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Chandigarh: अमर उजाला कार्यालय पहुंचे चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, विभिन्न मुद्दों पर की बात
Sun, 21 Jun 2026 07:27 PM IST
शाहिल शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 21 Jun 2026 07:27 PM IST
सार
पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को अमर उजाला के पंचकूला कार्यालय का दाैरा किया।
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गुलाब चंद कटारिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या को खत्म करना एक बड़ी चुनौती है लेकिन अगर प्रशासन और पुलिस मुस्तैद हो जाए तो सूबे में नशे का धंधा 10 दिन के भीतर खत्म किया जा सकता है।
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प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि बाहरी एजेंसियां प्रदेश में टकराव और अशांति फैलाने की साजिश रच रही है और साथ ही युवाओं को भी बहका रही है लेकिन वे इसमें सफल नहीं होंगी। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को अमर उजाला के पंचकूला कार्यालय का दाैरा किया। इस दाैरान कटारिया ने अखबार के कामकाज की जानकारी ली और विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
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प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या को कैसे रोका जा सकता है?
पंजाब में नशे की समस्या बहुत ही गंभीर है। सूबे में इस कारण कई घर बरामद हो गए हैं। 18 से 35 साल की आयु के युवाओं में यह समस्या ज्यादा है और बॉर्डर एरिया में युवाओं की तदाद भी कम हो रही है जो चिंताजनक है। पाकिस्तान के साथ लगते सभी जिलों के युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है है। हाल ही में मैंने बॉर्डर जिलों का दौरा किया था। इस दौरान गांवों की समितियों से भी बातचीत की जिसमें यह सभी समस्याएं सामने आई हैं। हालांकि पहले से इसमें कमी जरुर आई है, क्योंकि पहले हर दूसरे या चौथे घर से नशा मिल जाता था लेकिन अब इस पर काफी हद तक रोक लगाई गई है। नशा तस्करों को पकड़ा जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार ने एंटी ड्रोन सिस्टम लगाया है। पंजाब पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू की है लेकिन फिलहाल 100 प्रतिशत इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब ड्रोन से नशा की तस्करी की जा रही है और 50 किलोमीटर दूर क्षेत्र में भी ड्रोन नशे की खेप फेंककर वापस चले जाते हैं जिस पर रोक लगाना बड़ी चुनौती है जबकि पहले सिर्फ 2 से 5 किलोमीटर तक ही नशा पहुंचता था। यहां उन लोगों पर कार्रवाई करने की जरुरत है जो इस खेप को प्राप्त करके आगे सप्लाई करते हैं। बड़े अधिकारी अच्छे काम कर सकते हैं लेकिन निचले स्तर पर कर्मी इस धंधे का हिस्सा बन गए हैं जिस पर काबू पाना आसान नहीं है। यही कारण है कि अधिकारियों व कर्मियों में देश के लिए समर्पित भाव होना चाहिए क्योंकि नशे से देश की नई पीढ़ी बर्बाद हो रही है। साथ ही इससे भारत को कमजोर करने की कोशिश भी की जा रही है। विदेश से यह साजिश रची जा रही है और युवाओं को टारगेट किया जा रहा है।
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पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक क्यों है?
राज्यपाल ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए प्रयास कर रहे हैं। पुलिस की तरफ से नाके भी लगाए जा रहे हैं लेकिन अभी भी कमियां जरुर है। गोली मारकर अपराधी भाग जाते हैं जिस पर काबू पाने की जरुरत है। छोटी घटनाएं से लोगों में नाराजगी नहीं होती है लेकिन जब बड़ी घटनाएं होती है तो लोगों में रोष बढ़ जाता है। जैसे चंडीगढ़ में गोलीबारी की घटना हुई तो मेरे से सवाल पूछना जायज है। अगर ऐसी घटना होती है तो अपराधियों को तुंरत पकड़ा जाना चाहिए। अगर अपराधी गोलीबारी की घटना को अंजाम देकर फरार हो होते हैं तो उससे लोगों में विश्वास कम होता है। पुलिस को ऐसी प्रणाली बनानी होगी कि अगर कोई घटना होती है तो अपराधियों को तुरंत पकड़कर जेल में डाला जाए। सूबे में गैंगस्टरवाद भी चुनौती है और पुलिस ने भी अपराधियों की धरपकड़ तेज की है लेकिन अभी भी काफी कुछ करने की जरुरत है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसके नतीजे जरुर मिलेंगे।
गोलीबारी की घटनाओं के बढ़ने के क्या कारण है?
शूटआउट की घटनाओं में रोक लगाना बड़ी चुनौती है। बाहरी एजेसियां गोलीबारी की घटनाएं करवा रही है। कई लोग हमसे सीधा युद्ध नहीं कर सकते हैं तो वह यहां माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। बॉर्डर स्टेट होने के बावजूद भी पंजाब नशा और हथियार तस्करी के खिलाफ एक्शन ले रहा है। पंजाब के साथ लगते बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान बिल्कुल आमने-सामने है, जिस कारण यहां अपराध, नशे और गैंगस्टरवाद पर रोक लगाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है लेकिन बावजूद इसके लिए इन सब से सख्ती से निपटने का प्रयास किया जा रहा है।
किसान यूनियनों के साथ बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई?
किसान यूनियनों से पहले भी मुलाकात कर चुका हूं और हाल ही में भी उनके साथ बैठक की थी। वह अपने मुद्दे प्रमुखता से रखते हैं और उनके काफी मुद्दे जायज भी हैं, लेकिन हर समस्या का हल बैठ कर होता है। अगर सभी मुद्दे पर बैठक कर बात की जाए तो हल हो सकता है। लेकिन अगर कानून व्यवस्था को हाथ में लेकर मुद्दे हल कराने का प्रयास किया जाएगा तो सरकार भी सख्त हो जाती है जिससे असल मुद्दे छूट जाते हैं।
बीबीएमबी में उचित प्रतिनिधित्व की वाली मांग कहां तक जायज है?
पानी का काफी मुद्दा अहम है और सभी राज्यों को भाखडा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हमारे राजस्थान की भी इसमें अहम हिस्सेदारी है लेकिन बावजूद राज्य को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पंजाब का अपने मुद्दे उठाना जायज है लेकिन सभी मुद्दों का बैठकर हल किया जा सकता है। इसे लेकर बात की जानी चाहिए क्योंकि हर समस्या का हल निकल सकता है।
महिला उत्थान, सुरक्षा और कल्याण पर क्या रोडमैप है?
महिलाओें से जुड़े मुद्दों के प्रति हम बहुत संवेदनशील है। यह बात ठीक है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहा है लेकिन चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी कर रही है। क्राइम अगेंस्ट वूमैन मामले में सजा दर की बात करें तो इसमें बढ़ोतरी हुई है। चंडीगढ़ में महिलाएं बिना खौफ देर रात तक आवाजाही कर रही है क्योंकि पुलिस पहले से मुस्तैद है। महिला उत्थान और कल्याण की कई योजनाओं पर पंजाब और चंडीगढ़ में काम किया जा रहा है।