Interview: आम आदमी पार्टी के प्रधान अमन अरोड़ा बोले-सरकार के कामकाज से 2027 में तय होगा पार्टी का भविष्य
हाईकमान की नजर में किसी भी कसौटी पर खरे उतरने में पूरी तरह सक्षम समझे जाने वाले आप की प्रदेश इकाई के नए प्रधान एवं कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा नए रोडमैप व विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रधान पद का कार्यभार संभालते ही निगम चुनाव के रूप में उनके सामने पहला टेस्ट मैच होगा।
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लोकसभा चुनाव में 13 में से 3 सीट जीतने के बाद चार सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव में कमबैक करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब की कमान अब हिंदू चेहरे के हाथ में थमाई गई है। उपचुनाव में सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के भरोसे अब निगम चुनाव के इम्तिहान देने की तैयारी है।
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता की कचहरी में सरकार के कामकाज से पार्टी के भविष्य की डगर तय करने के साथ, बीते लोकसभा व उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन, महिलाओं की एक हजार रुपये की गारंटी, सरकार के लिए ड्रग्स व गैंगस्टरवाद के रूप में चुनौती व अन्य राजनीतिक मायनों पर अमर उजाला के पंजाब ब्यूरो प्रमुख विशाल पाठक की आप पंजाब के नए प्रधान एवं कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा से विशेष बातचीत
सवाल-प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही निगम चुनाव के रूप में आपकी पहली परीक्षा है, इस परीक्षा में सफल होने के लिए आप जमीनी स्तर पर क्या तैयारियां कर रहे हैं ?
अमन अरोड़ा-पार्टी हाईकमान ने प्रदेश प्रधान के रूप में मुझे अहम जिम्मेदारी दी है। यह सही बात है कि मेरी प्रधानी में पार्टी निगम चुनाव लड़ने जा रही है, लेकिन पार्टी के हर सीनियर लीडर से फीडबैक लेकर हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ग्राउंड लेवल पर पार्टी ने 10 मंत्रियों, सांसदों और एरिया विधायकों को उतार दिया है। वे हर निकाय चुनाव क्षेत्र में जाकर न केवल लोगों से बल्कि कार्यकर्ताओं का फीडबैक, लोगों की जरूरतों और उनकी समस्याओं पर रिपोर्ट ले रहे हैं।
सवाल-2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी अगले दो साल में क्या बदलाव लाएगी? 2022 के चुनाव में महिलाओं को दी एक हजार रुपये की गारंटी कब तक पूरी होगी? क्या पार्टी हाईकमान सीएम के प्रधान बने रहने से खुश नहीं थी ?
अमन अरोड़ा-2022 के चुनाव में जनता से जो वादे किए थे, उनमें से चार प्रमुख वादे, जिनमें आम आदमी क्लिनिक के जरिये बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल ऑफ एमिनेंस से अच्छी एजुकेशन, 300 यूनिट फ्री बिजली और शहीदों को एक करोड़ की मदद सरकार दे रही है। इसके अलावा कई ऐसे काम हैं जो सरकार ने बिना वादे के पूरे किए हैं। इनमें युवाओं को बिना रिश्वत या सिफारिश के रोजगार और अन्य कदम शामिल हैं। आप ने जब सत्ता संभाली थी तब भी सरकार की वित्तीय स्थिति खराब थी, हमारी सरकार इसे सुधारने का प्रयास कर रही है। जैसे ही वित्तीय हालात ठीक हो जाएगी, सरकार की बची हुई महिलाओं को एक हजार रुपये की आर्थिक मदद की गारंटी को भी जल्द ही पूरा किया जाएगा। सीएम बीते साढ़े सात साल से पार्टी के प्रदेश प्रधान थे। सीएम पद के साथ पार्टी की जिम्मेदारी भी संभालना चुनौतीपूर्ण था, इसलिए सीएम ने खुद प्रधान पद की जिम्मेदारी दूसरे को देने की पेशकश की थी।
अमन अरोड़ा-जबसे आम आदमी पार्टी ने सत्ता संभाली है, हमारी सरकार ने गैंगस्टरवाद को जड़ से खत्म करने का काम किया है। आज कई गैंगस्टर सलाखों के पीछे हैं और कुछ पंजाब छोड़कर विदेश भाग गए हैं। प्रदेश में ड्रग्स की समस्या अब भी है, लेकिन हमारी सरकार की इस पर जीरो टॉलरेंस की नीति स्पष्ट है, ड्रग्स तस्करों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
सवाल-2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल में से आप किसे अपना प्रतिद्वंदी मानते हैं?
अमन अरोड़ा-भाजपा की बात करें तो उनके प्रधान सुनील जाखड़ का करीब दो महीने से इस्तीफा मंजूरी के लिए पड़ा है। कांग्रेस और अन्य दलों से भाजपा में गए नेता और उनकी पार्टी के पुराने नेता अपने लीडरशिप को लेकर दिशाहीन हैं। कांग्रेस में वड़िंग, बाजवा और अन्य लीडरों ने पार्टी के अंदर ही अपनी अलग कांग्रेस बनाई हुई है। अकाली दल को प्रदेश की जनता ने सिरे से नकार दिया है।
अमन अरोड़ा-चार सीटों पर हुए उपचुनाव में एक प्रकार से जनता ने सरकार के कामकाज और गारंटियों पर भरोसा जताया है। लोकसभा चुनाव में 13 में से तीन सीटें ही आने के पीछे दो अहम कारण रहे। पहला लोकसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस को इसलिए चुना, क्योंकि राष्ट्रीय मुद्दों पर सत्ता पक्ष के खिलाफ कांग्रेस को लोग अपने विकल्प के रूप में देख रहे थे। राष्ट्रीय और राज्यीय स्तर पर लोगों की नजर में चुनाव के मायने अकसर बदल जाते हैं। राज्य स्तर पर लोग अपने गांव, शहर व क्षेत्र के विकास के लिए लोकल मुद्दों को सुलझाने व बेहतरी के लिए वोट करती है। उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल के चुनाव न लड़ने का फायदा बिल्कुल आम आदमी पार्टी को हुआ है। जब कोई राजनीतिक दल मैदान में नहीं होता, यह स्पष्ट है कि उसका वोट बैंक या जनता अपने हलके के विकास के लिए वोट करती है।
सवाल-बरनाला सीट पर हार जाने के क्या मायने समझते हैं। नतीजा आने के बाद पार्टी क्या अपने स्टैंड को सही मानती है?
अमन अरोड़ा-बेशक बरनाला सीट पर आम आदमी पार्टी की अच्छी पकड़ थी, लेकिन हमारे एक पूर्व नेता के बागी होने से पार्टी को सीट पर हार का सामना करना पड़ा। यह बात भी सही है कि अगर बागी नेता के वोट और हमारे प्रत्याशी के वोट बैंक को जोड़ दिया जाए तो यह सीट भी आप की थी, लेकिन पार्टी का स्टैंड बिल्कुल सही था, जो नेता अपनर महत्वाकंक्षाओं को पूरा करने के लिए पार्टी से बगावत कर दे, वह पूरी तरह गलत है। मैं इस घटनाक्रम के जरिये पार्टी के बाकी युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी यह संदेश देना चाहता हूं कि अपनी महत्वाकंक्षाओं को पार्टी की विचारधाराओं से ऊपर न रखें।