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कनाडा-भारत के रिश्तों में खटास: 1.3 लाख पंजाबी युवाओं पर संकट गहराया, 700 छात्र भी हो सकते हैं डिपोर्ट

Tue, 22 Oct 2024 10:37 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 22 Oct 2024 10:37 AM IST
सार

कनाडा ने हाल ही में घोषणा की है कि पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट प्राप्त करने के लिए छात्रों को कनाडाई भाषा मानक परीक्षण में 7 का स्कोर प्राप्त करना होगा और मास्टर या डॉक्टरेट की डिग्री होनी चाहिए, जबकि कई छात्र तकनीकी रूप से उस बाजार में उपलब्ध नौकरियों के अनुसार योग्य नहीं हैं।

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Crisis deepens for 1.3 lakh Punjabi youth due to Sourness in Canada-India relations
कनाडा भारत के रिश्तों में खटास - फोटो : फाइल

विस्तार

कनाडा में लगभग 1.3 लाख भारतीय छात्रों के वर्क परमिट 31 दिसंबर 2024 को समाप्त होने वाले हैं। इनकी दिल की धड़कन बढ़ी हुई है क्योंकि भारत व कनाडा के बीच के रिश्ते सुखद नहीं है। उनके वीजा की अवधि बढ़ाई नहीं जा रही है वहीं, उन 700 छात्रों पर डिपोट की तलवार लटक रही है।
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छात्र ब्रैम्पटन में प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां वे पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट का विस्तार मांग रहे हैं। निर्वासन के डर से 29 अगस्त से प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अब तनाव बढ़ने लगा है। इस विरोध का नेतृत्व नौजवान स्टूडेंट नेटवर्क के बिक्रम सिंह कुल्लेवाल कर रहे हैं, और इसे मॉट्रियल यूथ स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा भी समर्थन मिल रहा है। पिछले एक साल में, भारत और कनाडा के बीच तनावपूर्ण संबंधों ने अप्रवासी और छात्रों के बीच अनावश्यक डर बनाकर रखा है लेकिन अब चंद दिनों में यह तनाव बढ़ गया है।
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कनाडा ने हाल ही में घोषणा की है कि पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट प्राप्त करने के लिए छात्रों को कनाडाई भाषा मानक परीक्षण में 7 का स्कोर प्राप्त करना होगा और मास्टर या डॉक्टरेट की डिग्री होनी चाहिए, जबकि कई छात्र तकनीकी रूप से उस बाजार में उपलब्ध नौकरियों के अनुसार योग्य नहीं हैं। कनाडा में इसी कारण एक लाख 30 हजार युवाओं की फाइल पीआर के लिए क्लीयर नहीं की जा रही है और न ही वीजा अवधि बढ़ाई जा रही है।
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अब पंजाबी युवाओं के समक्ष दो ही विकल्प हैं, या तो वह अवैध रूप से कनाडा में छिपकर अपना जीवन व्यतीत करें या फिर कनाडा छोड़कर भारत आ जाएं। कुछ युवाओं ने कनाडा से अमेरिका रुख करना शुरू कर दिया है। कनाडा के विभिन्न प्रांतों, जैसे प्रिंस एडवर्ड आइलैंड, ओंटारियो, मैनिटोबा, और ब्रिटिश कोलंबिया में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र सड़कों पर कैंप लगा रहे हैं और रैलियां निकाल रहे हैं। युवाओं का कहना है कि हमारी पीआर की फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिनको कनाडा सरकार क्लीयर नहीं कर रही। ऐसे में सरकार को दो साल का वर्क वीजा बढ़ा देना चाहिए।


इमिग्रेशन माहिर सुकांत का कहना है कि कनाडा व भारत में खटास शिखर पर है और इसका असर छात्रों पर हो रहा है। आगे कोई आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि विदेश मंत्रालय ने हाई कमिश्नर, राजनयिकों और उच्च अधिकारियों को वापस बुला लिया है।

 
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