पहले घंटों बातें, अब चुप्पी: कहीं परेशानी में तो नहीं आपका दोस्त? बदलता व्यवहार दे सकता है खतरे का संकेत
शोधकर्ताओं ने स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग (एसईएम) से संबंधों का विश्लेषण किया। बुलिंग, साइबर बुलिंग और डेटिंग हिंसा को पीड़ित होने के संकेतकों के रूप में देखा गया। विश्लेषण में पीड़ित होने और शारीरिक लड़ाई, शारीरिक लड़ाई और डिप्रेशन तथा डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों के बीच संबंध मिला।
विस्तार
दोस्त पहले घंटों बात करता था, अब चुप रहने लगा है। पढ़ाई में मन नहीं लगता, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है या वह सबसे दूरी बनाने लगा है तो इसे सिर्फ एटीट्यूड या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज न करें। बुलिंग, साइबर बुलिंग, रिश्तों में हिंसा या मानसिक परेशानी भी इसकी वजह हो सकती है। पीजीआई के अध्ययन में युवाओं के उत्पीड़न, डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों के बीच संबंध सामने आए हैं।
पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और मनोचिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों डॉ. अधीश कुमार सेठी, पीवीएम लक्ष्मी, डॉ. विकास कुमार भाटिया और डॉ. शुभ मोहन सिंह ने यह अध्ययन किया।
सितंबर 2026 में मेडआरएक्सिव पर प्रारंभिक शोधपत्र के रूप में प्रकाशित यह अध्ययन 2018 में चंडीगढ़ के छह कॉलेजों में हुए सर्वे के आंकड़ों के दोबारा विश्लेषण पर आधारित है। इसमें 18 से 22 वर्ष के 995 विद्यार्थियों को बुलाया गया, जिनमें 752 ने प्रश्नपत्र पूरा भरा। भागीदारी 75.6 प्रतिशत रही। प्रतिभागियों की मध्य आयु 19 वर्ष थी और 64.4 प्रतिशत महिलाएं थीं।
24.2% में डिप्रेशन के लक्षण
सर्वे में 10.2 प्रतिशत युवाओं ने कॉलेज में बुलिंग और 10.8 प्रतिशत ने साइबर बुलिंग का अनुभव बताया। करीब चार प्रतिशत ने डेटिंग के दौरान शारीरिक चोट लगने और 16.6 प्रतिशत ने पिछले एक साल में शारीरिक लड़ाई में शामिल होने की बात कही। 24.2 प्रतिशत युवाओं में कम से कम दो सप्ताह तक डिप्रेशन के लक्षण रहे। वहीं, 4.5 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में आत्महत्या के बारे में गंभीरता से विचार करने और 0.4 प्रतिशत यानी तीन युवाओं ने आत्महत्या का प्रयास करने की बात कही।
74 सवालों से जुटाए आंकड़े
शोधकर्ताओं ने मल्टी-स्टेज स्ट्रेटिफाइड रैंडम सैंपलिंग से विद्यार्थियों का चयन किया। जानकारी के लिए सीडीसी यूथ रिस्क बिहेवियर सर्विलांस सिस्टम के 2017 के स्टैंडर्ड हाई स्कूल प्रश्नपत्र का इस्तेमाल हुआ। इसमें 74 सवाल थे, जिन्हें भरने में 30 से 45 मिनट लगे। भारतीय संदर्भ में उपयोगिता जांचने के लिए पहले 10 विद्यार्थियों पर इसका परीक्षण किया गया। प्रश्नपत्र बिना नाम लिखे भरवाया गया और अध्ययन को पीजीआई की इंस्टीट्यूट एथिक्स कमेटी से मंजूरी मिली थी।
डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों में मजबूत संबंध
शोधकर्ताओं ने स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग (एसईएम) से संबंधों का विश्लेषण किया। बुलिंग, साइबर बुलिंग और डेटिंग हिंसा को पीड़ित होने के संकेतकों के रूप में देखा गया। विश्लेषण में पीड़ित होने और शारीरिक लड़ाई, शारीरिक लड़ाई और डिप्रेशन तथा डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों के बीच संबंध मिला। डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों का संबंध विशेष रूप से मजबूत था, जबकि पीड़ित होने और आत्मघाती विचारों के बीच सीधा संबंध नगण्य पाया गया। अध्ययन क्रॉस-सेक्शनल आंकड़ों पर आधारित है, इसलिए इससे कारण-परिणाम का सीधा प्रमाण नहीं मिलता और निष्कर्ष सभी युवाओं पर लागू नहीं किए जा सकते।
दोस्त का व्यवहार बदले तो ये पांच बातें याद रखें
- दोस्त दूरी बनाने लगे तो प्यार से पूछें कि सब ठीक है या नहीं।
- पढ़ाई से मन हटना, गुस्सा आना या पसंदीदा गतिविधियों से दूरी परेशानी का संकेत हो सकती है।
- कॉलेज या सोशल मीडिया पर परेशान किए जाने पर परिवार, शिक्षक या काउंसलर से बात करें।
- परेशानी साझा करने वाले को कमजोर न कहें और न ही दूसरों से उसकी तुलना करें।
- लगातार उदासी, निराशा या खुद को बेकार समझने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात को गंभीरता से लें और तुरंत सहायता दिलाएं।