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चिंताजनक: पंजाब में पांच साल तक की उम्र के बच्चों की लंबाई और वजन कम, 2.95 प्रतिशत दुबले-पतले, क्या है वजह?

Fri, 25 Jul 2025 10:20 AM IST
अंकेश ठाकुर विशाल पाठक, चंडीगढ़
विशाल पाठक, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 25 Jul 2025 10:20 AM IST
सार

रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात सामने आई है कि पंजाब में कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसके कारण डिलीवरी के बाद कुपोषण के कारण नवजात बच्चों की मौत भी हो रही है।

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Children up to five years of age in Punjab are victims of malnutrition
कुपोषण का खतरा - फोटो : Freepik.com

विस्तार

पंजाब में पांच साल तक की उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार होते जा रहा हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पोषण ट्रैकर डाटा-जून 2025 के अनुसार पंजाब में 0-5 साल की उम्र के बीच के 17.14 फीसदी बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुरूप नहीं है। इसी उम्र के 2.95 फीसदी बच्चे दुबले-पतले और 5.12 फीसदी बच्चों का वजन नहीं बढ़ रहा है। राज्य में बच्चे कुपोषण का शिकार होते जा रहे हैं। इसके पीछे स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो अहम वजह बताई है, जिसमें बच्चों के खानपान से पौष्टिक आहार जैसे दूध, दही, दालें, सब्जियों व फल जैसे आहार दूर होते जा रहे हैं। दूसरा अभिभावक अपने बच्चों को फास्ट व जंक फूड की लत डालते जा रहे हैं।

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कुपोषण के कारण एक हजार पर 12 बच्चों की 28 दिन में मौत
रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात सामने आई है कि पंजाब में कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है, जिसके कारण डिलीवरी के बाद कुपोषण के कारण नवजात बच्चों की मौत भी हो रही है। राज्य में हर एक हजार नवजात बच्चों में 12 की महज 28 दिनों में कुपोषण के कारण मौत हो जाती है।
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2024 में पंजाब के गांवों में की गई थी स्टडी
अगस्त 2024 में पंजाब के गांवों में कुपोषण को लेकर एक स्टडी की गई थी। इसमें गांव के बच्चे बड़ी संख्या में कुपोषित पाए गए थे। दो से तीन साल की उम्र के 16 फीसदी बच्चों का औसत वजन कम पाया गया था, जबकि 20.4 फीसती बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुरूप नहीं थी। इसी तरह 4.8 फीसदी बच्चे ओवर वेट थे।
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पंजाब सरकार बनाएगी एक हजार आंगनबाड़ी केंद्र
पंजाब सरकार का राज्य में एक हजार आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र बनाने का लक्ष्य है। इन केंद्रों के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसको लेकर बीते मार्च में महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने घोषणा की थी। इन आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के समग्र विकास के लिए सरकार ने प्लान तैयार किया था। सरकार का दावा है कि अब तक राज्य में ऐसे 111 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जा चुके हैं। सरकार इन आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए बाल देखभाल व विकास में सुधार के प्रयास में जुटी है।


पांच साल की उम्र तक के बच्चों का वजन और लंबाई के तय मानक
0 से 5 साल के बच्चों का वजन उनकी उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार 1 साल के लड़के का वजन लगभग 10.2 किलो और लड़की का 9.5 किलो होना चाहिए। 2 से 5 साल के बच्चों के लिए लड़कों का वजन 12.3 किलो से 16 किलो और लड़कियों का 12 किलो से 15 किलो तक हो सकता है। 3 से 5 साल के बच्चों में लड़कों का वजन 14 से 17 किलो और लड़कियों का 14 से 16 किलो तक होना चाहिए। इसी तरह 0 से 5 साल के बच्चों की लंबाई उनकी उम्र, लिंग और आनुवंशिकता के आधार पर अलग-अलग होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बच्चों के विकास के लिए कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं। एक नवजात शिशु की औसत लंबाई 46-55 सेमी (18-22 इंच) होती है। 1 साल की उम्र तक लंबाई 72-76 सेमी (28-30 इंच) तक बढ़ जाती है। 2 साल की उम्र में यह 82-91 सेमी (32-36 इंच) तक हो सकती है। 5 साल की उम्र तक लंबाई 100-110 सेमी (39-43 इंच) तक होनी चाहिए।

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