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मुनाफे के लालच में जहर बनाते गए तस्कर
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जहरीली शराब पीने से मारे गए अमृतसर के जंडियाला गुरु के मुच्छल गांव के लोगों के परिजनों से मिलते स?
- फोटो : AMRITSAR
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माझा के तीन जिलों में देसी शराब के नाम पर जहर की प्याली बेचने वाले नशा तस्करों के तार आपस में जुड़े हुए हैं। जहरीली प्याली का यह खेल एक शहर से दूसरे शहर के साथ सटे गांवों में बड़े खुफिया ढंग से पहुंचता गया। जिस नशा तस्कर ने लुधियाना के व्यापारी से जहर बनाने के लिए केमिकल खरीदा, वह मुनाफा बढ़ाने के लिए उसमें और जहरीले केमिकलों की मिलावट करता रहा। वहीं जंडियाला गुरु में मंगलवार को जहरीली शराब पीने वाले रजिंदर सिंह और कारज सिंह ने दम तोड़ दिया। अब मरने वालों की संख्या 15 हो गई है।
अमृतसर (देहाती) पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार इस कांड की शुरुआत लुधियाना शहर से हुई है। एक पेंट कारोबारी राजेश जोशी से मोगा के रविंदर सिंह ने अल्कोहल के 200 लीटर के तीन ड्रम खरीदे। रविंदर ने यह ड्रम मोगा के अवतार सिंह को बेचे। अवतार ने यह ड्रम तरनतारन के गांव पंडोरी गोला के निवासी हरजीत सिंह और उसके दो बेटों को बेच दिए। हरजीत सिंह ने 50 हजार में यह तीनों ड्रम खरीदे और तरनतारन के किसी गांव की झाड़ियों में छिपा दिए।
तरनतारन के गांव पंधेर के गोबिंदर सिंह ने हरजीत सिंह से संपर्क साधा और 6 हजार रुपये में अल्कोहल की 42 बोतल खरीद ली। गोबिंदर सिंह ने पानी की मिलावट कर 42 बोतलों से 46 बोतलें बनाई। 28 जुलाई को गोबिंदर सिंह ने इनमें से 23 बोतल अल्कोहल गांव मुछल की तस्कर बलविंदर कौर के बेटों को 3600 रुपये में बेची। 29 जुलाई को बलविंदर कौर की मांग पर गोबिंदर फिर शेष बची 23 बोतलें उसके बेटों को 3600 रुपये में बेच आया। इसके बाद बलविंदर कौर ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए इन बोतलों में पानी व अन्य केमिकलों की मिलावट कर ये 100 रुपये के हिसाब से बेची। कुछ लोगों को घर में 50 रुपये लेकर भी जहर की प्याली पिलाई। 29 और 30 जुलाई की रात को जब उसके द्वारा बेची शराब से लोगों की मौत होने लगी तो उसने घर में रखी बाकी शराब फेंक दी थी। पुलिस को तीन ड्रम अल्कोहल से बनी 600 लीटर शराब में से साढ़े 31 लीटर शराब के बारे में जानकारी मिली है। बाकी अल्कोहल कहां है, पुलिस जांच कर रही है।
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नशा तस्करों की जायदाद होगी कुर्क : सोनी
मंत्री ओपी सोनी ने गांव मुछल में मारे गए लोगों के परिजनों को विश्वास दिलाया कि जहर बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नशा तस्करों की जायदाद कुर्क होगी। पुलिस ने अब तक इस मामले में छापा मारकर 37 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पांच नशा तस्करों के सरगना है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए तेजी से जांच कर रही है। प्रभावित परिवारों को रेड क्रॉस की तरफ से दस-दस हजार की राशि जल्द जारी की जाएगी। इन परिवारों को जल्द ही पेंशन अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।
रटौल की घटना से पुलिस सबक लेती तो नहीं होती मौतें
तरनतारन। जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए सीधे तौर पर तरनतारन पुलिस जिम्मेदार है। अगर पुलिस ने 16 जुलाई को तरनतारन के ही रटौल गांव में नकली शराब पीने से 3 लोगों की मौत और पूर्व बीएसएफ कर्मी की आंखों की रोशनी जाने के मामले को गंभीरता से लेती तो 15 दिन बाद 110 लोगों को जान बच जाती।
