{"_id":"60d3653b8ebc3eba703a3e27","slug":"npa-cut-makes-doctor-disappointed-gurdaspur-news-pkl4176946128","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनपीए को घटाने के फैसले के विरोध में पंजाब सरकार के खिलाफ भडक़े डाक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनपीए को घटाने के फैसले के विरोध में पंजाब सरकार के खिलाफ भडक़े डाक्टर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरदासपुर। डॉक्टरों को 25 फीसदी एनपीए के घटने के विरोध में ज्वाइंट पंजाब गवर्नमेंट डॉक्टर्स कोआर्डिनेशन कमेटी के आह्वान पर अलग अलग संगठनों ने रोष प्रदर्शन करने के बाद डीसी के जरिए पंजाब सरकार को मांग पत्र भेजा है।
डॉ. सुशील, डॉ. अशोक, डॉ. पूजा, डॉ. हरजिंदर, डॉ. अरविंद व डॉ. शाम सिंह ने संयुक्त तौर पर बताया कि अभी तक पंजाब सरकार अपने सरकारी डॉक्टरों को प्राथमिक वेतन के 25 फीसदी के बराबर एनपीए देती आ रही है। यह एनपीए हर लाभ के लिए प्राथमिक वेतन का हिस्सा माना जाता रहा है। मगर बड़े दुख की बात है कि पंजाब सरकार द्वारा गठित छठे वेतन कमीशन ने यह सिफारिश की है कि एनपीए को 25 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया जाए और प्राथमिक वेतन के अलावा कोई भी भत्ता प्राथमिक वेतन का हिस्सा नहीं बनाया जाए।
कोरोना काल के दौरान डॉक्टरों से यह एक धक्का है। सरकारी डॉक्टरों सहित समूह सेहत व पशु पालन विभाग ने इस महामारी के दौरान सही अर्थों में योद्धा बनाकर काम किया है और कर रहे है। सैंकड़ों डॉक्टर इस महामारी के दौरान कोरोना संक्रमित हुए है और कुछ डॉक्टर तो अपनी जान भी गंवा चुके है। लेकिन उनकी हौसला अफजाई करने की बजाए सरकार उनके वेतन घटाकर आर्थिक शोषण करने जा रही है। उन्होंने मांग की कि इस फैसले को तुरंत रद्द किया जाए।
विज्ञापन
इनकी मांगों में एनपीए 33 फीसदी करना, एनपीए को पहले की तरह प्राथमिक वेतन का हिस्सा माना जाए, एनपीए को प्राथमिक वेतन का हिस्सा मानते हुए पेंशन फिक्स किया जाए व कोरोना महामारी से लड़ने वाले डॉक्टरों को भत्ता देना शामिल है।
विज्ञापन
डॉ. सुशील, डॉ. अशोक, डॉ. पूजा, डॉ. हरजिंदर, डॉ. अरविंद व डॉ. शाम सिंह ने संयुक्त तौर पर बताया कि अभी तक पंजाब सरकार अपने सरकारी डॉक्टरों को प्राथमिक वेतन के 25 फीसदी के बराबर एनपीए देती आ रही है। यह एनपीए हर लाभ के लिए प्राथमिक वेतन का हिस्सा माना जाता रहा है। मगर बड़े दुख की बात है कि पंजाब सरकार द्वारा गठित छठे वेतन कमीशन ने यह सिफारिश की है कि एनपीए को 25 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया जाए और प्राथमिक वेतन के अलावा कोई भी भत्ता प्राथमिक वेतन का हिस्सा नहीं बनाया जाए।
विज्ञापन
कोरोना काल के दौरान डॉक्टरों से यह एक धक्का है। सरकारी डॉक्टरों सहित समूह सेहत व पशु पालन विभाग ने इस महामारी के दौरान सही अर्थों में योद्धा बनाकर काम किया है और कर रहे है। सैंकड़ों डॉक्टर इस महामारी के दौरान कोरोना संक्रमित हुए है और कुछ डॉक्टर तो अपनी जान भी गंवा चुके है। लेकिन उनकी हौसला अफजाई करने की बजाए सरकार उनके वेतन घटाकर आर्थिक शोषण करने जा रही है। उन्होंने मांग की कि इस फैसले को तुरंत रद्द किया जाए।
विज्ञापन
इनकी मांगों में एनपीए 33 फीसदी करना, एनपीए को पहले की तरह प्राथमिक वेतन का हिस्सा माना जाए, एनपीए को प्राथमिक वेतन का हिस्सा मानते हुए पेंशन फिक्स किया जाए व कोरोना महामारी से लड़ने वाले डॉक्टरों को भत्ता देना शामिल है।