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पंजाब शराब कांड : वित्तमंत्री चीमा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को लिखा पत्र, कानून में संशोधन की मांग

Wed, 14 May 2025 10:16 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 14 May 2025 10:16 PM IST
सार

पंजाब के अमृतसर में जहरीली शराब से अबतक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। इस त्रासदी के बाद वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है।

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Finance Minister Harpal Cheema wrote letter to Union Minister Piyush Goyal on misuse of methanol
वित्तमंत्री हरपाल चीमा - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत मिथाइल अल्कोहल (मेथेनॉल) के उपयोग को नियमित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है। मंत्री हरपाल चीमा ने अमृतसर के मजीठा में हुई शराब त्रासदी के बाद यह पत्र लिखा है। अमृतसर के मजीठा में जहरीली शराब से 23 लोगों की जान जा चुकी है। 

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वित्त मंत्री द्वारा यह अनुरोध इस अत्यधिक जहरीले औद्योगिक रसायन के अनियमित उपयोग के कारण देश भर में बार-बार जहरीली शराब के सेवन से मौत के मामले सामने आने के बाद किया गया। मेथेनॉल के उपयोग से तैयार नकली शराब के सेवन के कारण होने वाली बड़ी त्रासदियों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस संबंध में आवश्यक सख्त कानून की कमी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेथेनॉल की दिखावट, गंध और नशा इथाइल अल्कोहल से मिलते-जुलते होने के कारण इसका नकली शराब बनाने में उपयोग किया जाता है, जिससे यह कई लोगों की मौत का कारण बनती है।
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वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत औद्योगिक अल्कोहल को नियमित करने की केंद्र सरकार की शक्तियों के बावजूद, मिथाइल अल्कोहल (मेथेनॉल) एक ऐसे क्षेत्र में आता है जिससे निगरानी और प्रवर्तन में व्यवस्थित विफलताएं पेश आती हैं। उन्होंने र कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा इस पदार्थ की आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को पर्याप्त हद तक संबोधित नहीं करता है और न ही यह ट्रैकिंग विधियों, खरीदारों के पंजीकरण, या अंतर-राज्यीय नियमों को अनिवार्य बनाता है। 
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वित्त मंत्री चीमा ने केंद्रीकृत और कानूनी रूप से लागू करने योग्य कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि मेथेनॉल को नियंत्रित करने के मामले को राष्ट्रीय हित में विचारा जाए। उन्होंने मिथाइल अल्कोहल (मेथेनॉल) को स्पष्ट रूप से एक नियंत्रित उद्योग व पदार्थ के रूप में शामिल करने के लिए उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 में तत्काल संशोधन की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इस पदार्थ के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन को नियमित करने के लिए विशिष्ट और बाध्यकारी नियम या अधिसूचनाएं जारी की जानी चाहिए।

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