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दो छात्रों के सहारे सरकारी स्कूल: बठिंडा के प्राइमरी स्कूल में लाइब्रेरी और प्रोजेक्टर पर बच्चे नहीं

Tue, 13 Aug 2024 11:10 AM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 13 Aug 2024 11:10 AM IST
सार

बठिंडा के गांव कोठे बोधे सिंह का प्राइमरी स्कूल दो बच्चों के सहारे चल रहा है। इस स्कूल में सभी तरह की सुख सुविधाएं हैं, लेकिन कुल दो बच्चे ही पढ़ने आते हैं। 

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Bathinda village kothe bodh singh primary school only two student come to study
बठिंडा के गांव कोठे बोध सिंह का सरकारी प्राइमरी स्कूल। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब के बठिंडा में सरकारी स्कूल को बच्चों की दरकार है। बठिंडा के गांव कोठे बोध सिंह में एकमात्र सरकारी प्राइमरी स्कूल है, लेकिन इस स्कूल में बच्चों की गिनती न के बराबर है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल में सभी तरह की सुख सुविधाएं सरकार की तरफ से मुहैया करवाई जा रही हैं। बावजूद स्कूल में पढ़ने के लिए पूरे गांव से 2 ही बच्चे आते हैं। वहीं बीते वर्ष स्कूल में सिर्फ और सिर्फ एक ही बच्चा पढ़ता था, वो भी अब पासआउट होकर दूसरे स्कूल में चला गया है।
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स्कूल शिक्षिका सर्बजीत कौर ने बताया कि वह बीते दो वर्ष से सरकारी प्राइमरी स्कूल कोठे बोध सिंह में सेवारत है। सर्बजीत कौर का कहना है कि गांव के अधिकतर बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। क्योंकि उनके परिवार वालों ने सरकारी स्कूल में उनका दाखिला ही नहीं करवाया। वहीं, अभी स्कूल में कुल दो बच्चे हैं। दोनों बच्चों का इसी साल ही प्री प्राइमरी में दाखिला हुआ है और दोनों बच्चे नर्सरी कक्षा में पढ़ते हैं। 
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50 साल पहले शुरू हुआ था स्कूल

गांव कोठे बोध सिंह में आज से लगभग 50 साल पहले सरकार की तरफ से प्राइमरी स्कूल खोला गया था। वर्ष 1973 से गांव में यह स्कूल चल रहा है। शिक्षिका सर्बजीत कौर का कहना है कि कुछ वर्ष पहले स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या ज्यादा थी। क्योंकि स्कूल का स्टाफ दूसरे गांव के बच्चों को भी इसी स्कूल में पढ़ाने के लिए लाया करता था। स्कूल स्टाफ की तरफ से अपने खर्च पर बच्चों को लाने और ले जाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन अब दूसरे गांव के लोगों ने भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन करवाया है। 

स्कूल में सारी एक्टीविटी 

टीचर सर्बजीत कौर ने बताया कि गांव कोठे बोध सिंह में कुल मिलाकर 20 से 22 छोटे बच्चे हैं। सरकारी प्राइमरी स्कूल में सरकार की तरफ से हर सुविधा दी गई है। स्कूल में सीसीटीवी, प्रोजेक्ट, बच्चों को बैठने के लिए अच्छे बैंच और लाइब्रेरी तक है। स्कूल में तमाम का इंफ्रास्ट्रक्चर है। सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए पूरी सुविधा होने के बावजूद गांव के लोग बच्चों के प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं। 
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