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पंजाब में नहीं थम रही तस्करी: असली चुनौती जमीन पर सक्रिय नेटवर्क, अमृतसर के गांवों में बने नए ठिकाने
Mon, 05 Oct 2026 11:11 AM IST
Nivedita
हरीश शर्मा/अनिल कुमार, संवाद, अमृतसर/फिरोजपुर
हरीश शर्मा/अनिल कुमार, संवाद, अमृतसर/फिरोजपुर
Published by: Nivedita
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:11 AM IST
सार
सितंबर में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ऐसे नेटवर्क पकड़े, जिनमें ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए सीमा के नजदीक स्थानीय ठिकानों का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक मामले में सीमा के पास अमरूद के बाग को खेप उतारने और उठाने के स्थान के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई।
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पंजाब में नशा तस्करी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान से हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तस्करों का प्रमुख जरिया बन गया है। इस साल सितंबर तक पंजाब सीमा पर 850 किलो से अधिक हेरोइन जब्त की जा चुकी है, जो पिछले साल की पूरी बरामदगी से दोगुने से भी ज्यादा है। वहीं, सितंबर तक 182 ड्रोन भी बरामद किए गए। इसके बावजूद ड्रोन के जरिये नशे और हथियारों की तस्करी पूरी तरह थम नहीं रही है।
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिये हथियार और नशे की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने आसमान से लेकर जमीन तक निगरानी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया है। पंजाब पुलिस के अनुसार सितंबर 2026 तक नौ एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा चुके हैं। इनमें तीन ‘बाज आंख’ सिस्टम अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में अगस्त 2025 से काम कर रहे हैं, जबकि तीन ड्रोनसेंस डी-200 प्रो सिस्टम तीन सितंबर 2026 से सीमा के रणनीतिक स्थानों पर लगाए गए हैं।
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इसके बावजूद अमृतसर सीमा से सटे गांवों में ड्रोन के जरिये हथियार और नशे की खेप पहुंचने के मामले पूरी तरह नहीं थमे हैं। सितंबर में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ऐसे नेटवर्क पकड़े, जिनमें ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए सीमा के नजदीक स्थानीय ठिकानों का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक मामले में सीमा के पास अमरूद के बाग को खेप उतारने और उठाने के स्थान के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई।
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तीन परतों में खड़ा किया सुरक्षा कवच
ड्रोन से होने वाली तस्करी रोकने की जिम्मेदारी अब सिर्फ सीमा पर बीएसएफ की निगरानी तक सीमित नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में मजबूत किया गया है। पहली परत में बीएसएफ की सीमा निगरानी, दूसरी में पंजाब पुलिस के एंटी-ड्रोन सिस्टम और तीसरी में ड्रोन रिस्पांस टीमें, नाके, सीसीटीवी और स्थानीय नेटवर्क की निगरानी शामिल है।
पंजाब में 52 ड्रोन रिस्पांस टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 147 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा दूसरी लाइन पर 64 नाके लगाए गए हैं। सीमा क्षेत्र में 585 स्थानों पर 2,367 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। गांवों में निगरानी के लिए ग्राम रक्षा समितियों को भी जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार तीन एंटी-ड्रोन सिस्टम करीब 210 किलोमीटर सीमा क्षेत्र को कवर कर रहे हैं। इनमें दो तरनतारन और एक अमृतसर ग्रामीण में तैनात है। इनसे फिरोजपुर, तरनतारन और अमृतसर ग्रामीण के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
अमृतसर में मोध धनोए बना नया निगरानी बिंदु
सीमा क्षेत्र में दो एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमा से सटे गांव मोध धनोए में लगाए गए हैं। यहां रात के समय गश्त बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों की पहचान करने और बीएसएफ के साथ समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए सीमा के गांवों में आने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर दो पुलिस ड्रोन तैनात करने की भी योजना है। इनकी मदद से उन लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, जो ड्रोन से गिराई गई खेप को उठाने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचते हैं।
