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नहीं बढ़ेगा चंडीगढ़ मेयर का कार्यकाल: गृह मंत्रालय ने ठंडे बस्ते में डाला प्रस्ताव, इस बार भी एक साल ही रहेगा

Tue, 03 Nov 2026 10:40 AM IST
Nivedita विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 03 Nov 2026 10:40 AM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया चंडीगढ़ दौरे के दौरान प्रशासन ने शहर से जुड़े चार प्रमुख प्रस्ताव उनके सामने रखे थे। चार में से तीन प्रस्तावों पर केंद्र का रुख सकारात्मक है, लेकिन मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर अभी सहमति नहीं बनी है।

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Chandigarh Mayor tenure will not be extended right now Ministry of Home Affairs put proposal on back burner
चंडीगढ़ मेयर कार्यकाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर ढाई या तीन साल करने की मांग पर फिलहाल फैसला होता नजर नहीं आ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं दी है।
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ऐसे में दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगर निगम चुनाव के बाद जनवरी 2027 में चुने जाने वाले नए मेयर का कार्यकाल भी मौजूदा व्यवस्था के अनुसार एक साल ही रहने की संभावना है। कार्यकाल बढ़ाने की मांग पर फैसला नहीं होने से इस बार भी मेयर को शहर के विकास कार्यों के लिए सीमित समय ही मिल सकेगा।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया चंडीगढ़ दौरे के दौरान प्रशासन ने शहर से जुड़े चार प्रमुख प्रस्ताव उनके सामने रखे थे। शाह ने दिवाली के बाद तीन लंबित मुद्दों पर बड़ी घोषणाएं होने का संकेत दिया था। इनकी औपचारिक जानकारी पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से दी जानी है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, चार में से तीन प्रस्तावों पर केंद्र का रुख सकारात्मक है, लेकिन मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर अभी सहमति नहीं बनी है।
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दिसंबर में पार्षद चुनाव, जनवरी में नया मेयर
नगर निगम के मौजूदा कार्यकाल के बाद दिसंबर 2026 में पार्षदों के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव परिणाम और पार्षदों के निर्वाचन की अधिसूचना के बाद निगम की पहली बैठक में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव कराया जाएगा। इसके तहत जनवरी 2027 में नया मेयर चुना जाएगा। यदि इससे पहले कार्यकाल बढ़ाने के लिए कानूनी संशोधन नहीं होता है तो नए मेयर को भी एक साल के लिए ही चुना जाएगा।

संसद से कानून में संशोधन जरूरी
चंडीगढ़ में पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 लागू है। इसकी धारा 38 के तहत मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पार्षदों में से होता है और उनका कार्यकाल एक साल निर्धारित है। ऐसे में प्रशासन अपने स्तर पर आदेश जारी कर कार्यकाल ढाई या तीन साल नहीं कर सकता। इसके लिए कानून में संशोधन और संसद की मंजूरी जरूरी होगी। इसके अलावा नई व्यवस्था लागू करने के लिए चुनाव प्रक्रिया, पदों के आरक्षण, कार्यकाल की शुरुआत और समाप्ति तथा अगले चुनाव से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट करना होगा। दिसंबर में नगर निगम चुनाव और जनवरी में मेयर चुनाव प्रस्तावित होने के कारण इतनी कम अवधि में पूरी प्रक्रिया संपन्न करना भी चुनौती है।

शाह के सामने रखे थे चार प्रस्ताव
प्रशासन ने अमित शाह के सामने पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने, मेयर का कार्यकाल एक साल से बढ़ाकर ढाई साल करने, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड में बदलने की अनुमति देने और चंडीगढ़ मास्टर प्लान में संशोधन कर एफएआर को 2 करने के प्रस्ताव रखे थे।

शाह ने पुलिस के 60वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान दिवाली के बाद तीन लंबित मुद्दों के समाधान की घोषणा का संकेत दिया था। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया था कि किन तीन प्रस्तावों को मंजूरी मिलेगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मेयर के कार्यकाल का प्रस्ताव फिलहाल बाकी तीन मुद्दों से पीछे है।

विकास कार्यों की निरंतरता के लिए बढ़ाने की मांग
मेयर का कार्यकाल एक साल होने के कारण विकास परियोजनाओं की निरंतरता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। पद संभालने के बाद विभागों के साथ समन्वय, योजनाओं की तैयारी, बजट और टेंडर प्रक्रिया में समय लगता है। ऐसे में कई परियोजनाओं को गति मिलने से पहले ही कार्यकाल समाप्त होने लगता है। इसी को देखते हुए प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने ढाई साल के कार्यकाल को व्यावहारिक विकल्प बताया था। मई 2026 में प्रशासन ने गृह मंत्रालय के सामने इसका प्रस्ताव रखा था। प्रशासन का तर्क था कि इससे विकास योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। सांसद मनीष तिवारी ने भी मेयर का कार्यकाल बढ़ाने की पैरवी की थी।
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