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चंडीगढ़ प्रशासन की कछुआ चाल: पांच महीने में 30% बजट भी नहीं खर्च पाए 15 विभाग, बड़ा सवाल-कैसे होगा विकास

Sat, 29 Aug 2026 07:45 AM IST
Nivedita विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 29 Aug 2026 07:45 AM IST
सार

चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागों के प्रमुखों से अगले सप्ताह तक उन विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन पर काम शुरू हो चुका है या शुरू किया जाना है। अधिकारियों को बताना होगा कि बजट आवंटन और मंजूरी के बावजूद फंड खर्च क्यों नहीं हुआ।

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Chandigarh Administration 15 departments failed to spend even 30% of their budget in five months
चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला/फाइल

विस्तार

वित्तीय वर्ष 2026-27 शुरू हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन के 15 से ज्यादा विभाग अपने विकास बजट का 30 फीसदी हिस्सा भी खर्च नहीं कर पाए हैं।
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प्रशासन के विभिन्न विभागों के कामकाज और बजट खर्च की समीक्षा में यह स्थिति सामने आई है। चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद ने समीक्षा के दौरान उन विभागों को चिह्नित किया है, जिनकी बजट खर्च करने की रफ्तार उनके सालाना वर्किंग एजेंडा के अनुरूप संतोषजनक नहीं है।
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आमतौर पर वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में विभाग स्वीकृत परियोजनाओं पर काम शुरू कर बजट खर्च की गति बढ़ाते हैं। लेकिन इस बार 15 से ज्यादा विभागों में विकास मद के खर्च की रफ्तार 30 फीसदी से नीचे है। इससे प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के समय पर पूरा होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आईटी और ट्रांसपोर्ट समेत कई विभागों में विकास परियोजनाओं के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद खर्च धीमा है। चीफ सेक्रेटरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन परियोजनाओं के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन राशि खर्च नहीं हुई है, उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए।

अगले सप्ताह तक देनी होगी पूरी रिपोर्ट

चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागों के प्रमुखों से अगले सप्ताह तक उन विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन पर काम शुरू हो चुका है या शुरू किया जाना है। अधिकारियों को बताना होगा कि बजट आवंटन और मंजूरी के बावजूद फंड खर्च क्यों नहीं हुआ। इसके साथ ही परियोजनाओं में आ रही प्रशासनिक, तकनीकी और टेंडर संबंधी अड़चनों की जानकारी भी देनी होगी। विभागों से यह भी पूछा गया है कि वित्तीय वर्ष के बाकी महीनों में आवंटित बजट किस तरह खर्च किया जाएगा और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने की क्या टाइमलाइन तय की गई है। अधिकारियों के अनुसार समीक्षा का उद्देश्य केवल बजट खर्च का आंकड़ा जुटाना नहीं है। इसके जरिए उन कारणों की पहचान की जा रही है, जिनसे विकास परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

बजट का गणित

6545.52 करोड़ रुपये : वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रशासन का कुल बजट
5939.52 करोड़ रुपये : रेवेन्यू हेड में आवंटित
606 करोड़ रुपये : रूट कैपिटल हेड यानी विकास कार्यों के लिए
1295.38 करोड़ रुपये : स्कूल शिक्षा विभाग का बजट
1127.95 करोड़ रुपये : हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट
970.53 करोड़ रुपये : पुलिस विभाग
459.51 करोड़ रुपये : ट्रांसपोर्ट विभाग
करीब 850 करोड़ रुपये : नगर निगम को केंद्र से मिले

 
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