अंतिम सलामी: मां के कंधे पर विदा हुए शहीद अक्षय पठानिया, सेहरा बांध दी गई अंतिम विदाई
शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया की तिरंगे में लिपटीपार्थिव देह जब गांव चक्कड़ पहुंची तो समूह गांववासियों की आंखों से अश्रू धारा बह निकली। पत्थर की मूर्त बनी अक्षय की माता रितू पठानिया ने जब ताबूत में बंद बेटे कोदेखा तो उसकी करुणामयी चीखें पहाड़ों का कलेजा छलनी कर रही थी।
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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की जीरो लाइन पर बर्फीले तूफान की चपेट में आकर शहादत का जाम पीने वाले 24 वर्षीय राइफल मैन अक्षय पठानिया की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह उनके पैतृक गांव चक्कड़ पहुंची। जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामून कैंट से आई सेना की 9 जैक राइफल्स के जवानों ने शस्त्र उलटे कर, हवा में गोलियां दागते हुए व बिगुल की गौरवशाली धुन के साथ शहीद को सलामी दी।
अरुणाचल में मौसम बेहद खराब होने की कारण शहीद का पार्थिव शरीर इतने दिनों बाद अपने गांव पहुंच पाया। आज सेना के एएन 32 विमान केजरिए ताजपुर से एयरलिफ्ट कर उन्हें पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन लाया गया और उसके पश्चातसेना के वाहनों के जरिए उनके पार्थिव शवों को आगे उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।
सेहरा बांध दी अंतिम विदाई
शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया की तिरंगे में लिपटीपार्थिव देह जब गांव चक्कड़ पहुंची तो समूह गांववासियों की आंखों से अश्रू धारा बह निकली। पत्थर की मूर्त बनी अक्षय की माता रितू पठानिया ने जब ताबूत में बंद बेटे कोदेखा तो उसकी करुणामयी चीखें पहाड़ों का कलेजा छलनी कर रही थी। मां बोली उठ अक्षय देख तेरी मां तुझे पुकार रही है आज तू मां का हाल नहीं पूछेगा, आज क्यों तू गहरी नींद सो गया है। मां की यह बातें सुन हरेक की आंखें नम हो उठीं। मां ने जब शहीद बेटे के सिर पर सेहरा सजा व उसकी अर्थी को कंधा देकर उसे अंतिम विदाई दी तो सारा गांव शहीद की बहादुर माता जिंदाबाद के जयघोष से गूंज उठा। वहीं बहन रवीना पठानिया व भाई अमित पठानिया ने जब तिरंगे में लिपटे अपने छोटे भाई अक्षय को देखा तो वो रोते हुए कहने लगे कि आज उनकी एक भुजा उनसे जुदा हो गई है, उसके बिना हमारी दुनियां ही उजड़ गई है।
गांव चक्कड़ का पहला शहीद बना अक्षय
शहीद सैनिकपरिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की ने कहा कि धार ब्लाक का यह एक ऐसा गांव है जो सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से मशहूर है। इस गांव के कई लोग देश सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं और कई सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस गांव के सैनिकों ने 1965 और 1971भारत-पाकिस्तान की जंग में भी अपनी वीरता के जौहर दिखाए हैं। लेकिन, आज तक कोई जवान शहीद नहीं हुआ था। अक्षय पठानिया को गांव चक्कड़ के पहले शहीद के तौर पर जाना जाएगा। उन्होंने मांग करते कहा कि शहीद राइफलमैन अक्षय पठानिया की याद में गांव में एक यादगार गेट बनाने के साथ-साथ सरकारी स्कूल का नाम इनके नाम पर रखा जाए ताकि यहां की युवा पीढ़ी उनके बलिदान से प्ररेणा लेते हुए भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देसकें।
एयरपोर्ट से गांव चक्कड़ तक अक्षय के सम्मान में बिछी फूलों की सेज
शहीद अक्षय पठानिया की पार्थिव देह को लेकर जब सेना के जवान एयरपोर्ट से लेकर उसके गांव की तरफ जाने लगे तो एयरफोर्स स्टेशन के गेटके बाहर क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं ने हाथों में तिरंगे लिए अपने क्षेत्र के लाडलेकी शहादत को नमन किया तथा सैन्य वाहन के आगे मोटर साइकिलों के काफिले के साथ गांव तक उसकी पार्थिव देह लेकर आए। जिस रास्ते से शहीद अक्षय पठानिया की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह गुजरी, लोगों ने फूलों की बरसात कर शहीद को भावभीनी श्रद्घांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों ने जब तक सूरज चांद रहेगा, अक्षय तेरा नाम रहेगा, शहीद अक्षय पठानिया अमर रहे, भारतीय सेना जिंदाबाद व भारत माता की जय के जयघोष लगाकर शहीद को श्रद्धाजंलि दी। रास्ते भर में लोगों ने शहीद अक्षय पठानिया के होर्डिंग लगा रखे थे।
बटाला के शहीद गुरबाज सिंह का सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
अरुणाचल प्रदेश की भारत-चीन की सीमा पर तैनात भारतीय फौज के जवान गुरबाज सिंह के हिमस्खलन की चपेट में आने के कारण शहीद हो गए थे। शनिवार की शाम को शहीद गुरबाज सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मसानिया पहुंचा। शनिवार को गांव मसानिया में 22 वर्षीय शहीद गुरबाज का पूरे सरकारी और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
शहीद के पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरा गांव शहीद गुरबाज सिंह अमर रहे के जय घोष से गूंज उठा। सैनिक की टुकड़ी ने हवाई फायर करके शहीद गुरबाज को श्रद्धांजलि दी। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर शहीद के घर पहुंचा तो गुरबाज की मां हरजीत कौर और बहन की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शहीद की चिता को उनके पिता गुरमीत सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर पहुंचे सैना के अधिकारियों ने सैल्यूट कर श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर बटाला के तहसीलदार जसकरण सिंह ने शहीद गुरबाज सिंह को श्रद्धांजलि भेंट की। इस मौके पर शहीद के परिवार को आश्वासन दिया गया कि सरकारी नीतियों के तहत शहीद के परिवार की हर तरह से मदद की जाएगी। इस मौके पर गांव मसानियां के रहने वाले हरविंदर सिंह और मनजीत सिंह नागरा ने बताया कि गुरबाज सिंह तीन साल पहले भारतीय फौज में भरती हुए थे।
इस समय गुरबाज अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन की सीमा पर तैनात थे और भारतीय सेना की 62 मीडियम फील्ड रेजीमेंट में सेवांए निभा रहे थे। उन्होंने बताया कि 6 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश की भारत-चीन की सरहद पर गश्त कर रहे 7 जवान बर्फ के तूफान की चपेट में आ गए थे। इन जवानों में गुरबाज सिंह शहीद हो गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने गांव के जांबाज जवान गुरबाज सिंह पर फर्क है जिसने अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया।