाई गई है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
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इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ने वाला है। खन्ना मंडी की बात करें तो यहां 6 हजार से ज्यादा किसान प्रभावित होंगे। यह मंडी एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में गिनी जाती है, जहां करीब 300 आढ़ती और आसपास के 50 किलोमीटर क्षेत्र के हजारों किसान जुड़े हुए हैं।
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हालांकि, आढ़तियों ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। उन्होंने साफ किया है कि हड़ताल के बावजूद सरसों और जौ की फसल की खरीद जारी रखी जाएगी, क्योंकि ये फसलें ज्यादा देर तक पड़ी रहने पर खराब हो सकती हैं।
वहीं, मंडी में आए किसानों ने चिंता जताई कि अगर हड़ताल लंबी चली तो गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है और मंडियों में अव्यवस्था फैल सकती है। किसानों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर इस मुद्दे का समाधान निकालने की मांग की है।