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पब्लिकेशन विभाग से गायब 267 पावन स्वरूपों की जांच करेगी एसजीपीसी
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अमृतसर में श्री अकाल तख्त के स्थापना दिवस पर सजा दीवान साहिब।
- फोटो : AMRITSAR
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में एसजीपीसी के पब्लिकेशन विभाग से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 267 पावन स्वरूप गायब होने पर सख्त रुख अपनाया है। जत्थेदार ने एसजीपीसी को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए जांच रिपोर्ट श्री अकाल तख्त के सचिवालय भेजने के निर्देश दिए हैं। जत्थेदार ने एसजीपीसी को इस संदर्भ में एक पत्र भी लिखा है।
जत्थेदार मंगलवार को श्री अकाल तख्त साहिब के स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने देश भर में श्री गुरु हरी कृष्ण पब्लिक स्कूलों का संचालन करने वाली संस्था चीफ खालसा दीवान के अध्यक्ष निर्मल सिंह खालसा को निर्देश दिए कि दीवान के प्रबंध को चलाने के लिए की जा रही नए सदस्यों की भर्ती के फार्म श्री अकाल तख्त भेजे जाएं। जब तक श्री अकाल तख्त इनकी जांच नहीं कर लेता, तब तक कोई भी नया सदस्य न तो किसी चुनाव में भाग ले सकता है और न ही प्रबंध में शामिल किया जा सकता है। जत्थेदार के अनुसार चीफ खालसा दीवान में की जा रही नई भर्ती को लेकर उन्हें शिकायतें मिली हैं। कुछ पतित सिखों को दीवान में शामिल किया जा रहा है। इसके बारे में सीकेडी को पत्र लिखा गया था, जिसमें निर्देश दिए गए थे कि संविधान के अनुसार नई भर्ती की जाए। सीकेडी ने विश्वास दिलाया था कि वह नई भर्ती की जानकारी 15 दिनों के भीतर भेजेंगे। अभी तक सीकेडी ने यह वादा पूरा नहीं किया है। सिखों की इस प्राचीन संस्था के अस्तित्व को बचाने में श्री अकाल तख्त साहिब कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
खालिस्तान के नाम पर सिख नौजवानों की गिरफ्तारी निंदनीय
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पंजाब पुलिस द्वारा कुछ दिन पहले गिरफ्तार किए खालिस्तान लिबरल फोर्स के आतंकवादियों के मुद्दे पर कहा कि उन्हें शिकायत मिली है कि सुरक्षा एजेंसी सिख नौजवानों पर झूठे केस बना कर उन्हें अरेस्ट कर रही है। यदि ऐसा है तो यह बहुत निंदनीय है। एसजीपीसी को इन सभी नौजवानों की पैरवी करनी चाहिए। एसजीपीसी इसकी पड़ताल करवाए।
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हर शहर, कस्बे और गांव में खोले जाएं मोदी खाने
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने देश भर में बैठी सिख संगत को आदेश दिए हैं कि वह लुधियाना में खोले गए गुरु नानक मोदी खाना की तर्ज पर देश के हर शहर कस्बे और गांव में इस प्रकार की दुकानें खोलें। बेशक यह दुकान नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार न होकर कम मुनाफे के आधार पर हों ताकि लोगों को वाजिब रेट पर दवा मिल सके।
जांच रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को भेजी जाएगी : लौंगोवाल
श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के लिखित आदेश के बाद एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने पब्लिकेशन विभाग के रिकॉर्ड से गायब हुए पावन स्वरूपों की जांच के लिए एक सब-कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी मान सिंह, एसजीपीसी के महासचिव हरजिंदर सिंह धामी, कार्यकारिणी सदस्य सुरजीत सिंह कंग, जगसीर सिंह, गुरतेज सिंह ढडे, सरवन सिंह कुलार और मीत सचिव सिमरजीत सिंह शामिल किए गए हैं। जांच कमेटी जो भी रिपोर्ट देगी, वह श्री अकाल तख्त साहिब भेज दी जाएगी। इससे पहले धर्म प्रचार कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए लौंगोवाल ने पंजाब सरकार से मांग की कि लद्दाख सीमा में चीनी सैनिकों के साथ लड़ते हुए गुरतेज सिंह की जीवन गाथा स्कूलों में पढ़ाई जाए।
2016 में हुए अग्निकांड मामले में पंजाब सरकार को दी गई है शिकायत
18 और 19 मई 2016 की रात को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में आग लगने से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप अग्नि भेंट हो गए थे। एसजीपीसी के सेवादारों ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों द्वारा आग बुझाने के लिए पानी की गई बौछारों से कई स्वरूप गीले हो गए थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह, सचिव मंजीत सिंह, अतिरिक्त सचिव सुखदेव सिंह भुराकोना, दलजीत सिंह बेदी और अन्य अधिकारी मौजूद थे। आरोप है कि शिअद के अध्यक्ष व तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के आदेश पर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। उस समय एसजीपीसी के रिकॉर्ड में 267 पावन स्वरूप कम पाए गए थे। कुछ दिन पहले पंजाब मानवाधिकार संगठन (सेवानिवृत्त जस्टिस जीत सिंह बैंस) के एक पदाधिकारी सरबजीत सिंह वेरका ने पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को एक पत्र लिख कर मांग की थी कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। वेरका ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि एसजीपीसी ने अग्नि भेंट व पानी से गीले हुए पावन स्वरूपों की संख्या के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी। 19 मई को इन पावन स्वरूपों का गुपचुप ढंग से गोइंदवाल साहिब में अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसजीपीसी ने इसका कोई रिकॉर्ड भी अपने पास नहीं रखा। एसजीपीसी को हिदायत थी कि इस मामले की न तो रिकॉर्डिंग की जाए न ही किसी को इसकी जानकारी दी जाए।