असली चुनौती आसमान से ज्यादा जमीन पर
ड्रोन सीमा पार करने, खेप गिराने और वापस लौटने में कुछ ही मिनट लेता है। इसके बाद असली नेटवर्क जमीन पर सक्रिय होता है। खेप कौन उठाएगा, कहां ले जाएगा, किस वाहन से आगे भेजी जाएगी और अंतिम खरीदार तक कैसे पहुंचेगी, इसकी पूरी कड़ी पहले से तैयार रहती है। सितंबर में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का पता लगाया, जिसमें सीमा के नजदीक से ड्रोन के जरिये गिराई गई खेप उठाकर आगे पहुंचाई जा रही थी। एक अन्य मामले में 27 किलो हेरोइन और विदेशी पिस्तौल बरामद हुई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ड्रोन से गिराई गई खेप उठाई थी। यानी एंटी-ड्रोन सिस्टम ड्रोन को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन जमीन पर सक्रिय तस्करी के नेटवर्क को पकड़ने के लिए अलग खुफिया और पुलिस तंत्र की जरूरत है। यही वजह है कि निगरानी बढ़ने के बावजूद तस्करी के नए तरीके सामने आ रहे हैं।
ड्रोन से होने वाली तस्करी रोकने की जिम्मेदारी अब सिर्फ सीमा पर बीएसएफ की निगरानी तक सीमित नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में मजबूत किया गया है। पहली परत में बीएसएफ की सीमा निगरानी, दूसरी में पंजाब पुलिस के एंटी-ड्रोन सिस्टम और तीसरी में ड्रोन रिस्पांस टीमें, नाके, सीसीटीवी और स्थानीय नेटवर्क की निगरानी शामिल है।
पंजाब में 52 ड्रोन रिस्पांस टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 147 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा दूसरी लाइन पर 64 नाके लगाए गए हैं। सीमा क्षेत्र में 585 स्थानों पर 2,367 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। गांवों में निगरानी के लिए ग्राम रक्षा समितियों को भी जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार तीन एंटी-ड्रोन सिस्टम करीब 210 किलोमीटर सीमा क्षेत्र को कवर कर रहे हैं। इनमें दो तरनतारन और एक अमृतसर ग्रामीण में तैनात है। इनसे फिरोजपुर, तरनतारन और अमृतसर ग्रामीण के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
अमृतसर में मोध धनोए बना नया निगरानी बिंदु
सीमा क्षेत्र में दो एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमा से सटे गांव मोध धनोए में लगाए गए हैं। यहां रात के समय गश्त बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों की पहचान करने और बीएसएफ के साथ समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए सीमा के गांवों में आने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर दो पुलिस ड्रोन तैनात करने की भी योजना है। इनकी मदद से उन लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, जो ड्रोन से गिराई गई खेप को उठाने के लिए सीमा क्षेत्र में पहुंचते हैं।
असली चुनौती आसमान से ज्यादा जमीन पर
ड्रोन सीमा पार करने, खेप गिराने और वापस लौटने में कुछ ही मिनट लेता है। इसके बाद असली नेटवर्क जमीन पर सक्रिय होता है। खेप कौन उठाएगा, कहां ले जाएगा, किस वाहन से आगे भेजी जाएगी और अंतिम खरीदार तक कैसे पहुंचेगी, इसकी पूरी कड़ी पहले से तैयार रहती है। सितंबर में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का पता लगाया, जिसमें सीमा के नजदीक से ड्रोन के जरिये गिराई गई खेप उठाकर आगे पहुंचाई जा रही थी। एक अन्य मामले में 27 किलो हेरोइन और विदेशी पिस्तौल बरामद हुई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ड्रोन से गिराई गई खेप उठाई थी। यानी एंटी-ड्रोन सिस्टम ड्रोन को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन जमीन पर सक्रिय तस्करी के नेटवर्क को पकड़ने के लिए अलग खुफिया और पुलिस तंत्र की जरूरत है। यही वजह है कि निगरानी बढ़ने के बावजूद तस्करी के नए तरीके सामने आ रहे हैं।
खतरा भी बदल रहा, तकनीक भी
जून 2026 की एक रिपोर्ट में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बड़े ड्रोन, अधिक वजन की खेप ले जाने की क्षमता और सैटेलाइट संचार के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई थी। बदलती तकनीक के साथ सुरक्षा एजेंसियां एंटी-ड्रोन सिस्टम की क्षमता की भी समीक्षा कर रही हैं। सीमा पर अब मुकाबला केवल ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के बीच नहीं है। इसमें तकनीक के साथ खुफिया तंत्र, स्थानीय नेटवर्क, त्वरित प्रतिक्रिया और बीएसएफ-पुलिस के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण हो गया है।
आंकड़े बताते हैं कि चुनौती कितनी बड़ी है
