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डीए बकाया भुगतान मामला: पंजाब के मुख्य सचिव पर अवमानना की तलवार, बिना शर्त माफी की पेशकश स्वीकार नहीं
Fri, 09 Oct 2026 01:21 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:21 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। अदालत की कार्यवाही और उसके संचालन पर सवाल उठाने वाले सुझावों से भी सावधानीपूर्वक निपटना आवश्यक है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट के आदेशों की कथित अवहेलना और पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना के मुद्दे पर अदालत ने मामले को रोस्टर के अनुसार संबंधित पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से मुख्य सचिव के लिए बिना शर्त माफी की पेशकश की गई, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। अदालत की कार्यवाही और उसके संचालन पर सवाल उठाने वाले सुझावों से भी सावधानीपूर्वक निपटना आवश्यक है। इसी के मद्देनजर मामले को अवमानना संबंधी मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
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मुख्य सचिव की ओर से बिना शर्त माफी की पेशकश
पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की खामियां दूर करने के संबंध में गलत बयान देने की कोई जानबूझकर मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि अदालत उचित समझे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
वहीं, आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल और चेतन मित्तल ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकार के आचरण से अदालत की गरिमा प्रभावित हुई है और मामले में अवमानना के पहलू पर विचार किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
पीठ ने याद दिलाया कि तीन अगस्त को अपील का निपटारा करते हुए मुख्य सचिव को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में हलफनामा दाखिल नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए आवेदन दायर किए गए।
इसके बाद राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर दी है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी अपील पर सुनवाई का अवसर प्राप्त करने के लिए कई बार समय भी दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त रिपोर्ट में पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की अपीलों में खामियां बरकरार होने की बात सामने आई। इसके विपरीत, मुख्य सचिव पहले दाखिल हलफनामे में इन खामियों को दूर किए जाने का दावा कर चुके थे। इसी विरोधाभास को लेकर आवेदकों ने सवाल उठाए। अब मामले को संबंधित पीठ के समक्ष भेजे जाने से अवमानना के मुद्दे पर आगे की सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
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सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से मुख्य सचिव के लिए बिना शर्त माफी की पेशकश की गई, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
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मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। अदालत की कार्यवाही और उसके संचालन पर सवाल उठाने वाले सुझावों से भी सावधानीपूर्वक निपटना आवश्यक है। इसी के मद्देनजर मामले को अवमानना संबंधी मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
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मुख्य सचिव की ओर से बिना शर्त माफी की पेशकश
पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की खामियां दूर करने के संबंध में गलत बयान देने की कोई जानबूझकर मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि अदालत उचित समझे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
वहीं, आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल और चेतन मित्तल ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकार के आचरण से अदालत की गरिमा प्रभावित हुई है और मामले में अवमानना के पहलू पर विचार किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
पीठ ने याद दिलाया कि तीन अगस्त को अपील का निपटारा करते हुए मुख्य सचिव को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में हलफनामा दाखिल नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए आवेदन दायर किए गए।
इसके बाद राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने एक सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर दी है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी अपील पर सुनवाई का अवसर प्राप्त करने के लिए कई बार समय भी दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त रिपोर्ट में पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की अपीलों में खामियां बरकरार होने की बात सामने आई। इसके विपरीत, मुख्य सचिव पहले दाखिल हलफनामे में इन खामियों को दूर किए जाने का दावा कर चुके थे। इसी विरोधाभास को लेकर आवेदकों ने सवाल उठाए। अब मामले को संबंधित पीठ के समक्ष भेजे जाने से अवमानना के मुद्दे पर आगे की सुनवाई का रास्ता खुल गया है।