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जत्थेदार मंगलवार को श्री अकाल तख्त साहिब के स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने देश भर में श्री गुरु हरी कृष्ण पब्लिक स्कूलों का संचालन करने वाली संस्था चीफ खालसा दीवान के अध्यक्ष निर्मल सिंह खालसा को निर्देश दिए कि दीवान के प्रबंध को चलाने के लिए की जा रही नए सदस्यों की भर्ती के फार्म श्री अकाल तख्त भेजे जाएं। जब तक श्री अकाल तख्त इनकी जांच नहीं कर लेता, तब तक कोई भी नया सदस्य न तो किसी चुनाव में भाग ले सकता है और न ही प्रबंध में शामिल किया जा सकता है। जत्थेदार के अनुसार चीफ खालसा दीवान में की जा रही नई भर्ती को लेकर उन्हें शिकायतें मिली हैं। कुछ पतित सिखों को दीवान में शामिल किया जा रहा है। इसके बारे में सीकेडी को पत्र लिखा गया था, जिसमें निर्देश दिए गए थे कि संविधान के अनुसार नई भर्ती की जाए। सीकेडी ने विश्वास दिलाया था कि वह नई भर्ती की जानकारी 15 दिनों के भीतर भेजेंगे। अभी तक सीकेडी ने यह वादा पूरा नहीं किया है। सिखों की इस प्राचीन संस्था के अस्तित्व को बचाने में श्री अकाल तख्त साहिब कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
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खालिस्तान के नाम पर सिख नौजवानों की गिरफ्तारी निंदनीय
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पंजाब पुलिस द्वारा कुछ दिन पहले गिरफ्तार किए खालिस्तान लिबरल फोर्स के आतंकवादियों के मुद्दे पर कहा कि उन्हें शिकायत मिली है कि सुरक्षा एजेंसी सिख नौजवानों पर झूठे केस बना कर उन्हें अरेस्ट कर रही है। यदि ऐसा है तो यह बहुत निंदनीय है। एसजीपीसी को इन सभी नौजवानों की पैरवी करनी चाहिए। एसजीपीसी इसकी पड़ताल करवाए।
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हर शहर, कस्बे और गांव में खोले जाएं मोदी खाने
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने देश भर में बैठी सिख संगत को आदेश दिए हैं कि वह लुधियाना में खोले गए गुरु नानक मोदी खाना की तर्ज पर देश के हर शहर कस्बे और गांव में इस प्रकार की दुकानें खोलें। बेशक यह दुकान नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार न होकर कम मुनाफे के आधार पर हों ताकि लोगों को वाजिब रेट पर दवा मिल सके।
जांच रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को भेजी जाएगी : लौंगोवाल
श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के लिखित आदेश के बाद एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने पब्लिकेशन विभाग के रिकॉर्ड से गायब हुए पावन स्वरूपों की जांच के लिए एक सब-कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी मान सिंह, एसजीपीसी के महासचिव हरजिंदर सिंह धामी, कार्यकारिणी सदस्य सुरजीत सिंह कंग, जगसीर सिंह, गुरतेज सिंह ढडे, सरवन सिंह कुलार और मीत सचिव सिमरजीत सिंह शामिल किए गए हैं। जांच कमेटी जो भी रिपोर्ट देगी, वह श्री अकाल तख्त साहिब भेज दी जाएगी। इससे पहले धर्म प्रचार कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए लौंगोवाल ने पंजाब सरकार से मांग की कि लद्दाख सीमा में चीनी सैनिकों के साथ लड़ते हुए गुरतेज सिंह की जीवन गाथा स्कूलों में पढ़ाई जाए।
2016 में हुए अग्निकांड मामले में पंजाब सरकार को दी गई है शिकायत
18 और 19 मई 2016 की रात को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में आग लगने से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप अग्नि भेंट हो गए थे। एसजीपीसी के सेवादारों ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों द्वारा आग बुझाने के लिए पानी की गई बौछारों से कई स्वरूप गीले हो गए थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह, सचिव मंजीत सिंह, अतिरिक्त सचिव सुखदेव सिंह भुराकोना, दलजीत सिंह बेदी और अन्य अधिकारी मौजूद थे। आरोप है कि शिअद के अध्यक्ष व तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के आदेश पर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। उस समय एसजीपीसी के रिकॉर्ड में 267 पावन स्वरूप कम पाए गए थे। कुछ दिन पहले पंजाब मानवाधिकार संगठन (सेवानिवृत्त जस्टिस जीत सिंह बैंस) के एक पदाधिकारी सरबजीत सिंह वेरका ने पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को एक पत्र लिख कर मांग की थी कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। वेरका ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि एसजीपीसी ने अग्नि भेंट व पानी से गीले हुए पावन स्वरूपों की संख्या के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी। 19 मई को इन पावन स्वरूपों का गुपचुप ढंग से गोइंदवाल साहिब में अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसजीपीसी ने इसका कोई रिकॉर्ड भी अपने पास नहीं रखा। एसजीपीसी को हिदायत थी कि इस मामले की न तो रिकॉर्डिंग की जाए न ही किसी को इसकी जानकारी दी जाए।