जुलाई 2026 तक पंजाब सीमा पर वर्ष 2025 और 2026 में कुल 474 ड्रोन बरामद किए गए थे और 777.474 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। 2026 के पहले सात महीनों में ही 161 ड्रोन और 392.355 किलो हेरोइन बरामद की गई थी। सितंबर तक पहुंचते-पहुंचते हेरोइन की बरामदगी 850 किलो से अधिक और ड्रोन बरामदगी 182 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बताता है कि निगरानी और एंटी-ड्रोन व्यवस्था बढ़ने के बावजूद सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी की चुनौती कितनी बड़ी है।
सतलुज और घने जंगलों तक नहीं पहुंच पाती एंटी-ड्रोन मोबाइल वैन
हरिके-हुसैनीवाला हेड से सतलुज नदी होते हुए आगे फिरोजपुर और फाजिल्का की तरफ जाने वाला क्षेत्र तस्करी के लिहाज से संवेदनशील है। नदी आगे पाकिस्तान के सुल्तान हेड की ओर जाती है और कई स्थानों पर फिर भारत की तरफ लौटती है। इन नदी वाले हिस्सों में कई जगह बाड़ नहीं होने के कारण तस्करों के लिए रास्ता आसान हो जाता है।
सीमा के पास चक सरकार क्षेत्र में घने जंगल और सरकंडे हैं। तस्कर इस दुर्गम इलाके का फायदा उठाकर ड्रोन के जरिये हेरोइन की खेप पहुंचाने की कोशिश करते हैं। हाल ही में काउंटर इंटेलिजेंस ने मामदोट के पास नदी के रास्ते से 44.5 किलो हेरोइन और तीन किलो आइस ड्रग बरामद की थी। इसके अलावा एएनटीएफ और बीएसएफ ने 19.9 किलो हेरोइन बरामद की थी, जिसे ट्रक के ट्यूब में छिपाया गया था।
सतलुज के किनारे और घने जंगलों वाले इलाकों तक एंटी-ड्रोन मोबाइल वैन पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण है। तस्कर इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बड़े ड्रोन सीमा से 20 से 25 किलोमीटर अंदर तक हेरोइन और हथियार पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसे में सिर्फ सीमा पर ड्रोन को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर खेप उठाने और आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क को तोड़ना भी जरूरी है।
जून 2026 की एक रिपोर्ट में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बड़े ड्रोन, अधिक वजन की खेप ले जाने की क्षमता और सैटेलाइट संचार के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई थी। बदलती तकनीक के साथ सुरक्षा एजेंसियां एंटी-ड्रोन सिस्टम की क्षमता की भी समीक्षा कर रही हैं। सीमा पर अब मुकाबला केवल ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के बीच नहीं है। इसमें तकनीक के साथ खुफिया तंत्र, स्थानीय नेटवर्क, त्वरित प्रतिक्रिया और बीएसएफ-पुलिस के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण हो गया है।
आंकड़े बताते हैं कि चुनौती कितनी बड़ी है
जुलाई 2026 तक पंजाब सीमा पर वर्ष 2025 और 2026 में कुल 474 ड्रोन बरामद किए गए थे और 777.474 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। 2026 के पहले सात महीनों में ही 161 ड्रोन और 392.355 किलो हेरोइन बरामद की गई थी। सितंबर तक पहुंचते-पहुंचते हेरोइन की बरामदगी 850 किलो से अधिक और ड्रोन बरामदगी 182 तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बताता है कि निगरानी और एंटी-ड्रोन व्यवस्था बढ़ने के बावजूद सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी की चुनौती कितनी बड़ी है।
सतलुज और घने जंगलों तक नहीं पहुंच पाती एंटी-ड्रोन मोबाइल वैन
हरिके-हुसैनीवाला हेड से सतलुज नदी होते हुए आगे फिरोजपुर और फाजिल्का की तरफ जाने वाला क्षेत्र तस्करी के लिहाज से संवेदनशील है। नदी आगे पाकिस्तान के सुल्तान हेड की ओर जाती है और कई स्थानों पर फिर भारत की तरफ लौटती है। इन नदी वाले हिस्सों में कई जगह बाड़ नहीं होने के कारण तस्करों के लिए रास्ता आसान हो जाता है।
सीमा के पास चक सरकार क्षेत्र में घने जंगल और सरकंडे हैं। तस्कर इस दुर्गम इलाके का फायदा उठाकर ड्रोन के जरिये हेरोइन की खेप पहुंचाने की कोशिश करते हैं। हाल ही में काउंटर इंटेलिजेंस ने मामदोट के पास नदी के रास्ते से 44.5 किलो हेरोइन और तीन किलो आइस ड्रग बरामद की थी। इसके अलावा एएनटीएफ और बीएसएफ ने 19.9 किलो हेरोइन बरामद की थी, जिसे ट्रक के ट्यूब में छिपाया गया था।
सतलुज के किनारे और घने जंगलों वाले इलाकों तक एंटी-ड्रोन मोबाइल वैन पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण है। तस्कर इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बड़े ड्रोन सीमा से 20 से 25 किलोमीटर अंदर तक हेरोइन और हथियार पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसे में सिर्फ सीमा पर ड्रोन को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर खेप उठाने और आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क को तोड़ना भी जरूरी है।