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चंडीगढ़ का सैनिटरी इंस्पेक्टर निलंबित: सात साल से एक ही सीट पर था तैनात, अब निगम के सिस्टम पर सवाल

Sat, 10 Oct 2026 10:28 AM IST
Nivedita राजबीर राणा, संवाद, चंडीगढ़
राजबीर राणा, संवाद, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 10 Oct 2026 10:28 AM IST
सार

शक्ति की तैनाती के दौरान चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर हरप्रीत सिंह, संदीप धनखड़ और कुलबीर सिंह डंपिंग ग्राउंड के इंचार्ज रहे। अगस्त 2023 में धनखड़ की गिरफ्तारी के बाद कुलबीर सिंह ने जिम्मेदारी संभाली। वह भी तीन साल से अधिक समय से इसी जगह तैनात हैं।

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Chandigarh Sanitary Inspector suspended bribe case Posted at same seat for seven years
चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल

विस्तार

पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते सीबीआई के हाथों गिरफ्तार सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति को नगर निगम ने कमिश्नर के निर्देश पर शुक्रवार को निलंबित कर दिया। शक्ति वर्ष 2017 से डंपिंग ग्राउंड पर तैनात था। इस दौरान चार निगम कमिश्नर और कई चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर बदल गए लेकिन उसकी तैनाती नहीं बदली। 
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अब उसकी गिरफ्तारी के बाद नगर निगम के म्यूनिसिपल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (एमओएच) विंग में लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती, मशीनों के संचालन और बिलों के भुगतान पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि खराब चेन डोजर और टिपर के भी चलने के बिल बनाए जाते रहे और भुगतान के बाद कमीशन बांटा जाता था। 
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बिलों को मंजूरी के बदले 14 लाख मांगने का आरोप
सीबीआई के मुताबिक, शक्ति पर ठेकेदार की फर्म के लंबित और भविष्य के बिलों को मंजूरी दिलाने के बदले कुल 14 लाख रुपये मांगने का आरोप है। सीबीआई अदालत ने सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति को वीरवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है।

डंपिंग ग्राउंड पर सैनिटरी इंस्पेक्टर नितिन भी तैनात है लेकिन एमओएच विंग के अधिकारियों ने उसे बहुत कम काम दे रखा था। वह प्रभावी रूप से शक्ति के साथ ही जुड़ा रहता था। रिश्वत के मौजूदा मामले में नितिन का नाम रकम के बंटवारे के संदर्भ में भी सामने आया है। सीबीआई की शिकायत में उसकी भूमिका से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। 

शक्ति की तैनाती के दौरान चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर हरप्रीत सिंह, संदीप धनखड़ और कुलबीर सिंह डंपिंग ग्राउंड के इंचार्ज रहे। अगस्त 2023 में धनखड़ की गिरफ्तारी के बाद कुलबीर सिंह ने जिम्मेदारी संभाली। वह भी तीन साल से अधिक समय से इसी जगह तैनात हैं। एमओएच विंग में 29 नियमित और 17 आउटसोर्स सैनिटरी इंस्पेक्टर व चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर हैं। इनके अलावा पांच हेल्थ सुपरवाइजर हैं। कई कर्मचारियों की एक ही जगह तीन से पांच साल तक तैनाती रही है। इससे संवेदनशील सीटों पर रोटेशन और लंबे समय तक तैनाती को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। निगम कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि यह एमओएच विंग का मामला है।

पीपल कनेक्ट के बिलों में खेल के आरोप
डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े की लेवलिंग का काम दो साल से मैसर्स पीपल कनेक्ट सर्विस कर रही है। कंपनी के पास दो चेन डोजर और दो टीपर हैं। आरोप है कि मशीनें खराब होने या नहीं चलने के बावजूद बिलों में उनका संचालन दिखाया जाता रहा। कंपनी मालिक ने सीबीआई को दी शिकायत में पिछले 14 महीने के बिलों को लेकर कमीशन के विवाद का आरोप लगाया।

इसके बाद ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह ने कंपनी का टेंडर रद्द कर दिया। कंपनी मालिक ने अपनी शिकायत में ज्वाइंट कमिश्नर पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। आरोप है कि चेन डोजर के बिल असिस्टेंट कंट्रोलर फाइनेंस एंड अकाउंट्स (एसीएफए) संदीप सेठी के स्तर पर मंजूर होते थे और भुगतान के बाद कमीशन बांटा जाता था। जांच में बिलों की मंजूरी और भुगतान से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी अहम होगी।

इससे पहले छह साल तक दूसरी कंपनी के डोजर
इससे पहले एमओएच विंग में तैनात एक सैनिटरी इंस्पेक्टर के परिवार से जुड़ी मैसर्स अजीत सिंह एंड कंपनी के चेन डोजर करीब छह साल तक डंपिंग ग्राउंड पर काम करते रहे। आरोप है कि उस दौरान भी खराब मशीनों को बिलों में चलता दिखाया जाता था और इसमें शक्ति की भूमिका थी।

उस समय हरप्रीत सिंह और संदीप धनखड़ चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर थे। अगस्त 2023 में सीबीआई ने आउटसोर्स सैनिटरी इंस्पेक्टर को दोबारा नौकरी पर रखने के मामले में चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर चंद्र मोहन और संदीप धनखड़ को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। मामले में एक लाख रुपये की रिश्वत लेने और दोबारा नौकरी पर रखने के बदले दो लाख रुपये मांगने की बात सामने आई थी।

डीजल चोरी के मामले में भी उठे सवाल
शक्ति के पास सेक्टर-25 के मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) की सौ से अधिक गाड़ियों, निगम के भारी वाहनों और सेक्टर-1 से 30 तक रोड स्वीपिंग करने वाली मशीनों का जिम्मा भी था। वाहनों में डीजल भरवाने, संचालन और मरम्मत की निगरानी उसके अधीन थी। शहर में पौधों पर छिड़काव करने वाली स्प्रिंकलर गाड़ी भी इसी व्यवस्था में शामिल थी।

डीजल चोरी का वीडियो वायरल होने के बाद कमिश्नर के निर्देश पर तीन आउटसोर्स ड्राइवरों को बर्खास्त किया गया था। इनमें दो भारी वाहन चालक शक्ति के अधीन थे। निगम के ट्रैक्टर, टीपर, कैप्सूल और अन्य भारी वाहनों में डीजल भरवाने व मरम्मत की जिम्मेदारी भी शक्ति के पास थी। आरोप लगे थे कि कार्रवाई आउटसोर्स कर्मचारियों तक सीमित रही और एमओएच डॉ. इंदरप्रीत कौर तथा ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह ने शक्ति का बचाव किया। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और दस्तावेजी पुष्टि जरूरी है।
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