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पंजाब के स्कूलों का बुरा हाल: पांचवीं के बच्चे नहीं पढ़ पा रहे दूसरी कक्षा की किताब, भागफल और घटाव में फिसड्डी

Thu, 30 Jan 2025 03:03 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 30 Jan 2025 03:03 PM IST
सार

प्रथम फाउंडेशन की एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट-2024 में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी व निजी दोनों स्कूलों में ही पांचवीं कक्षाओं के बच्चों की शिक्षा का ग्राफ गिरा है।

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Bad condition of schools in Punjab Fifth grade children are unable to read second grade books
School - फोटो : Freepik

विस्तार

पंजाब में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद परिणाम आशा अनुरूप नहीं आ रहे। 
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प्रथम फाउंडेशन की एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट-2024 में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी व निजी दोनों स्कूलों में ही पांचवीं कक्षाओं के बच्चों की शिक्षा का ग्राफ गिरा है। सिर्फ 61.4 बच्चे ही दूसरी कक्षा का पाठ पढ़ने में समक्ष हैं, जबकि वर्ष 2022 में 66.2 बच्चे दूसरी कक्षा का मूल पाठ पढ़ने में समर्थ पाए गए थे।

गणित विषय परेशानी का सबब

ग्रामीण क्षेत्रों में गणित का विषय सभी बच्चों के लिए परेशानी का सबब बना है। पांचवीं कक्षा के 48.8 प्रतिशत बच्चे ही भागफल के सवाल हल कर पा रहे हैं, लेकिन वर्ष 2022 के मुकाबले इसमें सुधार जरूर देखने को मिला है। पिछले सर्वे में सिर्फ 41.1 फीसदी बच्चे ही भागफल के सवालों को अच्छे से हल कर पा रहे थे। इसी तरह तीसरी कक्षा के बच्चों को समर्थ बनाने के लिए अभी भी बहुत काम करने की जरूरत है।

तीसरी कक्षा के 48.9 फीसदी बच्चों को घटाव नहीं आता है। अगर सिर्फ सरकारी स्कूलों की बात की जाए, तो तीसरी कक्षा के सिर्फ 27.7 बच्चे ही दूसरी कक्षा का पाठ पढ़ सकते हैं, जबकि वर्ष 2022 के मुकाबले इसमें 3.4 फीसदी का ही सुधार हुआ है। 

इन आंकड़ों ने शिक्षा विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि मिशन समर्थ के तहत पहले ही बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए विभाग काम कर रहा है। दूसरी से आठवीं तक की कक्षाओं के बच्चों की पंजाबी, अंग्रेजी व गणित में पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों के 46 फीसदी बच्चों के पास खुद का मोबाइल

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 14 से 16 वर्ष के 94.2 फीसदी बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें से 46 फीसदी बच्चों के पास अपना खुद का मोबाइल है। इसी तरह 96.2 फीसदी बच्चों के पास घर में मोबाइल है। 63.3 फीसदी बच्चे मोबाइल का शिक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं। 92.5 फीसदी बच्चे यूट्यूब पर वीडियो खोज लेते हैं और इसमें से 96.8 फीसदी बच्चे इसे शेयर भी कर लेते हैं। स्कूलों में पहले ही डिजिटल शिक्षा को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कोरोना काल के बच्चों में पहले ही मोबाइल का उपयोग बढ़ गया है।

लड़कियों के 77 फीसदी शौचालय इस्तेमाल करने योग्य

सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश के स्कूलों में 77 फीसदी लड़कियों के शौचालय इस्तेमाल करने योग्य हैं, यानी उनमें पानी व सफाई के साथ ही अन्य सभी तरह की सुविधाएं हैं। अगर कुल शौचालय की बात की जाए तो उसमें 81.2 फीसदी शौचालय इस्तेमाल करने लायक हैं। इसके अलावा 88.6 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध है।
 
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