रटौल में जहरीली शराब से दोनों आंखों की रोशनी गंवा चुके रविंदर सिंह बिट्टू की शिकायत पर पुलिस ने 27 जुलाई को प्रकाश सिंह उर्फ पाशी नामक शख्स पर केस तो दर्ज किया मगर उसमें न तो तीन लोगों की मौत को लेकर धारा जोड़ी और न ही जांच में गंभीरता बरती। पाशी पर केस दर्ज होने के 3 दिन बाद 30 जुलाई को मुछल गांव से लोगों के मरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज तक जारी है।
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अमृतसर (देहाती) पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार इस कांड की शुरुआत लुधियाना शहर से हुई है। एक पेंट कारोबारी राजेश जोशी से मोगा के रविंदर सिंह ने अल्कोहल के 200 लीटर के तीन ड्रम खरीदे। रविंदर ने यह ड्रम मोगा के अवतार सिंह को बेचे। अवतार ने यह ड्रम तरनतारन के गांव पंडोरी गोला के निवासी हरजीत सिंह और उसके दो बेटों को बेच दिए। हरजीत सिंह ने 50 हजार में यह तीनों ड्रम खरीदे और तरनतारन के किसी गांव की झाड़ियों में छिपा दिए।
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तरनतारन के गांव पंधेर के गोबिंदर सिंह ने हरजीत सिंह से संपर्क साधा और 6 हजार रुपये में अल्कोहल की 42 बोतल खरीद ली। गोबिंदर सिंह ने पानी की मिलावट कर 42 बोतलों से 46 बोतलें बनाई। 28 जुलाई को गोबिंदर सिंह ने इनमें से 23 बोतल अल्कोहल गांव मुछल की तस्कर बलविंदर कौर के बेटों को 3600 रुपये में बेची। 29 जुलाई को बलविंदर कौर की मांग पर गोबिंदर फिर शेष बची 23 बोतलें उसके बेटों को 3600 रुपये में बेच आया। इसके बाद बलविंदर कौर ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए इन बोतलों में पानी व अन्य केमिकलों की मिलावट कर ये 100 रुपये के हिसाब से बेची। कुछ लोगों को घर में 50 रुपये लेकर भी जहर की प्याली पिलाई। 29 और 30 जुलाई की रात को जब उसके द्वारा बेची शराब से लोगों की मौत होने लगी तो उसने घर में रखी बाकी शराब फेंक दी थी। पुलिस को तीन ड्रम अल्कोहल से बनी 600 लीटर शराब में से साढ़े 31 लीटर शराब के बारे में जानकारी मिली है। बाकी अल्कोहल कहां है, पुलिस जांच कर रही है।
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नशा तस्करों की जायदाद होगी कुर्क : सोनी
मंत्री ओपी सोनी ने गांव मुछल में मारे गए लोगों के परिजनों को विश्वास दिलाया कि जहर बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नशा तस्करों की जायदाद कुर्क होगी। पुलिस ने अब तक इस मामले में छापा मारकर 37 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पांच नशा तस्करों के सरगना है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए तेजी से जांच कर रही है। प्रभावित परिवारों को रेड क्रॉस की तरफ से दस-दस हजार की राशि जल्द जारी की जाएगी। इन परिवारों को जल्द ही पेंशन अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।
रटौल की घटना से पुलिस सबक लेती तो नहीं होती मौतें
तरनतारन। जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए सीधे तौर पर तरनतारन पुलिस जिम्मेदार है। अगर पुलिस ने 16 जुलाई को तरनतारन के ही रटौल गांव में नकली शराब पीने से 3 लोगों की मौत और पूर्व बीएसएफ कर्मी की आंखों की रोशनी जाने के मामले को गंभीरता से लेती तो 15 दिन बाद 110 लोगों को जान बच जाती।
रटौल में जहरीली शराब से दोनों आंखों की रोशनी गंवा चुके रविंदर सिंह बिट्टू की शिकायत पर पुलिस ने 27 जुलाई को प्रकाश सिंह उर्फ पाशी नामक शख्स पर केस तो दर्ज किया मगर उसमें न तो तीन लोगों की मौत को लेकर धारा जोड़ी और न ही जांच में गंभीरता बरती। पाशी पर केस दर्ज होने के 3 दिन बाद 30 जुलाई को मुछल गांव से लोगों के मरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज तक जारी है।